फीफा विश्वकप का बिगुल बजने ही वाला है। 14 जून से शुरू होने वाले इस फुटबॉल महाकुंभ में सभी 32 टीमें जीत के लिए जी-जान लगा देंगी। मगर सबसे बड़ी बात ये कि रूस में होने वाले 2018 विश्वकप में 5 बड़ी टीमें आपको नजर नहीं आएंगी। ये वो टीमें हैं जो हमेशा विश्वकप की टॉप टीमें रही हैं। रूस 2018 के लिए कुछ ऐसी टीमों ने क्वालीफाई किया जिनसे कोई उम्मीद नहीं थी तो वहीं कुछ ऐसी टीमें आगे नहीं बढ़ पाईं जिन्हें वर्ल्डकप में खेलता देखने की आदत सी है।
नीदरलैंड
ये यूरोपियन देश विश्वकप जीतने के दावेदारों में से एक टीम थी। 1934 में अपना विश्वकप मैच खेलने के बाद से नीदरलैंड ने विश्वकप में शानदार प्रदर्शन किया है। नीदरलैंड ने 10 विश्वकप में हिस्सा लिया है जिनमें से तीन बार वह उपविजेता बने तो एक बार तीसरा स्थान पाया। मगर इस बार विश्व फुटबॉल की ये महान टीम आपको वर्ल्ड कप 2018 में नजर नहीं आएगी। नीदरलैंड की टीम पिछले यूरो कप के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थी। अब 2010 के रनर अप और 2014 में तीसरे स्थान पर रहने वाली ये टीम इस बार खेल ही नहीं पाएगी।
घाना फुटबॉल टीम
2006 वर्ल्ड कप में अपनी पहली शिरकत के बाद से घाना ने अगले दोनों वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया। इस टीम ने अपना बेस्ट 2010 में दिया जब वो क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे। उस मैच में भी वो उरुग्वे के हाथों 4-2 से पेनल्टी के जरिए बाहर हुए। उसके बाद 2014 में ये टीम वैसा कमाल नहीं कर पाई और 2018 के लिए तो क्वालीफाई भी नहीं कर पाए हैं।
अमेरिका
द यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका की टीम फुटबॉल वर्ल्डकप की कोई बहुत खतरनाक टीम तो नहीं है लेकिन इस टीम को फुटबॉल के महाकुंभ में देखने की आदत सी लग गई थी। यूएसए ने 1994 में विश्वकप की मेजबानी की थी जिसमें वो राउंड ऑफ 16 तक पहुंचे और ब्राजील से हारकर बाहर हुए। 1990 के बाद इस टीम ने लगातार 5 विश्वकप में क्वालीफाई किया और कई बार प्री-क्वार्टर फाइनल तक भी पहुंची।
चिली फुटबॉल टीम
2015 और 2016 में ब्राजील, अर्जेंटीना और मैक्सिको जैसी टीमों को हराकर साउथ अमेरिकन चैंपियन बनने वाली चिली की टीम 2018 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पाएगी, ये किसी ने सोचा नहीं था। इस साउथ अमेरिकन देश का फीफा वर्ल्ड कप में बहुत अच्छा इतिहास रहा है। चिली ने 1930 में अपना डेब्यू किया था। 1934 और 1938 में इस देश ने अपने आप को वर्ल्ड कप से अलग किया और फिर 1950 में शानदार वापसी की। टीम का सबसे अच्छा रिजल्ट 1962 में आया जब वो वर्ल्ड कप में तीसरे स्थान पर रहे।