Tokyo Olympics: हॉकी कप्तान मनप्रीत ने कोरोना वॉरियर्स को समर्पित किया कांस्य पदक, कहा- हम लड़े और अंत तक हार नहीं मानी
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने जर्मनी के खिलाफ जीते गए कांस्य पदक को कोरोना वॉरियर्स को समर्पित किया है। कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में भारत ने जर्मनी को 5-4 से पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
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टोक्यो ओलंपिक में 5 अगस्त को भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया। कांस्य पदक के लिए खेले गए मुकाबले में भारत ने बेहद रोमांचक मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से शिकस्त देकर मेडल जीत लिया। भारत की इस ऐतिहासिक जीत पर पूरे देश में जश्न का माहौल है। भारत ने ओलंपिक में हॉकी में यह पदक 41 साल बाद जीता। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने इस कांस्य पदक को डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को समर्पित किया है जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अथक प्रयास करते हुए लोगों को बचाया।
पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाले 29 वर्षीय कप्तान मनप्रीत जर्मनी पर 5-4 की जीत दर्ज करने के बाद भाव-विभोर थे। ओलंपिक में भारत द्वारा हॉकी में जीता गया यह 12वां पदक था। वहीं, भारत हॉकी में चार दशक बाद पदक जीता है। इससे पहले हॉकी टीम ने साल 1980 में मास्को में हुए ओलंपिक में पदक जीता था। भारत ने ओलंपिक में हॉकी स्पर्धा में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं।
पदक जीतने के बाद मनप्रीत सिंह ने कहा, मैं नहीं जानता कि मुझे क्या कहना है यह शानदार जीत थी, हम 3-1 से पीछे थे, लेकिन हम मेडल के हकदार थे। उन्होने कहा, हमने बहुत मेहनत की है, पिछले 15 महीने हमारे लिए भी मुश्किल भरे थे, हम बैंगलोर में थे और हममें से कुछ को भी कोविड हो गया। इसलिए हम इस पदक को उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को समर्पित करना चाहते हैं जिन्होंने भारत में कई लोगों की जान बचाई है।
इस मुकाबले में जर्मनी ने भारतीय हॉकी टीम की कड़ी परीक्षा ली और मनप्रीत ने विपक्षी टीम के इस साहस को स्वीकार भी किया। मनप्रीत ने कहा यह मुश्किल था उन्हें आखिरी छह सेकेंड में पेनल्टी कॉर्नर मिला, हमने सोचा कि हमें इस बचाना होगा, यह मेरे लिए मुश्किल है।
मनप्रीत के मुताबिक हमें ओलंपिक में पदक जीते लंबा अरसा बीत चुका था, अब हमें और आत्मविश्वास मिलेगा, हां हम ऐसा कर सकते हैं, अगर हम ओलंपिक में पोडियम पर खत्म कर सकते हैं तो कहीं भी पोडियम पर खत्म कर सकते हैं।