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फ्लैश बैक: ध्यानचंद की मजबूत कलाइयों और ड्रिब्लिंग की दुनिया थी कायल
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:36 PM IST
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ध्यानचंद
- फोटो : sportskeeda
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के पास कभी तेजी नहीं थी। वो अक्सर धीमा दौड़ते थे। लेकिन उनके पास गोल के लिए गैप पहचानने की विशेष समझ थी। डी में एक बार घुसने के बाद वह इतनी तेजी से पावर फुल शॉट लगाते थे कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों के लिए भी कोई मौका नहीं रहता था।
पढ़ेंः- ध्यानचंद एक नजर में: हॉकी के जादूगर के बारे में जानें 5 मुख्य बातें
ध्यानचंद की इन खूबियों का खुलासा पाकिस्तान के पूर्व कप्तान आईएनएस दारा ने वर्ल्ड हॉकी मैगजीन में किया था। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में दारा ध्यानचंद के साथ खेले थे। बाद में वह पाकिस्तान के कप्तान भी बने। दारा ने कहा था कि बाएं तरफ ध्यानचंद के भाई रूप सिंह और दाएं तरफ ध्यानचंद की बाल पासिंग का उनको काफी फायदा हुआ।
पढ़ेंः- जानिए, सचिन तेंदुलकर कैसे हो गए भारत रत्न के लिए ध्यानचंद से आगे
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कहा जाता है कि ध्यानचंद की मजबूत कलाईयों और ड्रिब्लिंग का विपक्षी खिलाड़ियों के पास कोई जवाब नहीं रहता था। वह दिमाग से हॉकी खेलते थे। उनकी नजर हॉकी के मैदान में वैसी रहती थी जैसे कोई शतरंज खिलाड़ी की नजर शतरंज बोर्ड पर रहती है। उनको बिना देखे एहसास हो जाता था कि मैदान के किस हिस्से में उनके सहयोगी खिलाड़ी और विपक्षी खिलाड़ी मूव कर रहे हैं।
ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
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ध्यानचंद की इन खूबियों का खुलासा पाकिस्तान के पूर्व कप्तान आईएनएस दारा ने वर्ल्ड हॉकी मैगजीन में किया था। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में दारा ध्यानचंद के साथ खेले थे। बाद में वह पाकिस्तान के कप्तान भी बने। दारा ने कहा था कि बाएं तरफ ध्यानचंद के भाई रूप सिंह और दाएं तरफ ध्यानचंद की बाल पासिंग का उनको काफी फायदा हुआ।
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कहा जाता है कि ध्यानचंद की मजबूत कलाईयों और ड्रिब्लिंग का विपक्षी खिलाड़ियों के पास कोई जवाब नहीं रहता था। वह दिमाग से हॉकी खेलते थे। उनकी नजर हॉकी के मैदान में वैसी रहती थी जैसे कोई शतरंज खिलाड़ी की नजर शतरंज बोर्ड पर रहती है। उनको बिना देखे एहसास हो जाता था कि मैदान के किस हिस्से में उनके सहयोगी खिलाड़ी और विपक्षी खिलाड़ी मूव कर रहे हैं।
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