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दुखद: मॉस्को ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी कौशिक और रविंदर का निधन

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 08 May 2021 09:10 PM IST

सार

मॉस्को ओलंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के दो पूर्व खिलाड़ियों रविंदर पाल सिंह और एमके कौशिक का कोविड-19 से जूझने के बाद शनिवार को निधन हो गया। रविंदर पाल सिंह जहां कोरोना से ठीक हो चुके थे वहीं, कौशिक कोरोना से संक्रमित थे। इस दुखद समाचार के बाद खेल जगत में शोक की लहर है।
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एमके कौशिक
एमके कौशिक - फोटो : एएनआई (फाइल)

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विस्तार

पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी और कोच एमके कौशिक का शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के चलते निधन हो गया। इस समाचार के बाद खेल जगत में शोक की लहर है। कौशिक भारतीय राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम के कोच भी रहे थे। वह मॉस्को में हुए 1980 के ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। साल 1988 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।  
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जानकारी के अनुसार 66 वर्षीय कौशिक पिछले तीन सप्ताह से कोरोना संक्रमण से जूझ रहे थे। मास्को ओलंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य कौशिक को 17 अप्रैल को कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया था। उन्हें इलाज के लिए यहां एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे ने कहा, ‘उन्हें आज सुबह वेंटीलेटर पर रखा गया लेकिन अभी उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।’


उल्लेखनीय है कि कौशिक ने भारत की सीनियर पुरुष और महिला टीमों को कोचिंग दी थी। उनके कोच रहते हुए भारतीय पुरुष टीम ने बैंकॉक एशियाई खेल 1998 में स्वर्ण पदक जीता था। उनके कोच रहते हुए भारतीय महिला टीम ने दोहा एशियाई खेल 2006 में कांस्य पदक हासिल किया था। उन्हें साल 1998 में अर्जुन पुरस्कार और साल 2002 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

रविंदर पाल सिंह का लखनऊ में निधन
रविंदर पाल सिंह का निधन लखनऊ के विवेकानंद अस्पताल में हुआ था। सिंह को 24 अप्रैल को विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वह कोरोना संक्रमण से उबर चुके थे और नेगेटिव आने के बाद कोरोना वॉर्ड से बाहर थे। शुक्रवार को उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

लॉस एंजिलिस ओलंपिक 1984 खेल चुके सिंह ने विवाह नहीं किया था। उनकी एक भतीजी प्रज्ञा यादव है। वह 1979 जूनियर विश्व कप भी खेले थे और हॉकी छोड़ने के बाद स्टेट बैंक से स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी । सीतापुर में जन्मे सेंटर हाफ के खिलाड़ी सिंह ने 1979 से 1984 के बीच शानदार प्रदर्शन किया था। दो ओलंपिक के अलावा वह 1980 और 1983 में चैम्पियंस ट्रॉफी , 1982 विश्व कप और 1982 एशिया कप भी खेले थे।

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