हॉकी इंडिया मेरी मांगें माने तो मैं जूनियर हॉकी टीम का कोच बनने को तैयार : हरेन्द्र
हरेन्द्र सिंह को भारत की जूनियर हॉकी टीम के कोच की जिम्मेदारी संभालने से कोई ऐतराज नहीं बशर्तें हॉकी इंडिया उनकी मांगें माने। यह खुलासा हरेन्द्र सिंह ने 'अमर उजाला' से बुधवार को किया। हरेन्द्र फिलहाल पुणे में हैं। हरेन्द्र सिंह ने कहा, 'मुझे भारत की जूनियर हॉकी टीम को संभालने से कोई परहेज नहीं है लेकिन मेरी कुछ मांगें हैं। यदि हॉकी इंडिया उन्हें मानने को तैयार है तो मैं भारत की जूनियर हॉकी टीम के कोच का पद संभालने को तैयार हूं। अगर हॉकी इंडिया को मेरी ये मांगे मंजूर नहीं हैं तो भी मुझे कोई शिकवा नहीं है। मैं यह बात हॉकी इंडिया को दिए जवाब में लिख भी चुका हूं। मेरा बस यही कहना है कि विदेशी कोच को हॉकी इंडिया सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है और उसकी सभी मांगे मानता हैं। ऐसे में हॉकी इंडिया को खालिस देशी भारतीय हॉकी कोच को भी विदेशी कोच जैसी सभी सुविधाएं जरूर देनी चाहिए।’
हरेन्द्र सिंह को भारत की पुरुष हॉकी टीम के चीफ कोच पद से हटाने के बाद हॉकी इंडिया की हाई परफॉर्मेंस एवं डेवलेपमेंट कमेटी ने हरेन्द्र को फिर से भारत के लड़कों की जूनियर हॉकी टीम की कमान सौंपने की सिफारिश की थी। तब कमेटी ने यह भी कहा था कि हरेन्द्र यदि जूनियर टीम क चीफ कोच का पद संभालने से इनकार करते हैं तो फिर वह 2021 के जूनियर विश्व कप के मद्देनजर विदेशी कोच तलाशेगी। दरअसल यह कमेटी एक तीर से दो शिकार करने का दांव खेल रही थी। बिना किसी तर्क और कारण के वह भारत की मौजूदा जूनियर हॉकी टीम के कोच जूड फेलिक्स को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर चुकी है। हरेन्द्र भारत की जूनियर हॉकी टीम के चीफ कोच की जिम्मेदारी संभालते है तो कमेटी का दांव नाकाम हो जाएगा।
डेविड की हरेंद्र से नहीं बनती
दरअसल हॉकी इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन ही हॉकी इंडिया को पर्दे के पीछे से चला रहे हैं। जूड फेलिक्स भी हरेन्द्र की तरह डेविड जॉन के किसी भी फैसले को मानने से पहले उनसे बराबर तर्क करते रहे हैं। यही डेविड जॉन को गवारा नहीं है। जब हरेन्द्र को भारत की सीनियर हॉकी टीम के चीफ कोच पद से हटाया गया था तब तब लाख टके का सवाल यही था कि क्या वह भारत की जूनियर हॉकी टीम की जिम्मेदारी संभालने को तैयार होंगे। इस सवाल का जवाब हरेन्द्र ने तब न देकर बुधवार को दिया।
हॉकी इंडिया की हाई परफॉर्मेंस और डेवलेपमेंट समिति के भारतीय टीम के चयन में पूरी आजादी देने के दावे को हरेन्द्र हॉकी इंडिया और साई को लिखे पत्र में गलत बताया था। हरेन्द्र ने यह भी लिखा था कि ओडिशा हॉकी विश्व कप में भारत के नीदरलैंड के खिलाफ क्वॉर्टर फाइनल की पूर्व संध्या पर हॉकी इंडिया की सीईओ इलिना नॉर्मन के कप्तान मनप्रीत सिंह सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों से अशिष्टता का टीम के खेल पर बहुत उलटा असर पड़ा। यही टीम की हार का कारण भी रहा। इस पर हॉकी इंडिया की सीईओ इलिना नॉर्मन की तो खासी आलोचना हुई ही हॉकी इंडिया की बहुत छीछालेदार हुई। इस घटना को अमर उजाला ने तब सबसे प्रमुखता से छापा था। हरेन्द्र के मार्गदर्शन में 2013-2016 के बीच भारत के कुछ जूनियर खिलाड़ियों ने अपना खासा नाम किया था।