कप्तान रानी को ओलंपिक प्रवेश का नहीं हो रहा यकीन, कहा- पहली बाधा हमने पार कर ली है
भारतीय महिला हॉकी टीम को ओलंपिक टिकट दिलाने में कप्तान एवं अनुभवी स्ट्राइकर रानी रामपाल की अहम भूमिका रही। भुवनेश्वर में दो चरणों के क्वालीफ़ायर मुकाबले के दूसरे मैच में 1-4 से हार के बावजूद अमेरिका के खिलाफ उनका गोल निर्णायक रहा। भारत की महिला हॉकी टीम ने दो मैचों में कुल 6-5 से जीत के साथ 2020 के टोक्यो ओलंपिक का टिकट दिला दिया।
भारत ने लगातार दूसरी और कुल तीसरी बार ओलंपिक में खेलने का हक पाया। रानी रामपाल ने अपने घर शाहबाद मरकंडा लौटने पर फोन पर कहा, 'मैं अभी भी यह विश्वास नहीं कर पा रही हूं कि हमने वाकई टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर लिया है। ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने की पहली बाधा हमने पार कर ली है। अब हमारे पास ओलंपिक की तैयारी और इसमें पदक जीतने के मकसद को हासिल करने के लिए पर्याप्त वक्त है। अब एक पखवाड़े के आराम के बाद भारतीय महिलाओं का राष्ट्रीय शिविर बेंगलुरू में शुरू होगा।’
दूसरा मैच भी जीतते तो उपलब्धि खास होती
रानी रामपाल ने कहा, 'अमेरिका के खिलाफ दूसरे मैच में जीतते तो यह उपलब्धि और खास होती। पहले मैच में हमारी अमेरिका पर 5-1 से जीत दूसरे मैच मे 1-4 से हार के बावजूद ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने में खासी अहम रही। पहले हाफ तक 0-4 से पिछडने के बाद शनिवार को अमेरिका के खिलाफ दूसरे मैच में हाफ टाइम में कोच शुएर्ड मराइन से बातचीत ने हमारी किस्मत ही बदल दी। हमने तीसरे क्वॉर्टर में अपना खेल संभाल कर मैच में वापसी की। हमने हार नहीं मानी और चौथे और अंतिम क्वॉर्टर में हमने जीवट दिखाया और मैं एक गोल करने में कामयाब रही। हमने पूरे साल बहुत मेहनत की थी। ट्रेनिंग में भी हम इस तरह की स्थिति से दो चार हो चुके थे। हम पिछले साल महिला विश्व कप में अमेरिका से हाफ टाइम तक 0-1से पिछड़ रहे थे लेकिन तब भी हमने दूसरे हाफ में गोल कर हमने एक-एक की बराबरी की।
सीनियर खिलाड़ियों का मार्गदर्शन अहम
भारतीय कप्तान मनप्रीत का कहना है कि सफलता में सीनियर खिलाड़ियों एस वी सुनील, ललित उपाध्याय, रूपिंदर पाल सिंह और रमनदीप की अहम भूमिका रही और यही अनुभव टोक्यो ओलंपिक में भारत की चुनौती को आगे ले जाने में सफल रहेगा। मनप्रीत ने कहा, ‘मैन ऑफ द क्वालिफायर्स रहे अनुभवी स्ट्राइकर एस वी सुनील का युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभव बांटना बेशकीमती साबित हुआ। इसी तरह अनुभवी रूपिंदर और श्रीजेश ने भी साथियों को मानसिक रूप से मजबूत किया। हमें अब ओलंपिक पर पूरी तरह फोकस करने की जरूरत है। ’