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डेल पियरो का दिखा क्लास पर नहीं चला जादू
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 15 Oct 2014 10:31 AM IST
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कभी डेल पियरो-डेल पियरो की आवाजों से गूंजता तो कभी मैक्सिकन वेब में लहराता नेहरू स्टेडियम, यह नजारा बता रहा था क्रिकेट के इस देश में फुटबॉल के दीवानों की कमी नहीं है।
इटली के स्टार अलसांद्रो डेल पियरो और फ्रांस के दिग्गज डेविड ट्रेजेगुए की जंग को देखने लगभग 20 हजार फुटबॉल प्रेमी उमड़ पड़े। उन्हें डेल पियरो का क्लास भी देखने को मिला उनकी फ्री किक भी देखी कॉर्नर भी देखा, बस गोल ही देखने को नहीं मिला।
इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के इस मुकाबले में मेजबान डेल पियरो की टीम दिल्ली डायनमोज ने एक नहीं अनगिनत मौके गंवाए, लेकिन उन्हें गोल नसीब नहीं हुआ। यह पुणे सिटी एफसी के इतालावी गोलकीपर एमेनुअल बेलार्डी ही थे जिन्होंने मेजबानों को एक भी गोल नहीं करने दिया। इसके साथ ही ट्रेजेगुए की पुणे ने दिल्ली को उसी के घर में गोलरहित ड्रॉ पर मजबूर कर दिया।
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इटली के स्टार अलसांद्रो डेल पियरो और फ्रांस के दिग्गज डेविड ट्रेजेगुए की जंग को देखने लगभग 20 हजार फुटबॉल प्रेमी उमड़ पड़े। उन्हें डेल पियरो का क्लास भी देखने को मिला उनकी फ्री किक भी देखी कॉर्नर भी देखा, बस गोल ही देखने को नहीं मिला।
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इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के इस मुकाबले में मेजबान डेल पियरो की टीम दिल्ली डायनमोज ने एक नहीं अनगिनत मौके गंवाए, लेकिन उन्हें गोल नसीब नहीं हुआ। यह पुणे सिटी एफसी के इतालावी गोलकीपर एमेनुअल बेलार्डी ही थे जिन्होंने मेजबानों को एक भी गोल नहीं करने दिया। इसके साथ ही ट्रेजेगुए की पुणे ने दिल्ली को उसी के घर में गोलरहित ड्रॉ पर मजबूर कर दिया।
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38वें मिनट में पहली बार मैदान पर आए पियरो
पहले 11 में 39 साल के डेल पियरो को जगह नहीं दी गई तो फुटबॉल प्रेमियों को निराशा भी हुई, लेकिन 38वें मिनट में जैसे ही उन्होंने मैदान में प्रवेश किया मानों दर्शकों में उत्साह का नया संचार पैदा हो गया हो।
डेल पियरो ने भी उन्हें अपने उच्चस्तरीय खेल के दीदार कराने की कोशिश की। दूसरे हाफ में उन्हें बॉक्स के बाहर से खूबसूरत राइट फुटर लिया जो गोल से कुछ इंच दूर रह गया। तीन-तीन रक्षकों से घेर रखे गए डेल पियरो ने कुछ मौकों पर खूबसूरत पास और डॉज देकर अपनी कलाकारी दिखाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
सच्चाई यही है जिस फुटबॉल को देखने फुटबॉल प्रेमी यहां जुटे थे उन्हें उसके दर्शन नहीं हुए। खास तौर पर ट्रेजेगुए पूरी तरह ऑफ कलर रहे। खेल के आठवें मिनट में मनीष मैथानी ने ट्रेजेगुए को खूबसूरत पास दिया। उन्हें सिर्फ छह फुट 10 इंच लंबे गोलकीपर क्रिस्टोफ वॉन हाउट को छकाना था, लेकिन उनकी किक बाहर निकल गई। पूरे मुकाबले में उन्हें यही मौका मिला।
दिल जीतने का काम भारतीय मिडफील्डर फ्रांसिस फर्नांडीज ने किया। उन्होंने पहले हाफ में गोल पर जोरदार प्रहार किया लेकिन यहां सुपरमैन की तरह बेलार्डी आड़े आ गए। उन्होंने चार निश्चित गोल बचाए। खेल के अंतिम मिनट में बेलार्डी बीट भी हो गए ब्राजीली स्ट्राइकर गुस्टावो सांटोस ने उन्हें छकाया लेकिन उनकी किक बार से लगकर बाहर निकल गई।
डेल पियरो ने भी उन्हें अपने उच्चस्तरीय खेल के दीदार कराने की कोशिश की। दूसरे हाफ में उन्हें बॉक्स के बाहर से खूबसूरत राइट फुटर लिया जो गोल से कुछ इंच दूर रह गया। तीन-तीन रक्षकों से घेर रखे गए डेल पियरो ने कुछ मौकों पर खूबसूरत पास और डॉज देकर अपनी कलाकारी दिखाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
सच्चाई यही है जिस फुटबॉल को देखने फुटबॉल प्रेमी यहां जुटे थे उन्हें उसके दर्शन नहीं हुए। खास तौर पर ट्रेजेगुए पूरी तरह ऑफ कलर रहे। खेल के आठवें मिनट में मनीष मैथानी ने ट्रेजेगुए को खूबसूरत पास दिया। उन्हें सिर्फ छह फुट 10 इंच लंबे गोलकीपर क्रिस्टोफ वॉन हाउट को छकाना था, लेकिन उनकी किक बाहर निकल गई। पूरे मुकाबले में उन्हें यही मौका मिला।
दिल जीतने का काम भारतीय मिडफील्डर फ्रांसिस फर्नांडीज ने किया। उन्होंने पहले हाफ में गोल पर जोरदार प्रहार किया लेकिन यहां सुपरमैन की तरह बेलार्डी आड़े आ गए। उन्होंने चार निश्चित गोल बचाए। खेल के अंतिम मिनट में बेलार्डी बीट भी हो गए ब्राजीली स्ट्राइकर गुस्टावो सांटोस ने उन्हें छकाया लेकिन उनकी किक बार से लगकर बाहर निकल गई।