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ओलंपिक: मनप्रीत ने लिखी संघर्षों पर सफलता की कहानी, जानें मीठापुर से टोक्यो तक का सफर 

Fri, 09 Jul 2021 08:12 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 09 Jul 2021 08:12 PM IST
सार

पंजाब के मीठापुर गांव से निकलकर टोक्यो में तिरंगा थामने के मौके तक भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने संघर्षों पर सफलता की एक नई कहानी लिख दी है। टोक्यो में 23 जुलाई को ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में मनप्रीत मशहूर मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम के साथ भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे।

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Olympic: Moulded by challenges, Manpreet Singh aims to make sacrifices count in Tokyo
मनप्रीत सिंह

विस्तार

बचपन में अपनी मां को घर चलाने के लिए संघर्ष करता देख बड़े होकर कुछ खास करना उसका सपना बन गया। पंजाब के मीठापुर गांव से निकलकर टोक्यो में तिरंगा थामने के मौके तक भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने संघर्षों पर सफलता की एक नई कहानी लिख दी है। टोक्यो में 23 जुलाई को ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में मनप्रीत मशहूर मुक्केबाज एम सी मैरीकॉम के साथ भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। यह सम्मान पाने वाले वह छठे और परगट सिंह (अटलांटा ओलंपिक 1996 ) के बाद पहले हॉकी खिलाड़ी हैं।

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मनप्रीत ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'मैने कभी नहीं सोचा था कि यह मौका मिलेगा। मुझे पता चला तो मैं स्तब्ध रह गया। पता ही नहीं चला कि क्या बोलूं। मेरे और भारतीय हॉकी के लिये यह बहुत बड़ा पल है । मीठापुर से परगट सर के बाद मैं दूसरा खिलाड़ी हूं जो ओलंपिक में भारतीय दल का ध्वजवाहक बनूंगा।' भारतीय टीम में 2011 में पदार्पण करने वाले मनप्रीत के लिए मीठापुर से तोक्यो तक के सफर में बहुत कुछ बदल गया। उन्होंने कहा, 'मैने अच्छे खिलाड़ियों से बहुत कुछ सीखा। जिदंगी में भी काफी उतार चढाव देखे और अब पीछे मुड़कर देखने पर गर्व होता है कि मैं अपने परिवार का, गांव का और देश का नाम रोशन कर सका।'
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अपने संघर्षों के बारे में उन्होंने बताया, 'मेरे पिता दुबई में कारपेंटर का काम करते थे। जब मैं दस साल का था तो वह मानसिक परेशानी के कारण भारत लौट आये और फिर कोई काम नहीं कर सके। हम तीन भाई थे और परिवार में ऐसा कोई नहीं था जो घर चला सके।' उन्होंने कहा, 'मेरी मां ने सिलाई वगैरह करके हमें पाला। मैने अपनी मां को संघर्ष करते देखा है और मैं असहाय महसूस करता था कि छोटा होने के कारण कोई मदद नहीं कर सकता था लेकिन मैने ठान ली थी कि एक दिन अपनी मां को गर्व करने का मौका दूंगा।'

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जब मैं तिरंगा थामकर चलूंगा तो वह आसमान से मुझे आशीर्वाद दे रहे होंगे

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मनप्रीत सिंह

पंजाब के मीठापुर गांव में ही जन्में परगट सिंह उनके आदर्श थे। उन्होंने कहा, 'मैं देखता था कि गांव में उनकी कितनी इज्जत है। वह उस समय डीएसपी थे और मैं बचपन में उनसे मिला तो मैने कहा कि मैं भी एक दिन आपकी तरह डीएसपी बनूंगा और आज मैं उसी पद पर हूं।' मनप्रीत ने कहा कि कभी हार नहीं मानने का जज्बा उन्होंने बचपन के संघर्षों से सीखा। उन्हें सबसे ज्यादा अपने पिता की कमी महसूस हो रही है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मम्मी को जब पता चला कि मुझे यह मौका मिला है तो वह बहुत भावुक हो गई। मैं अपने पिता का लाड़ला था लेकिन मेरी जिदंगी का सबसे अहम पल देखने के लिए वह नहीं हैं। मुझे कप्तान बनते भी वह नहीं देख सके। उनका सपना था कि मैं भारत के लिए खेलूं। मुझे यकीन है कि टोक्यो में जब मैं तिरंगा थामकर चलूंगा तो वह आसमान से कहीं मुझे आशीर्वाद दे रहे होंगे।'

मनप्रीत ने कहा, 'मैं खुशकिस्मत हूं कि इन लीजैंड के साथ मेरा नाम आएगा। मेरे सारे सपने पूरे हो रहे हैं और अब एक ही सपना बचा है, ओलंपिक में पदक जीतने का।' अपेक्षाओं का अहसास होने के बावजूद उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। उन्होंने कहा, 'अपेक्षाओं का दबाव नहीं है बल्कि हम इसे सकारात्मक लेते हैं। हॉकी में ओलंपिक पदक के लिए 40 साल से देश इंतजार कर रहा है और अच्छा लगता है कि पूरे देश की दुआएं आपके साथ है और सभी आपको पदक जीतते देखना चाहते हैं।' ओलंपिक में भारत का ध्वजवाहक बनने का सम्मान हॉकी में लाल सिंह बुखारी( 1932 लॉस एंजिलिस), मेजर ध्यानचंद (1936 म्युनिख), बलबीर सिंह सीनियर (1952 हेलसिंकी), जफर इकबाल (1984 लॉस एंजिलिस) और परगट (1996 अटलांटा) को मिला है।

हम किसी से कम नहीं

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मनप्रीत सिंह

उन्हें टीम की काबिलियत पर यकीन है और शीर्ष टीमों को हराने का आत्मविश्वास भी। पिछले चार साल से टीम के कप्तान मनप्रीत ने कहा, 'इस टीम में जुझारूपन है और विरोधी टीम के रसूख से यह खौफ नहीं खाती । हमारे 19 खिलाड़ियों ने योयो टेस्ट पास किया है और फिटनेस में हम किसी से कम नहीं हैं। नीदरलैंड, बेंल्जियम, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ पूरे समय तक एक ऊर्जा के सथ खेल रहे हैं।' अपना तीसरा ओलंपिक खेलने जा रहे मनप्रीत ने कहा कि लॉकडाउन में साथ रहते हुए टीम का आपसी तालमेल बेहतरीन हुआ है जो प्रदर्शन में नजर आएगा। उन्होंने कहा, 'लॉकडाउन में हमने एक दूसरे के परिवार और संघर्षों के बारे में जाना और एक दूसरे के और करीब आए। ओलंपिक में हम सभी एक ईकाई के रूप में इन संघर्षों पर सफलता की नई दास्तान लिखने के इरादे से उतरेंगे।'

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