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अलविदा: 52 साल पहले एशियाई खेलों में पदक दिलाने वाले भौमिक दा नहीं रहे, दिग्गज मिडफील्डर का 72 साल की उम्र में निधन

Sun, 23 Jan 2022 01:59 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Rajeev Rai Updated Sun, 23 Jan 2022 01:59 AM IST
सार

24 : मैच खेले भारतीय टीम के लिए जिसमें नौ गोल किए 
165 : गोल किए क्लब स्तर पर ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के लिए

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Former India footballer and star midfielder coach Subhas Bhowmick passes away
सुभाष भौमिक - फोटो : social media

विस्तार

भारत के पूर्व दिग्गज फुटबॉलर और मशहूर कोच सुभाष भौमिक का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को शहर के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। पूर्व भारतीय मिडफील्डर भौमिक 1970 में एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे।

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उनके पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि वह लंबे समय से गुर्दे के रोग और मधुमेह से पीड़ित थे और उन्होंने सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, पुत्र और पुत्री है। उन्होंने कहा, ‘वह पिछले लगभग साढ़े तीन महीने से नियमित रूप से डायलिसिस से गुजर रहे थे। करीब 23 साल पहले उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी। हाल में उन्हें छाती में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।’

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कोच के रूप में भी चमके :  
भौमिक दा के रूप में मशहूर इस फुटबॉलर ने खेल से संन्यास लेने के बाद कोचिंग में अपना कॅरिअर आगे बढ़ाया। वह पहले मोहन बागान के साथ कोच के रूप में जुड़े और फिर ईस्ट बंगाल के सबसे सफल कोच बने। उनकी कोचिंग में ईस्ट बंगाल ने 2003 में आसियान कप का खिताब जीता था। भौमिक के  मार्गदर्शन में ईस्ट बंगाल ने राष्ट्रीय लीग के खिताब जीते। इसके बाद वह जब तकनीकी निदेशक के रूप में चर्चिल ब्रदर्स से जुड़े तो उन्होंने यही सफलता इस टीम के साथ भी दोहराई। उन्हें कोलकाता मैदान का ‘जोस मारिन्हो’ कहा जाता था। वह 1990 में ढाका में खेले गए गोल्ड कप टूर्नामेंट में भारतीय टीम के कोच भी रहे थे। भौमिक ने 19 साल की उम्र में राजस्थान क्लब से अपने कॅरिअर की शुरुआत की। इस राइट विंगर ने ‘ड्रिबलिंग’ में अपने कौशल के कारण एक दशक तक राष्ट्रीय फुटबॉल में अपना दबदबा बनाए रखा। ईस्ट बंगाल में एक सत्र बिताने के बाद भौमिक मोहन बागान से जुड़ गए थे जहां उन्होंने तीन साल बिताए। इसके बाद वह फिर से ईस्ट बंगाल से जुड़ गए थे। 

फिलिपींस के खिलाफ की थी हैट्रिक :  
वह एशियाई खेल 1970 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य थे। उन्होंने एशियाई खेल 1974 में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था। भौमिक ने भारत की तरफ से 24 मैच खेले जिनमें नौ गोल किए। इनमें 1971 के मर्डेका कप में फिलीपींस के खिलाफ बनाई गई हैट्रिक भी शामिल है। भौमिक को हालांकि क्लब स्तर पर उनके शानदार प्रदर्शन ने अधिक प्रसिद्धि दिलाई। उन्होंने ईस्ट बंगाल (83 गोल) और मोहन बागान (82) की तरफ से कुल 165 गोल किए। 

पेले की टीम के खिलाफ खेले 
उन्होंने 1975 में आईएफए शील्ड के फाइनल में ईस्ट बंगाल की मोहन बागान पर 5-0 से जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1977 में मोहन बागान की तरफ से पेले की न्यूयॉर्क वोसमोस के खिलाफ भी मैच खेला था। उनका कॅरिअर विवादों से भी घिरा रहा क्योंकि 2005 में रिश्वत के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था।

कोच को कर दिया था रूम में बंद 
वह पीके बनर्जी को अपना गुरु मानते थे। 1977 में उन्होंने मोहन बागान को अपने दम पर डूरंड कप में खिताब दिलाया। एक बार जब पीके ने उन्हें बेंच में बिठा दिया तो उन्होंने अपनी नाराजगी भी दिखाई। बाद में उन्होंने विजयी गोल किया और कहा कि प्रदीप दा का यह अंदाज है वह आपको बेहतर करने के लिए ऐसे ही प्रेरित करते हैं। एक बार उन्होंने संतोष ट्रॉफी के दौरान बंगाल के कोच को होटल के रूम में यह कहकर बंद कर दिया कि बड़े मैच से पहले वह नर्वस हो जाते हैं। उन्होंने 1979 में 29 साल की उम्र में बूट टांग दिए थे।

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