सुनील छेत्री युवा फुटबॉलरों के लिए सबसे बड़े आदर्श और बेहतरीन 'लीडर'
सुनील छेत्री ने बतौर कप्तान और स्ट्राइकर बाईचुंग भूटिया की विरासत को बहुत शानदार ढंग से आगे बढ़ाकर खुद को उनका सबसे काबिल वारिस साबित किया है। 34 बरस की उम्र में छेत्री ने केन्या के खिलाफ मुंबई में सोमवार को इंटरनकॉन्टिनेंटल कप फुटबॉल टूर्नामेंट के मैच में खेलने उतर कर भारत के लिए इंटरनैशनल मैच खेलने की 'सेंचुरी' पूरी कर ली।
भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने के साथ सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड भी सुनील छेत्री के नाम दर्ज है। छेत्री 2013 में नेपाल के खिलाफ गोल कर भूटिया के भारत के लिए सबसे ज्यादा 42 गोल करने के रिकॉर्ड को पांच बरस पहले ही तोड़ चुके हैं। भूटिया और सुनील छेत्री के साथ भारतीय टीम और देश में क्लब फुटबॉल में दोनों के साथ और खिताब खेलने वाले पूर्व अंतर्राष्ट्रीय लेफ्ट मिडफील्डर 38 बरस रैनेडी सिंह से छेत्री के सफर की बाबत 'अमर उजाला' ने सोमवार को खास बातचीत की।
रैनेडी सिंह कहते हैं, 'मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं बाईचुंग भूटिया और सुनील छेत्री दोनों के साथ भारत के लिए और देश में अलग-अलग क्लबों के लिए साथ और खिलाफ खेला। दोनों ही बेशक अपने-अपने दौर के बेहतरीन स्ट्राइकर हैं। सुनील छेत्री दोनों छोर से गेंद को लेकर आगे बढ़कर गोल करना पसंद करते हैं जबकि भूटिया का बॉक्स के भीतर गोल करने में कोई जवाब नहीं था। भूटिया अपने समय के बेहतरीन फिनिशर थे। सुनील छेत्री मेरी कप्तानी में जेसीटी और मोहन बागान में खेले ही भारतीय टीम में मेरे साथ खेले हैं। सुनील छेत्री मौजूदा दौर के 34 बरस की उम्र में भारत के बेहतरीन और फिट स्ट्राइकर हैं। भारत के लिए 13 बरस से खेल रहे छेत्री देश के सभी युवा फुटबॉलरों के लिए सबसे बड़े आदर्श और बेहतरीन 'लीडर' भी हैं।'
सिंह ने आगे कहा, 'सुनील छेत्री अब आगे भारत के लिए कितने बरस और खेलेंगे और खेलना चाहेंगे इसका फैसला सिर्फ और सिर्फ वह ही करेंगे। सुनील इस उम्र में भी जिस तरह से सबसे फिट हैं। वह भारत के यंग फुटबॉलरों के लिए सबसे बड़ी नजीर है। छेत्री का गेंद पर नियंत्रण और गोल करने की गजब की काबलियत ने उन्हें देश का बेहतरीन स्ट्राइकर बनाया है। गेंद को लेकर अकेले प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल को बिखरना भारतीय टीम में सबसे बेहतर ढंग से जानते हैं। 34 बरस की उम्र में भारत के लिए 100 मैच खेलना और करीब-करीब हर दूसरे मैच में गोल करना सुनील छेत्री की बतौर फुटबॉलर कामयाबी की दास्तां खुद बयां करता है। विगत में आईएम विजयन और बाईचुंग भूटिया का जिस तरह बतौर स्ट्राइकर कोई सानी नहीं था उसी तरह आज सुनील छेत्री का भारतीय टीम में कोई सानी नहीं है।'
अपने समय में बेहतरीन फ्री किक लगाने में माहिर रहे रैनेडी सिंह बताते हैं, 'स्ट्राइकर सुनील छेत्री का भारत के लिए गोल करने में यंग स्ट्राइकर जेजे ललपेखलुआ बेहतरीन ढंग से साथ निभा रहे हैं। चीनी ताइपे के खिलाफ इंटरनकॉन्टिनेंटल कप जेजे के बेहतरीन पास का गजब का योगदान रहा है। सुनील छेत्री चाहे भारत के लिए खेल रहे हों या आईएसएल जैसी किसी भी लीग के लिए वह गोल करने के मौके को भुनाने के साथ गोल के मौके बनाने में कोई जवाब नहीं है।'
बकौल सिंह, 'सुनील छेत्री भारत के लिए एएफसी एशियन कप में सबसे अहम स्ट्राइकर तो होंगे बतौर कप्तान भी उनका किरदार सबसे अहम रहने वाला है। मैं यह चाहता हूं कि एएफसी एशियन कप की तैयारी के लिए भारतीय टीम अपने से कुछ उंची रैंकिंग वाली बहरीन और थाईलैंड जैसी टीमों के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा मैच खेल कर खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर सकती है। हमें नेपाल और बांग्लादेश की टीमों के खिलाफ कुछ हासिल नहीं होने वाला है ही न ही अपने फीफा रैंकिंग में बहुत उंची जापान सरीखी टीम के खिलाफ।'
सुनील छेत्री की पर्सनल लाइफ और अचीवमेंट्स
सुनील छेत्री
जन्म: 3 अगस्त, 1984
भारत की सीनियर टीम के लिए आगाज : 2005, पाकिस्तान के खिलाफ क्वेटा (पाकिस्तान))
भारत को जिताए खिताब : नेहरू कप : 2007, 2009, 2012
सैफ चैंपियनशिप :2011
एएफसी चैंलेंज कप : 2008
वैयक्तिक सम्मान :
अर्जुन अवॉर्ड : 2011
एआईएफएफ प्लेयर ऑफ द ईयर : 2007,2011 2013,2014
तोड़े भूटिया के रिकॉर्ड
-2013 में भूटिया के भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में सबसे ज्यादा 42 गोल करने का रिकॉर्ड नेपाल के खिलाफ गोल कर तोड़ा
- छेत्री ने 2017 में एनएफएल और आई लीग को कुल मिलाकर 93 गोल कर भूटिया (89 गोल) के रिकॉर्ड को तोड़ा