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फुटबॉल के जरिये बदलाव ला रहीं ईरानी लड़कियां, दुनिया कर रही सलाम

Tue, 26 Jun 2018 10:20 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Tue, 26 Jun 2018 10:20 PM IST
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Iranian women changing history through fifa football world cup 2018

दो दिन पहले ही सऊदी अरब ने महिलाओं को कार चलाने की इजाजत दी है। वहां लगातार सुधार और बदलाव हो रहा है, जबकि ईरान में महिलाओं पर ज्यादती और बंदिशें बढ़ती जा रही हैं। ईरान सरकार ने आदेश दिया है कि विश्व कप फुटबॉल के मैच होटल-रेस्त्रां या ऐसी ही किसी सार्वजनिक जगह पर मर्द और औरत साथ-साथ मैच नहीं देखें। 

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मर्दों को यह छूट है कि वे कहीं भी मैच देख सकते हैं, लेकिन महिलाओं, खासतौर पर युवा लड़कियों से कहा गया है कि घर पर ही मैच देखें। पति और पिता से यह उम्मीद की गई है कि वे घर की महिलाओं को खुद बाहर मैच दिखाने नहीं ले जाएंगे और न ही उन्हें अकेली जाने देंगे।
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दरअसल, हुआ यह है कि ईरान के मैच में कुछ लड़कियां अपनी आजादी के पोस्टर लिए स्टेडियम पहुंच गईं और मैच के दौरान नारेबाजी करते हुए पोस्टर भी हवा में लहराए। ईरानी सरकार ने फौरन अपने यहां के टीवी को निर्देश दिया कि ऐसी हरकतों के दृश्य काट कर ही ईरान मैच और खबरें दिखाई जाएं। 
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सरकार का कहना है कि पहली बात तो यही है कि महिलाओं को फुटबॉल का मैच देखने स्टेडियम जाना ही नहीं चाहिए, क्योंकि मर्द फुटबॉल खेलते समय हॉफ पेंट पहनते हैं। ईरान के सरकारी अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि स्टेडियम में नारेबाजी और परचे लहराने वाली लड़कियां कौन थीं। बताया जा रहा है कि ऐसी हरकत करने वाली लड़कियों को सजा दी जाएगी।

‘जब दुनिया अपने खिड़की-दरवाजे खोल रही है तो ईरान की सरकार और सख्ती से पेश आ रही है, खासतौर पर महिलाओं को तो घर और परदे में कैद करने की कोशिशें हो रही हैं। हम अपने देश से प्यार करते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम पर ही सारी पाबंदियां थोप दी जाएं। सऊदी अरब में बदलाव आ रहा है और हमारे यहां के लोग समझने को ही तैयार नहीं हैं। 

लड़की होना वहां अभिशाप है। हमें जब भी मौका मिलेगा, अपनी आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे। हमें मैच में अलग बैठाया जाता है और बगैर हिजाब के बाहर नहीं निकल सकते। यह सरासर नाइंसाफी है और इसके खिलाफ आवाज बुलंद होनी चाहिए।’ कहना था ईरान की एलिया का, जो मास्को के क्रेमलिन इलाके में घूमती नजर आ गई थीं।


ईरान के सभी मैच देखे हैं और हर जगह आवाज बुलंद की है, टीम की हौसला अफजाई की है। कहती हैं- ‘मैं जानती हूं, हमारे चेहरे पहचान लिए जाएंगे और हमारे परिवारवालों को सताया जाएगा। यहां मास्को में देख रही हूं कि महिलाओं को कितनी छूट, आजादी तो है ही, सम्मान भी है। हमारे देश में उन्हें दोयम दर्जे का समझा जाता है। ईरान के मैच में जिस तरह से लड़कियों ने आवाज उठाई है, यह बदलाव का संकेत है। हम देखना चाहते हैं कि कितनी महिलाओं को सजा दी जाती है। अच्छी बात यह है कि दुनियाभर से ईरानी लड़कियां यहां मैच देखने आई हैं और वे ही आवाज बुलंद कर रही हैं। उनके खिलाफ कर लो... जो करना है। वक्त का तकाजा है कि महिलाओं को लेकर ईरान में नजरिया बदले, उन्हें भी बराबर का हक मिले।’

दुबली-पतली एलिया जब यह कह रही थी तो उसके चेहरे पर नाराजी साफ नजर आ रही थी और यही गुस्सा उन्हें आजादी दिलाएगा...आमीन!

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