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स्टार ड्रैग फ्लिकर को है भरोसा, एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतेगी टीम इंडिया

Mon, 23 Jul 2018 07:55 PM IST
सत्येंद्र पाल सिंह, नई दिल्ली, अमर उजाला
सत्येंद्र पाल सिंह, नई दिल्ली, अमर उजाला Updated Mon, 23 Jul 2018 07:55 PM IST
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rupinder pal singh hopes to win gold medal in asian games 2018
रूपिंदर पाल सिंह

रूपिंदर पाल सिंह करीब एक दशक से भारतीय हॉकी टीम के तुरुप के ड्रैग फ्लिकर रहे हैं। रूपिंदर को जांघ की मांसपेशी में खिंचाव के चलते चैंपियंस ट्रॉफी के लिए आराम दिया गया था। दोस्तों में 'बॉब' के नाम से जाने वाले रूपिंदर ने फिट होकर जकार्ता एशियाई खेलों के लिए भारतीय हॉकी टीम में वापसी की है। 

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एशियाड से ठीक पहले बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया के खिलाफ दोस्ताना और न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार को हॉकी टेस्ट सीरीज में रूपिंदर ने सबसे ज्यादा गोल कर भारत को सभी सीरीज जिता यह दिखाया कि वह अब पूरी तरह फिट हैं। 
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रूपिंदर से 'अमर उजाला'  ने उनकी एशियाड की तैयारियों और इनमें भारत की संभावनाओं पर बात की।  27 वर्षीय रूपिंदर ने कहा, 'एशियाई खेलों के लिए हम किसी भी तरह के दबाव में नहीं है। टीम अपनी रणनीति पर काबिज रहकर उसे एशियाई खेलों में मैदान पर कार्यान्वित करने पर फोकस हैं। हमारी टीम की ताकत उसका एका है। जब टीम एक इकाई के रूप में खेलती है तो उसके पदक जीतने के अवसर बढ़ जाते हैं।' 
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ड्रैग फ्लिकर ने आगे कहा, 'हम किसी भी टीम को हल्के नहीं लेंगे, लेकिन हमारी टीम को खुद की क्षमता और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक बरकरार रखने का विश्वास है। हमारा ध्यान बतौर टीम अपने खेल का लुत्फ उठाकर एशियाई खेलों में अपना खिताब बरकरार रख टोक्यो ओलंपिक के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने पर है। भारत को एशियाड में जिस तरह की अनुभवी और पूरी टीम चाहिए थी वह इस वक्त उसके पास है।' 

भारतीय हॉकी टीम के लिए यह सुखद खबर है

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हॉकी इंडिया

रूपिंदर ने आगे कहा, 'सरदार सिंह, आकाशदीप और बीरेंद्र लाकड़ा सरीखे सदाबहार खिलाड़ियों का अनुभव एफआईएच के अहम टूर्नामेंट के साथ-साथ एशियाड जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने का अनुभव, जकार्ता एशियाई खेलों में दबाव से उबरने में बहुत काम आएगा। सरदार और लाकड़ा ने चैंपियंस ट्रॉफी में भारत को रजत पदक दिला इस अनुभव की अहमियत साबित की। अब मेरे साथ फिट होकर बतौर स्ट्राइकर आकाशदीप की एशियाड के लिए टीम में वापसी भारत के लिए बहुत सुखद है। चैंपियंस ट्रॉफी बीरेंद्र लाकड़ा की शानदार वापसी से रक्षापंक्ति को नया आत्मविश्वास मिला है।'

भारत के लिए 200 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने की ओर बढ़ रहे अब तक 82 गोल चुके रूपिंदर कहते हैं, ' हमारी टीम का माहौल बहुत अच्छा है। ब्रेडा में चैंपियंस ट्रॉफी में चीफ कोच हरेन्द्र सर के मार्गदर्शन में रजत पदक जीतने से हमारी टीम विश्वास से सराबोर नजर आ रही है। इससे भारतीय टीम को जकार्ता एशियाई खेलों के लिए यह विश्वास आया है कि किसी भी टीम को हरा सकती है। हमारे चीफ कोच हरेन्द्र सर का टीम के हर खिलाड़ी के साथ उसकी भाषा में सहज संवाद हर खिलाड़ी को बेहतर करने का विश्वास देता है।' 

उन्होंने आगे कहा, 'हरेन्द्र सर  को हर खिलाड़ी की ताकत मालूम है और वह इसीलिए खिलाड़ी से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने में कामयाब हो रहे हैं। हमारी टीम के लिए एक अच्छी बात यह है कि टीम में बतौर ड्रैग फ्लिकर मेरे , हरमनप्रीत सिंह, वरुण कुमार और अमित रोहिदास के बीच एक अच्छी और स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता है। हर ड्रैग फ्लिकर को बेहतर प्रदर्शन कर और गोल करने को प्रेरित करती है। यही हमारी ताकत भी है। हमने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने के साथ पेनल्टी कॉर्नर पर किले की हिफाजत पर खास तवज्जो दी है।'

फिटनेस पर कड़ी मेहनत करके भारतीय टीम में लौट पाए रूपिंदर

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hockey

रूपिंदर बताते हैं, 'एशियाड से पहले न्यूजीलैंड सरीखी टीमों के खिलाफ तीन सीरीज में जीत से टीम से सभी खिलाड़ियों को एक-दूसरे से बेहतर तालमेल बैठाने का मौका मिला है। हमने एशियाड से पहले 'डी' के भीतर अपनी निशानेबाजी बेहतर कर अचूक निशानों पर तवज्जो  दी है। साथ ही हमने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने के साथ इस बात पर ध्यान दिया है कि प्रतिद्वंद्वी टीम हमारे खिलाफ पेनल्टी कॉर्नर कम से कम हासिल कर पाए। मैंने अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत की है। इसी की बदौलत में एशियाड के लिए भारतीय टीम में वापसी कर पाया।' 

बकौल रूपिंदर 'चैंपियंस ट्रॉफी में रमनदीप सिंह जैसे अनुभवी स्ट्राइकर को पहले मैच में उनके पाकिस्तान के खिलाफ गोल करने के बाद पूरा टूर्नामेंट हमारी भारतीय टीम 18 की बजाय 17 खिलाड़ियों से खेली। फाइनल में हमारे पास रमनदीप जैसा अनुभवी स्ट्राइकर होता तो हम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौकों का और बेहतर कर पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी खिताब अपने नाम कर सकते थे।'

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