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हॉकी विश्व कप: खत्म हुई तैयारी अब असल इम्तिहान की बारी, आज भारत की दक्षिण अफ्रीका से पहली टक्कर

Wed, 28 Nov 2018 01:37 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Nov 2018 01:37 AM IST
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Hockey world cup 2018: india vs south africa face-off today at bhubaneswar
Hockey World Cup 2018

तैयारी खत्म अब भारत के असल इम्तिहान की बारी है। कप्तान सेंटर हाफ मनप्रीत सिंह की अगुआई में मेजबान भारत दुनिया की शीर्ष 16 टीमों के हॉकी 'कुंभ' में बुधवार को अपने अभियान का आगाज दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से करेगा।

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भारत का पहला लक्ष्य अपने पूल 'सी' में सभी मैच जीत शीर्ष पर रह कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने का होगा। भारत के पूल में चारों टीमें अलग-अलग शैली से खेलने वाली हैं। भारत को पूल में सबसे कड़ी चुनौती बेल्जियम से मिलेगी इसके बावजूद भारत को दक्षिण अफ्रीका और कनाडा को हल्के लेने की भूल से बचना होगा। 

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भारत की ताकत आक्रामक हॉकी

भारत की ताकत आक्रामक हॉकी है और उसी पर काबिज रहने के साथ भारत को अपने युवा तुर्कों पर भरोसा रखना होगा। भारतीय टीम के सामने इस बार अपने हॉकी प्रेमियों को पदक की सौगात देने की चुनौती होगी भले ही इस पदक का रंग कुछ भी हो।

यदि पदक का रंग सुनहरा हो तो मेजबान के नाते सोने पर सुहागा होगा। भारत तीसरी बार हॉकी विश्व कप की मेजबानी कर रहा है। चीफ कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में घर में पदक  जीतने की हसरत को पूरा करने के लिए भारत की कोशिश दक्षिण अफ्रीका पर बड़ी जीत के साथ आगाज कर शुरू से ही लय पाने की होगी। 
 

रैंकिंग बेहतर होने से मनोवैज्ञानिक लाभ  

भारत एफआईएच रैंकिंग में पांचवें स्थान पर है और दक्षिण अफ्रीका 15वें पायदान है। मैदान पर उतरने पर रैंकिंग मायने नहीं रखती। फिर भी यह हकीकत है कि भारत अपनी ऊंची  रैंकिंग के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मनोवैज्ञानिक लाभ की स्थिति में होगा।

विश्व कप जिस तरह का फार्मेट है और उसमें भारत को क्रासओवर से बचने के लिए अपना ध्यान सभी पूल मैच जीतने पर लगाना होगा। भारत की अग्रिम पंक्ति में खासतौर पर मनदीप, दिलप्रीत और सिमरनजीत की त्रिमूर्ति ने डी में कुछ धैर्य दिखाया तो फिर बेल्जियम की मजबूत चुनौती के बावजूद अपने पूल में शीर्ष पर रह कर क्वार्टर फाइनल ही नहीं उससे भी आगे सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद दिख रही हैं। 
 

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दक्षिण अफ्रीका से चौकन्ना रहने की जरूरत 

दक्षिण अफ्रीका से भारत की टीम हाल में सिर्फ 2016 के रियो ओलंपिक में एक प्रैक्टिस मैच खेली थे उसमें जीते थे। भारतीय टीम इस जीत को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहा है। बड़े टूर्नामेंट की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका से अंतिम बार छह साल पहले भारतीय टीम लंदन ओलंपिक में भिड़ी थी तब 2-3 से हार गई थी।

भारत ने दक्षिण अफ्रीका के सबसे अनुभवी स्कीमर ऑस्टिन स्मिथ, कप्तान टिम ड्रमंड और जूलियन हाइक , रेट हॉलकेट जैसे सवा सौ से ज्यादा मैच खेल अनुभवी खिलाड़ियों खासतौर पर स्मिथ की मजबूत चौकसी की तो फिर उसकी जीत की राह आसान हो जाएगी। भारत को दक्षिण अफ्रीका के जवाबी हमलों से चौकस रहना होगा। 

भारतीय टीम में है दमखम 

चीफ कोच हरेन्द्र विश्व कप से अपने सभी संयोजनों को आजमाने के साथ अपनी रणनीति तैयार कर चुके हैं। भारत की अग्रिम पंक्ति में मनदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह और सिमरनजीत सिंह पर गोल करने की जिम्मेदारी रहेगी। आकाशदीप और ललित उपाध्याय लिंकमैन के रूप में अपनी तुरुप चाल चलने की कोशिश करेंगे।

आकाशदीप सिंह और ललित उपाध्याय लिंकमैन के रूप में जरूरी संतुलन देंगे। हरमनप्रीत, वरुण कुमार और अमित रोहिदास के रूप में ड्रैग फ्लिकर के रूप में पेनाल्टी कॉर्नर का बेहतरीन इस्तेमाल के लिए ट्रिपल ‘बैटरी’ हैं।

कप्तान मनप्रीत सिंह, चिंगलेनसाना सिंह, हार्दिक सिंह ,नीलकांत और सुमित के रूप में बेहतरीन मध्यपंक्ति है। बीरेन्द्र लाकड़ा, सुरेन्दर कुमार, वरुण कुमार, अमित रोहिदास जैसे फुलबैक की रक्षापंक्ति में सदाबहार गोलरक्षक पीआर श्रीजेश की मौजूदगी किले की ज्यादा मजबूती से चौकसी का विश्वास देगा।

नई इबारत लिखने उतरेंगे : हरेन्द्र 

चीफ कोच हरेन्द्र सिंह ने अमर उजाला से कहा कि टीम के पहले मैच में जीत से टीम पर अगले मैचों के लिए दबाव आधा रह जाएगा। उनकी कोशिश दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत के साथ आगाज कर लय पाने की होगी। टीम अब एशियाई खेलों में मलयेशिया के हाथों सेमीफाइनल की हार को भुला कर इस बार घर में कामयाबी की नई इबारत लिखने के संकल्प से उतरेगी।

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शूटआउट में रिकॉर्ड बेहतर नहीं 

भारत ने शूटआउट में से 29 में से 18  मैच जीते हैं। बदकिस्मती से पिछले तीन शूटआउट में भारत हारा लगातार हारा है। भारत की टीम ट्रेनिंग में शूटआउट में एनालिटिकल कोच क्रिस सिरिलो के मार्गदर्शन में इसकी खास तैयारी करनी दिखी। शूटआउट की स्थिति में हरेन्द्र को उम्मीद है कि गोलरक्षक पीआर श्रीजेश से नैया किनारे लगा देंगे।
शुभ रहता है जीत से आगाज 

इतिहास गवाह है

इतिहास गवाह है कि भारत ने विश्व कप सहित जिस भी बड़े टूर्नामेंट में भी जीत के साथ आगाज किया तो वह अपनी चुनौती काफी आगे तक गई है। भारत ने 1971 में बासिलोना में फ्रांस, 1973 में एस्टलवीन में जापान, 1975 में कुआललंपुर के विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ जीत के साथ आगाज करते हुए क्रमश: कांसा, रजत और  फिर सुनहरा तमगा  जीता।

वहीं इसके बाद भारत ने 1982 में मुंबई में मलयेशिया और 1994 में दक्षिण कोरिया के खिलाफ सिडनी के खिलाफ जीत के साथ आगाज कर पांचवां स्थान पाया। इसके बाद तो भारत का प्रदर्शन विश्व कप दर विश्व कप नीचे गिरता गया।

अपने खर्चे पर आए हैं दक्षिण अफ्रीकी 

दुनिया की 15वें नंबर की टीम दक्षिण अफ्रीका के कोच मार्क होपकिन्स ने कहा कि हम विश्व कप के लिए आए हैं और इसके लिए खिलाड़ियों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ा है। उन्होंने शिविर का हिस्सा बनने के लिए पैसे दिए हमारी चुनौती पैसे का इंतजाम करना है।

हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास कुछ प्रायोजक हैं, लेकिन हमारी प्रायोजन राशि से विश्व कप के बजट का इंतजाम नहीं हो सकता। होपकिन्स ने कहा, ‘फिलहाल हमारे पास पैसे की कमी है और अगर हम इस कमी को पूरा नहीं कर पाए तो संभावना है कि खिलाड़ियों को विश्व कप दौरे के लिए भुगतान करना पड़ सकता है।’

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