FIFA WC 2018: हेडबट से लेकर खिलाड़ी को काटने तक फीफा विश्व कप के सबसे भयानक विवाद
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पूरी दुनिया फीफा विश्व कप के बुखार का आनंद लेने की तैयारी कर रही है, जिसकी शुरुआत 14 जून से हो रही है। फीफा विश्व कप के इतिहास में कई सुनहरे पल शामिल है, लेकिन कुछ ऐसे भयानक विवाद भी हैं जिसने इसे अलग पहचान दिलाई है। इनमें से कुछ विवादों में खतरनाक फाउल शामिल है तो कई बार रेफरी की गलती से बड़ी गलतियां घटी। चलिए फीफा विश्व कप की ऐसी ही कुछ भयानक कंट्रोवर्सीज पर गौर करते हैं:
1938 विश्व कपः इटली की टीम ने मैच शुरू होने से पहले किया फांसी वाला सैल्यूट
फीफा विश्व कप में विवाद लंबे समय से होते आए हैं। ऐसा ही एक विवाद 1938 विश्व कप में इटली और फ्रांस के बीच मैच शुरू होने से पहले हुआ। विश्व युद्ध 2 से पहले यह आखिरी टूर्नामेंट था, जिसकी मेजबानी फ्रांस ने की थी। यह टूर्नामेंट 4 जून से 19 जून 1938 तक खेला गया था। इटली और फ्रांस के बीच 12 जून को क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। इटली के फासीवादी झुकाव की वजह से फ्रेंच फैंस काफी गुस्से में थे।
तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के निर्देशों पर इटली की टीम ने सफेद के बजाय काली शर्ट पहनी। इसके साथ ही पूरी टीम ने मैच शुरू होने से पहले फासी वाला सैल्यूट करके हड़कंप मचा दिया। हालांकि, इटली ने बेहतरीन प्रदर्शन करके फ्रांस को इस मैच में 3-1 से हरा दिया और आगे चलकर हंगरी को मात देकर विश्व कप का खिताब जीता।
1962 विश्व कपः सैंटियागो की बदनाम लड़ाई
फीफा विश्व क के इतिहास में सबसे हिंसक मैचों में से एक मुकाबला 1962 विश्व कप में खेला गया था। 2 जून 1962 को मेजबान चिली और इटली के बीच मैच खेला जा रहा था। इस मैच को 'सैंटियागो की लड़ाई' करार दिया गया क्योंकि मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच जमकर मारपीट हुई थी।
यह मैच चिली के सैंटियागो में खेला गया था। खिलाड़ियों के बीच खूब घूंसे, धक्के और फाउल हुए। रेफरी केन एस्टन ने दो खिलाड़ियों को मैदान के बाहर भेज दिया, जिन्होंने बाद में पीले और लाल कार्ड का आविष्कार किया।
दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव था और इसी वजह से मैच में भी हिंसा फैली। चिली विश्व कप की मेजबानी कर रहा था और इटली के पत्रकारों ने सैंटियागो शहर की लाचार स्थिति की आलोचना की थी। पत्रकारों ने चिली के शहर की जमकर आलोचना की, जिसकी वजह से उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा।
1982 विश्व कपः हेराल्ड शूमाकर ने जब पैट्रिक बैटिसटन को अपने पंच से कर दिया पस्त
जहां 1962 विश्व कप को फाउल के लिए याद किया जाता है, वहीं 1982 विश्व कप को वेस्ट जर्मनी के हेराल्ड शूमाकर के बदनाम फाउल के लिए जाना जाता है। जर्मनी और फ्रांस के बीच 1982 विश्व कप के सेमीफाइनल मैच में वेस्ट जर्मनी के गोलकीपर हेराल्ड शूमाकर ने पैट्रिक बैटिसटन को जोरदार पंच मारकर मैदान पर ही गिरा दिया। शूमाकर के हवा में उछलकर पंच मारने के बाद बैटिसटन मैदान पर ही गिर गए।
उनके तीन दांत टूट गए जबकि पस्लीयों में गंभीर चोट आई। उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान के बाहर ले जाया गया और करीब आधे घंटे तक वह बेसुध रहे। मजेदार बात यह है कि शूमाकर को इसके लिए रैफरी ने येलो या लाल कार्ड नहीं दिखाया। इस फाउल को बाद में 'ट्रेजेडी ऑफ सेविल' के नाम से जाना जाने लगा।
1982 विश्व कपः वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने मिलकर रचा अल्जीरिया के खिलाफ षडयंत्र
1982 फीफा विश्व कप को न सिर्फ गंभीर फाउल के लिए याद किया जाता है बल्कि इसमें यह भी देखने को मिला कि दो टीमों ने मिलकर एक टीम के खिलाफ षड़यंत्र रचा। जी हां, वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने मिलकर अल्जीरिया को साजिश करके विश्व कप से बाहर किया।
वेस्ट जर्मनी और ऑस्ट्रिया के बीच 25 जून 1982 को पहले राउंड का फाइनल मैच खेला गया। इस विश्व कप में वेस्ट जर्मनी, ऑस्ट्रिया, अल्जीरिया और चिली एक ही ग्रुप में शामिल थी। अल्जीरिया ने ग्रुप के पहले मैच में वेस्ट जर्मनी को मात दी थी।
वेस्ट जर्मनी को अगले राउंड में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रिया को कम गोल के अंतर से मात देने की जरूरत थी। ऑस्ट्रिया के साथ भी यही हाल था। दोनों टीमों ने साजिश करके अल्जीरिया को बाहर कर दिया। जर्मन टीम ने पहले 10 मिनट में बढ़त हासिल की जबकि अगले 80 मिनटों में दोनों टीमों ने गोल करने के झूठे प्रयास किए। मैच का परिणाम यह रहा कि वेस्ट जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को 1-0 से मात दी और अल्जीरिया इस इवेंट से बाहर हो गया। इस मैच को बाद में 'डिस्ग्रेस ऑफ गिजोन' के नाम से जाना जाने लगा।
1986 विश्व कपः डिएगो माराडोना और हैंड ऑफ गॉड
'हैंड ऑफ गॉड' आज भी विश्व कप के सबसे चर्चित विवादों में से एक है। यह विवाद अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच 22 जून 1986 को खेले गए मैच के दौरान हुआ। अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना ने दो गोल दागकर टीम को जीत दिलाई। हालांकि, उनका पहला गोल हाथ की मदद से हुआ।
51 मिनट के बाद माराडोना को साथी खिलाड़ी ने पास किया, जिन्हें उन्हें गोल में तब्दील किया। इंग्लिश खिलाड़ियों ने फाउल की अपील की, लेकिन रेफरी ने इसे स्वीकार नहीं किया और अर्जेंटीना के खाते में गोल दर्ज करा दिया। माराडोना ने बाद में कहा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था। अर्जेंटीना ने आगे चलकर मैच व फीफा विश्व कप का खिताब जीता।
2006 विश्व कपः जोसिप सिम्यूनिक को दिखाए गए तीन पीले कार्ड
यह विवाद खिलाड़ियों के कारण नहीं बल्कि रेफरी की वजह से उजागर हुई। फुटबॉल फैंस अच्छे से जानते हैं कि अर किसी खिलाड़ी को दो बार पीला कार्ड दिखा दिया जाए तो उसे मैदान से बाहर जाना पड़ता है और फिर टीम को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना होता है। हालांकि, 2006 विश्व कप में ऐसा नहीं हुआ।
रेफरी की सबसे बड़ी गलती यहां देखने को मिली। इंग्लैंड के रेफरी ग्राहम पोल ने एक खिलाड़ी को मैच में तीन बार पीला कार्ड दिखाया। ग्रुप चरण में क्रोएशिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच के दौरान यह देखने को मिला। पोल ने क्रोएशिया के जोसिप सिम्यूनिक को तीन बार पीला कार्ड दिखाया।
सिम्यूनिक को पहली बार मैच के 61वें मिनट में कार्ड दिखाया गया। इसके बाद 91वें मिनट में उन्हें दूसरी बार पीला कार्ड दिखाया गया। मगर रेफरी ने उन्हें मैदान से बाहर नहीं जाने दिया। दो मिनट के बाद फिर से रेफरी ने सिम्यूनिक को पीला कार्ड दिखाया और मैदान से बाहर भेज दिया। यह मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा।
2006 विश्व कपः जिनेदिन जिदान ने मार्को मातेराजी को हेडबट किया
फीफा विश्व कप का सबसे भयानक विवाद। एक स्टार खिलाड़ी के इंटरनेशनल करियर का दुखद अंत। फ्रांस के जिनेदिन जिदान ने 9 जुलाई 2006 को इटली के मार्को मातेराजी को सिर से मारकर मैदान पर गिरा दिया। इसके बाद रेफरी ने उन्हें लाल कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। यह जिदान के इंटरनेशनल करियर का आखिरी मैच भी था।
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास के फैसले को बदलकर कोच रेमंड डोमेनेक के कहने पर जर्मनी में 2006 में वे विश्व कप खेलने उतरे। इसके बाद सब कुछ सपने सरीखा रहा और टीम को वे फाइनल तक ले गए। अंतिम 16 में स्पेन को हराने के बाद फ्रांस का सामना ब्राजील से था जिसे वह 1998 फाइनल में हरा चुकी थी।
इटली के खिलाफ फाइनल में जिदान ने टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इटली के लिए मार्को मातेराजी ने 19वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। मैच पेनल्टी शूटआउट की तरफ बढ़ता दिख रहा था। अतिरिक्त समय में कुछ ही पल बाकी थे और उसके बाद इन दोनों खिलाड़ियों के बीच जो हुआ, वह विश्व कप के इतिहास का काला अध्याय है।
बता दें कि जिदान ने सिर से मातेराजी की छाती पर जबर्दस्त प्रहार किया, जो एक पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर उसका आखिरी 'हेडर' था। हालांकि, जिदान को लाल कार्ड देखना पड़ा और फ्रांस को 5-3 से हार का सामना करना पड़ा था। वह विश्व कप इटली की जीत से ज्यादा जिदान के उस 'हेडबट' के लिए जाना जाता है।
2010 विश्व कपः इंग्लैंड के गोल को रेफरी ने कर दिया खारिज
2010 फीफा विश्व कप के राउंड 16 ग्रुप स्टेज के दौरान एक जोरदार विवाद देखने को मिला। जर्मनी और इंग्लैंड के बीच 27 जुलाई 2010 को खेले गए मैच के 37वें मिनट में फ्रेंक लेंपार्ड ने गोल दागा, जिसे रेफरी ने घोषित करने से इंकार कर दिया। रीप्ले में दिख रहा था कि गेंद गोल लाइन के अंदर गई है।
इंग्लैंड की टीम 1-2 से पिछड़ रही थी जब लेंपार्ड ने 20 यार्ड की दूरी से किक जमाई। गेंद जर्मन गोलकीपर मैनुएल न्यूअर को लांघते हुए गोल लाइन में गई। यह गोल था, लेकिन रेफरी ने नहीं दिया। जर्मनी ने आगे चलकर यह मुकाबला 4-1 के अंतर से जीता।
2010 विश्व कपः जेबी अलोंसो के खिलाफ नाइजेल डी जोंग की खतरनाक किक
यह घटना 2010 विश्व कप में स्पेन और नीदरलैंड्स के बीच मैच के दौरान घटी। दोनों के बीच फाइनल मैच 11 जुलाई 2010 को खेला जा रहा था। यह मैच काफी गर्मजोशी से खेला गया और रेफरी ने 14 पीले कार्ड दिखाए। मैच के 25वें मिनट में नीदरलैंड्स के नाइजेल डी लोंग ने स्पेन के जेबी अलोंसो को छाती पर जोरदार किक जमाई। यह गंभीर फाउल था, लेकिन रेफरी ने जोंग को सिर्फ पीला कार्ड दिखाया। बाद में रेफरी ने स्वीकार किया कि जोंग को तब लाल कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर देना चाहिए था। स्पेन ने यह मैच 1-0 के अंतर से जीता था।
2014 विश्व कपः लुईस सुआरेज ने जब जिर्योजियो छिलेनी को काट लिया
फीफा विश्व कप में विवाद सिर्फ कंधे पर किक या हेडबट तक ही सीमित नहीं। इसमें दांतों से काटना भी शामिल है। जी हां, 2014 फीफा विश्व कप ने अपनी अलग पहचान इस घटना के कारण बनाई। इटली और उरुग्वे के बीच 24 जून 2014 को ग्रुप मैच खेला जा रहा था।
मैच के 79वें मिनट में उरुग्वे के स्ट्राइकर लुईस सुआरेज का इंटली के डिफेंडर जिर्योजियो छिलेनी से पेनल्टी क्षेत्र के पास विवाद हुआ। सुआरेज विरोधी डिफेंडर से भिड़ गए और फिर उन्होंने छिलेनी के कंधे पर काट लिया। रेफरी मार्को रॉड्रिग्ज ने यह घटना ध्यान से नहीं देखी और इटली को सिर्फ फ्री किक दे दी। उरुग्वे ने मैच 1-0 से जीता और इटली विश्व कप से बाहर हो गई।
बाद में सुआरेज को इस हरकत के लिए कड़ी सजा भुगतना पड़ी। उन्हें फुटबॉल संबंधित गतिविधियों से चार महीने के लिए निलंबित किया गया। इसके अलावा भारी जुर्माने के साथ उन पर 9 अंतरराष्ट्रीय मैच का प्रतिबंध लगाया गया।