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...जब 1966 की विश्व विजेता इंग्लैंड टीम के गोलकीपर को मजबूरी में बेचनी पड़ी थी टी-शर्ट
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 11 Jul 2018 06:23 AM IST
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गॉर्डन बैंक्स
इंग्लैंड ने 1966 में विश्व कप खिताब जीता था। तब टीम के नायकों में से एक गोलकीपर गॉर्डन बैंक्स का कहना है कि उन्होंने और उनके साथियों ने कभी ऐसा महसूस नहीं किया कि फाइनल में पश्चिमी जर्मनी के खिलाफ 4-2 की जीत के बाद उन्हें उतनी पहचान मिली जितनी मिलनी चाहिए थी।
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बकौल बैंक्स मजबूरी में खिलाड़ियों को अपनी यादगार चीजें बेचने तक की नौबत तक आ गई थी। खुद उन्होंने 10-15 साल पहले अपनी टी-शर्ट बेच दी थी। हालांकि मेडल अभी तक उनके पास बचे हुए हैं। एफ की जगह खिलाड़ियों खासतौर पर हैट्रिक लगाने वाले ज्योफ हर्स्ट ने कार्यक्रम आयोजित किए ताकि एक-दूसरे से मिलना-जुलना हो सके लेकिन बाद में ये मुलाकातें भी बंद हो गईं क्योंकि कुछ का निधन हो गया, कुछ खराब स्वास्थ्य के कारण घर से नहीं निकल पाए।
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80 साल के हो चुके पूर्व गोलकीपर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगर कोच गैरेथ साउथगेट की टीम इस बार विश्व कप जीतने में सफल रहती है तो फुटबॉल एसोसिएशन (एफए) खिलाड़ियों का पहले से बेहतर ख्याल रखेगा। इंग्लैंड की टीम खिताब से दो जीत दूर है। उनके पास अपने फुटबॉल इतिहास में दूसरी बार ट्रॉफी जीतने का मौका है। जब टीम रूस में चल रहे इस विश्व कप में आई थी तब हैरी केन एंड कंपनी से ज्यादा उम्मीदें नहीं की जा रही थीं लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया है।
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इंग्लैंड के पूर्व गोलकीपर गॉर्डन बैंक्स ने कहा, 'एफए ने हमारे लिए कुछ नहीं किया। मैं एफए को लेकर बेहद निराश हूं। यदि इस बार टीम विश्व कप जीतती है तो उन्हें ज्यादा प्रोत्साहन मिलना चाहिए। वे इसके हकदार हैं।'
पेले का हेडर रोका था
बैंक्स अपने जमाने के बेहतरीन गोलकीपर थे। 1970 के विश्व कप में उन्होंने पेले का दमदार हेडर रोका था। ब्राजील की टीम बाद में चैंपियन बनी थी। बैंक्स ने इंग्लैंड की ओर से 74 मैच खेले थे लेकिन उनके शानदार कॅरिअर पर अक्तूबर 1972 में उस समय विराम लग गया था जब एक कार दुर्घटना में उनकी दायीं आंख की रोशनी चली गई।