फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Football ›   FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  

33 कैमरे-15 स्क्रीन की निगरानी में होगा फीफा वर्ल्ड कप, 88 साल के इतिहास में पहली बार हो रहा ऐसा

Thu, 14 Jun 2018 02:32 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 14 Jun 2018 02:32 PM IST
विज्ञापन
FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  
वीडियो रेफरी रूम

रूस में 14 जून से शुरू होने वाले फुटबॉल वर्ल्ड कप में इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है, जो फीफा वर्ल्ड कप के 88 साल के इतिहास में अब तक नहीं हुआ था। दरअसल, इस विश्व कप के हर मुकाबलों को रोचक बनाने और सटीक फैसले लेने के लिए इस विश्व कप में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल होगा। मॉस्को में बने सेंट्रलाइज्ड वीडियो ऑपरेशन रूम से पीछे हर मैच पर 33 कैमरों और 15 स्क्रीन के जरिए नजर रखी जाएगी।

विज्ञापन


फीफा की रेफरी कमेटी ने वीडियो रेफरल के लिए 13 लोगों की वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) यानी सहायक रेफरी प्रणाली टीम बनाई है। यह टीम वर्ल्ड कप के 32 टीमों के सभी 64 मुकाबलों में मैच अधिकारियों को सपोर्ट करेगी। वीएआर टीम मॉस्को में एक सेंट्रलाइज्ड वीडियो ऑपरेशन रूम में बैठेगी। यह टीम सभी रिलेवेंट ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी और ऑफसाइड कैमरों से संबद्ध करेगी। 
विज्ञापन


बता दें कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी इस खेल के बाबत कोई फैसला नहीं लेंगे, बल्कि फैसला लेने की प्रक्रिया में रेफरी की मदद करेंगे। अंतिम फैसला लेने का अधिकार सिर्फ रेफरी का ही होगा। ब्रॉडकास्टर्स, कमेंटेटर्स, और इन्फोटैन्मेंट टीम फुटबॉल प्रेमियों को समीक्षा प्रक्रिया के बारे में जानकारी देगी। हर मुकाबलों के लिए 4 वीडियो असिस्टेंट रेफरी होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

33 कैमरों और 15 स्क्रीन की रहेगी निगरानी

FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  
वीएआर

वीएआर टीम 33 ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी। इसमें 8 स्लो सुपर स्लो मोशन और 4 अल्ट्रा स्लो मोशन कैमरे होंगे। इसके अलावा वे दो ऑफसाइड कैमरों को भी एक्सेस कर पाएंगे। नॉकआउट चरण के मुकाबलों के लिए हर गोल पोस्ट के पीछे 2 अतिरिक्त अल्ट्रा स्लो मोशन कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को भी वीएआर टीम एक्सेस कर सकेगी। स्लो मोशन रिप्ले का मुख्य रूप से इस्तेमाल वास्तविक स्थितियां जानने के लिए किया जाएगा, जबकि सामान्य स्पीड के कैमरों का इस्तेमाल सब्जेक्टिव फैसलों के लिए किया जाएगा।

चार स्थितियों में होगा वीएआर का इस्तेमाल

FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  
वीडियो रेफरी रूम

वीएआर का इस्तेमाल चार स्थितियों में किया जा सकता है।1. गोल होने के बाद 2.पेनल्टी से जुड़े फैसलों पर 3.रेड कार्ड से जुड़े फैसलों पर या फिर कार्ड दिखाए जाने के दौरान और 4.खिलाड़ी की गलती को लेकर। इस मामले में फीफा के रेफरींग विभाग के प्रमुख मासिमो बुसाका ने कहा, 'मुझे वीएआर की प्रतीक्षा करने की जरूरत नहीं है कि रेफरी ईमानदार हों। स्थिति को देखते हुए हर कोई एक और पुष्टि भी कर सकता है कि निर्णय सही था, इसलिए वे अब और शिकायत नहीं कर सकते हैं। मेरा विश्वास मानिए, यहां तक कि वीएआर के बिना, हमें यकीन करना होगा कि रेफरी क्या कर रहे हैं।'

वहीं, फ्लोरेंस के समीप कोवसियानो में इतालवी राष्ट्रीय ट्रेनिंग केंद्र में वीएआर ट्रेनिंग कार्यक्रम के दौरान फीफा रेफरी समिति के अध्यक्ष पीयरलुइगी कोलिना ने कहा, 'इसका उद्देश्य बड़ी और सामान्य गलतियों से बचना है, इसका लक्ष्य कभी प्रत्येक छोटी घटना को देखना नहीं है। रूस में 13 रेफरी सिर्फ 'कंट्रोल स्क्रीन' को देखने का काम करेंगे और पिच पर अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए चुने गए लगभग 35 रेफरी में से प्रत्येक को एक या इससे अधिक मैच में वीडियो रेफरी की भूमिका निभानी होगी।'
 

छोटी से छोटी घटना पर रहेगी नजर

FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  
वीएआर रूम

बता दें कि मैक्सिको में दूसरी बार हुआ 1986 का विश्व कप पूरी तरह से अर्जेंटीना के कप्तान डिएगो मैराडोना के नाम रहा। मैराडोना के दम पर अर्जेंटीना दूसरी बार चैंपियन बना। फाइनल में अर्जेंटीना ने वेस्ट जर्मनी को 3-2 से शिकस्त देकर दूसरी बार इस ट्रॉफी पर कब्जा किया। इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में मैराडोना के दो गोल से अर्जेंटीना 2-1 से जीता था। पर उनके दोनों गोल चर्चा में रहे थे। इनमें से खासकर पहला गोल काफी विवादित रहा था।

गेंद मैराडोना के हाथ से लगकर गोल पोस्ट में गई थी पर रेफरी इसे देख नहीं सके और इसे गोल मान लिया गया। मैराडोना ने इसे भगवान की मर्जी बताते हुए इसे हैंड ऑफ गॉड नाम दिया था जोकि आज तक इसी नाम से मशहूर है। इसके चार मिनट बाद ही उन्होंने ऐसा खूबसूरत गोल दागा जिसे सदी का सर्वश्रेष्ठ गोल कहा गया। मैराडोना ने इंग्लिश गोलकीपर सहित पांच खिलाड़ियों को चकमा देते हुए यह गोल किया था। मैराडोना ने टूर्नामेंट में कुल पांच गोल किए थे। फ्रांस ने बेल्जियम को 4-2 से मात देकर तीसरा स्थान हासिल किया था। तो इसलिए इस तरह की प्रत्येक छोटी-छोटी घटना को देखने के लिए वीएआर का इस्तेमाल इस बार के विश्व में किया जाएगा।

2010 विश्व कप के बाद उठी थी वीएआर की मांग

FIFA World Cup 2018: first time Video referees rooms is all set in 88 yeras of history  
इंग्लैंड बनाम जर्मनी

हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि फुटबॉल में तकनीक के इस्तेमाल की ज्यादा जरूरत नहीं है। दरअसल, साल 2010 फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड और जर्मनी के बीच हुए क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान कुछ ऐसा हुआ था जिसके बाद हर किसी ने सवाल उठाने लगे थे कि यदि वीडियो प्रूफ जैसी कोई तकनीक का इस्तेमाल हुआ होता तो मैच का रिजल्ट कुछ और होता। बता दें कि इस मैच में इंग्लैंड की टीम जर्मनी के हाथों 4-1 से हार गई थी। मैच के दौरान इंग्लैंड के फ्रैंक लैंपर्ड ने गेंद को जर्मनी के गोलपोस्ट में पहुंचा दिया था, लेकिन रेफरी ने उसे गोल नहीं दिया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed