इस बार जर्मनी पर पड़ी अभिशाप की मार, जो गत विजेता को नहीं बनने देता दोबारा फीफा विश्व कप विजेता
फीफा विश्वकप 2018 में बुधवार को खेले गए ग्रुप स्टेज मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने जर्मनी को 2-0 से हरा दिया। इस टूर्नामेंट में जर्मनी को तीन मैचों में से सिर्फ एक में ही जीत मिली। यह मैच स्वीडन के खिलाफ खेला गया था और उसमें भी जर्मनी 95वें मिनट में किए गए गोल की बदौलत जीता था।
दक्षिण कोरिया से मिली हार के साथ जर्मनी ने अपने ग्रुप में सबसे आखिरी पायदान पर पहुंचकर वर्ल्ड कप का सफर खत्म किया है। इसका मतलब है कि विश्व कप के 'अभिशाप' ने एक बार फिर असर दिखाया है।
ऐसा अभिशाप, जो डिफेडिंग चैंपियन को दोबारा वर्ल्ड कप नहीं जीतने देता। खासकर 21वीं सदी का अभिशाप, जिसके चलते पिछली बार की विजेता टीम शुरुआती दौर में ही वर्ल्ड कप से बाहर हो जाती है।
क्या है इतिहास?
2002 से पहले तक सिर्फ दो बार ऐसा हुआ था कि पिछली बार की विजेता रही टीमों को अगले विश्व कप के शुरुआती दौर में बाहर होना पड़ा हो। 1950 में इटली को उस समय बाहर होना पड़ा था, जब भारत अचानक टूर्नामेंट से हट गया था।
इसके बाद 1966 में ब्राजील को बाहर होना पड़ा था, जबकि वह दो बार लगातार चैंपियन रहा था। अपने ग्रुप में वह पुर्तगाल और हंगरी से पीछे रह गया था। इसके बाद 21वीं सदी की बात करें तो 2002 में दक्षिण कोरिया और जापान में हुए वर्ल्ड कप के ओपनिंग मैच में सेनेगल ने पिछली बार के विजेता फ्रांस को हराकर सबको चौंका दिया था।
1998 France win WC 🇫🇷
— Dan Walker (@mrdanwalker) June 27, 2018
2002 Out in the group stage
2006 Italy win the WC 🇮🇹
2010 Out in the group stage
2010 Spain win WC 🇪🇸
2014 Out in the group stage
2014 Germany win the WC 🇩🇪
2018 Auf Wiedersehen
Bottom of the group!#WorldCup #KORGER#Vardenfreude
चार साल पहले फाइनल में ब्राजील को 3-0 से हराने वाला फ्रांस सेनेगल से मिली इस हार के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गया था। उसके ग्रुप में उरुग्वे और डेनमार्क भी थे। 2010 में इतिहास ने खुद को दोहराया और उसकी मार पड़ी इटली पर।
2006 के फाइनल में उसने फ्रांस को हराकर वर्ल्ड कप उठाया था मगर 2010 विश्व कप में अपने ग्रुप में पहले उसे पराग्वे से हार मिली, फिर न्यूज़ीलैंड से और आख़िर में स्लोवाकिया से।
इसके चार साल बाद स्पेन की बारी आई। पिछले आठ सालों से उसका दबदबा बना हुआ था और इस दौरान वह दो बार यूरो ट्रॉफी भी उठा चुका था। मगर 2014 के वर्ल्ड कप में उसे शुरू में ही धूल फांकनी पड़ी। पहले नीदरलैंड ने उसे 5-1 से हराया और फिर चिली ने 2-0 से हराकर उसे वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया।
और अब, एक बार फिर ऐसा हुआ है। स्वीडन, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया वाले ग्रुप में शामिल पिछली बार के चैंपियन जर्मनी को पहले ही मैच में मेक्सिको से 1-0 से हार मिली।
अगले मैच में स्वीडन के खिलाफ उसने आखिरी पलों में जीत हासिल की तो लगा कि शायद यह टीम लय में लौट रही है। मगर दक्षिण कोरिया के साथ मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा।
ऐसा तब हुआ, जब दक्षिण कोरिया पिछले 8 वर्ल्ड कप मैचों में जीत का मुंह नहीं देख सका था और इस बार उनके कोच ने ही अपनी टीम के जीतने की सिर्फ एक प्रतिशत संभावना बताई थी। यानी चैंपियंस का अभिशाप बताता है कि वर्ल्ड कप को बचाए रखना कितना मुश्किल है। अब तक सिर्फ़ इटली (1934-1938) और ब्राजील (1958-1962) ऐसा कर पाए हैं।