जर्मनी चैंपियन, कांस्य से भी चूका भारत
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पाकिस्तान के खिलाड़ियों के भारत के खिलाफ शनिवार को सेमीफाइनल जीतने के जोश में मर्यादा लांघने के बाद मेजबान टीम के दर्शक रविवार को चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी फाइनल में पूरी तरह जर्मनी के साथ दिखे। सही मायनों में कलिंगा स्टेडियम में करीब सात हजार दर्शक जर्मनी के हर अभियान पर क्रिस्टोफर रूइर, फ्लोरियन फुश्च और मार्टिन ज्वीकर की हौसला आफजाई कर रहे थे। जर्मनी ने भी अपने भारतीय समर्थकों को निराश नहीं किया और दसवीं बार दुनिया की चैंपियन टीमों की जंग में खिताब जीत कर खुद को असली चैंपियन साबित किया।
जर्मनी के यंग स्ट्राइकर क्रिस्टोफर रूईर और अनुभवी डिफेंडर कप्तान मरकज वीज की जोड़ी ने रंग जमा दिया। रूईर ने दोनों छोर से हमले बोलकर यह दर्शाया कि जोश के साथ होश का मेल हो जाए तो टीम कोई भी इम्तिहान पास कर सकती है। जर्मनी ने दूसरे और आखिरी क्वार्टर में बेहतरीन मैदानी गोल कर पाकिस्तान को फाइनल में यहां रविवार को 2-0 से हराकर खिताब जीत लिया। जर्मनी की ओर से क्रिस्टोफर वेस्ली और फ्लोरियन फुश्च ने एक-एक गोल किया। जैसे ही फाइनल में आखिरी सीटी बजी तो साउंड सिस्टम पर माहौल के मिजाज के मुताबिक यह गीत गूंज उठा 'अभी तो पार्टी शुरू हुई है।'
जर्मनी पूरे तीन क्वार्टर में हावी रही। पाकिस्तान की टीम जर्मनी के खिलाफ एकदम बेदम नजर आई। पहले और दूसरे क्वार्टर में तो पाकिस्तान की टीम जर्मनी के गोल पर एक भी हमला नहीं बोल पाई। जोनास गोमोल ने दूसरे क्वार्टर के शुरू में बाएं से गेंद संभाल कर डी के ठीक ऊपर क्रिस्टोफर वेसले की ओर गेंद बढ़ाई। इस पर वेसले ने तेज शॉट जमा गोल कर जर्मनी को 1-0 से आगे कर दिया। खेल खत्म होने से तीन मिनट पहले फुश्च ने पाकिस्तान के कप्तान मोहम्मद इरफान और मोहम्मद इमरान को चकमा दे जोरदार वॉली जमा गोल कर जर्मनी की जीत निश्चित कर दी।
कांस्य से भी चूक गया भारत
पिछले लगातार पांच बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यहां चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी में 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीत लिया। स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह का चौथे और आखिरी क्वार्टर में दो आसान मौके गंवाना भारत को भारी पड़ा और उसे पिछली बार की ही तरह इस बार भी चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम ने 1982 में सुरिंदर सिंह की अगुवाई में टूर्नामेंट में कांस्य जीता था।
यहां के कलिंग स्टेडियम में भारत दुनिया की नंबर एक टीम के खिलाफ अच्छा खेला लेकिन उसके खिलाड़ियों पर कहीं न कहीं पाकिस्तान के हाथों सेमीफाइनल में हार का असर जरूर दिखा। ऑस्ट्रेलिया के लिए जैमी ओकेनडन और औरामैट गोडस ने 1-1 गोल किया। भारत के लिए एकमात्र गोल युवा स्ट्राइकर ललित उपाध्याय ने पेनल्टी कॉर्नर पर लौटती गेंद पर दागा। मैच में ऑस्ट्रेलिया ने गेंद को ज्यादा अपने कब्जे में रखने की रणनीति अपनाई। भारत के गोलकीपर श्रीजेश ने ओकेडरन और जैकब व्हिटन के हमले को शुरू में नाकाम किया लेकिन दूसरे क्वार्टर में वह ओकेनडन को नहीं रोक सके और इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने खाता खोला।
भारत को हाफ टाइम से ठीक पहले बराबरी पाने का मौका मिला लेकिन मनप्रीत डी के सामने गेंद को गोल में डालने से चूक गए। तीसरे क्वार्टर में गुरबाज के पास पर सुनील जैसे ही गेंद को लेकर डी में पहुंचे वहां उन्हें गलत ढंग से रोकने पर भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला। पेनल्टी पर रमणदीप के शॉट गोलकीपर टेलर लॉवेल के पैड से लगकर लौट रही थी तभी वहीं मंडराते ललित उपाध्याय ने गोल कर भारत को एक-एक की बराबरी दिला दी। चौथे क्वार्टर में बाएं से फर्गुसन ने डी में पहुंच तेज शॉट जमाया और गोलकीपर श्रीजेश के पैड को लग कर लौटती गेंद को मैट गोडस ने संभाल कर गोल में डालकर ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से आगे कर दिया। इसके बाद आकाशदीप और निकिन थिमैया ने मौके गंवाए और भारत मैच हार गया।