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अर्जुन अवॉर्ड मिलना गौरव की बात, टीम से मिले सहयोग का अहम योगदान : मनप्रीत सिंह
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला
Updated Tue, 25 Sep 2018 07:54 PM IST
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मनप्रीत सिंह
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मनप्रीत सिंह भारत के बेहतरीन हॉकी सेंटर हाफ हैं । वह ओलंपिक, विश्व कप, एशियाई खेल, एशिया कप और चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की नुमाइंदगी करने के साथ कप्तानी भी कर चुके हैं। 26 वर्षीय मनप्रीत सिंह भारत के पूर्व कप्तान और ओलंपियन जालंधर छावनी से सटे उस मीठा पुर गांव से हैं जो धीरे -धी उसी तरह हॉकी ओलंपियनों का गांव और नर्सरी बनता जा रहा है जो कभी उससे ही जुड़ा संसारपुर हुआ करता था।
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मनप्रीत सिंह ने मंगलवार अर्जुन अवॉर्ड से नवाजे जाने पर मंगलवार को कहा, ' हॉकी टीम गेम है और इसमें कामयाबी के लिए टीम प्रयास की जरूरत है। अर्जुन अवॉर्ड मिलना बड़े गौरव की बात है। मेरे इस अर्जुन अवॉर्ड में पूरी भारतीय हॉकी टीम और स्पोर्ट स्टाफ के सहयोग का पूरा योगदान है। इसमें अपने परिवार से मिले सहयोग का योगदान है क्योंकि एक खिलाड़ी को देश के लिए अलग-अलग टूर्नामेंट के लिए घर से बराबर बाहर हॉकी शिविर में रह कर तैयारी करनी पड़ती है।'
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वह कहते हैं, 'मैं खुशकिस्मत हूं परगट (सिंह) पाजी हमारे मीठापुर के हैं। उनक हॉकी के किस्से सुनकर पिंड में मैंने भी हॉकी खेलने शुरू की। मेरे लिए यह फख्र की बात है मैं भी परगट पाजी की तरह भारत के लिए ओलंपिक खेलने वाला अपने पिंड (गांव) का दूसरा हॉकी खिलाड़ी हूं। अपने गांव से मै, परगट पाजी, तलविंदर सिंह, मनदीप सिंह, वरुण कुमार, प्रभदीप सिंह और अमरीक सिंह भारत की अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में नुमाइंदगी कर चुके हैं। मैंने जब भारत की सीनियर टीम के लिए खेलना शुरू किया तो माइकल नॉब्स हमारे पहले चीफ हॉकी कोच थे।'
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'2014 में इंचियोन एशियाई खेलों में पाकिस्तान को फाइनल में शूटआउट में हराकर भारत को स्वर्ण पदक जिताना मेरे लिए अपने हॉकी करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रहेगी। साथ ही 2016 और 2018 चैंपियंस ट्रॉफी के साथ 2014 के राष्ट्रमंडल हॉकी खेलों में रजत पदक जिताने वाली टीम का हिस्सा बनना भी याद रहेगा। 2015 में हॉकी वल्र्ड लीग फाइनल्स में रायपुर में भारत को नीदरलैंड के खिलाफ शूटआउट में जीत दिला कांसा दिलाना भी हमेशा याद रहेगा। इसमें विजयदाई गोल भी मैंने किया था। पिछले साल भारत की एशिया कप में खिताबी जीत भी सुखद स्मृतियों में रहेगी।'
मनप्रीत कहते हैं, 'सरदार (सिंह) पाजी का अंतर्राष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने का फैसला उनका निजी फैसला है। उनके अनुभव की कमी जरूर हमारी टीम को अखेरेगी। हमारे लिए अगले महीने होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हमारे लिए खुद की भुवनेश्वर में होने वाले पुरुष हॉकी विश्व कप के लिए तैयारी को आंकने का सबसे अच्छा मौका होगा। विश्व कप भल ही हम अपने घर में खेल रहे हैं लेकिन मुकाबला इसमें बेहद कड़ा रहना होगा।'
'विश्व कप में हर टीम पूरी तैयारी के साथ आती है और इसमें अच्छे नतीजे के लिए हमें पूरी तरह फोकस रहना होगा। मैं सेंटर हाफ के रूप में खेलता हूं और अपनी जिम्मेदारी से वाकिफ हूं। मैं विश्व कप में पूरी तरह फोकस होकर खेलूंगा। मेरे लिए खुशी की बात है कि पंजाब की हॉकी फिर से सही ट्रैक पर लौट आई है। केंद्र सरकार की खेलों इंडिया की स्कीम से भी हॉकी देश भर में बेहतर हो रही है।'