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जापानी रेफरी का विवादित फैसला सोशल मीडिया पर छाया
Updated Sat, 14 Jun 2014 10:52 AM IST
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वर्ल्ड कप के उद्घाटन मैच में जापानी रेफरी यूची निशिमुरा के विवादास्पद फैसले की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है।
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इस फैसले पर जापानी प्रशंसकों ने भी अपनी राय जाहिर की है और निराशा जताई है।
रेफरी फैसले की वजह से ब्राजील को पेनल्टी शॉट मिला था और फिर ब्राजील इस मैच में 2-1 से आगे हो गया। वैसे ब्राजील ने ये मैच 3-1 से जीता था।
बिल्कुल सही है कोसना
सोशल मीडिया में इस विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर आए कई पोस्टों में निशिमुरा को ब्राजील की जर्सी पहने हुए दिखाया गया है।
एक ट्विटर हैंडल @shinokc ने ट्वीट किया है, "निशिमुरा को कोसना बिल्कुल सही है। पेनल्टी नहीं होना था क्रोएशिया के लिए बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं।"
एक अन्य ट्विटर हैंडल @sanadamasayuki2 ने ट्वीट किया है, "यह एक दुविधा में पड़े जापानियों के लिए एक मुश्किल काम है।"
आगे होने वाली प्रतिक्रिया की आशंका के मद्देनजर ट्विटर हैंडल @tonbuhin ने ट्वीट किया है, "ओह अगर ब्राजील वर्ल्ड कप जीत जाता है तो निशिमुरा सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी होंगे।
जापान के लोग दुनियाभर से इस फैसले के कारण दबाव महसूस कर रहे हैं। अर्जेंटीना में एक ट्विटर हैंडल @chizurufgarcia ने ट्वीट कर दावा किया कि स्थानीय पत्रकार ने ई-मेल कर उनसे निशिमुरा पर टिप्पणी करने को कहा है।
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संदिग्ध फैसले
जापान की मीडिया ने वर्ल्ड कप के इस विवाद को जगह तो दी है, लेकिन खेल दैनिक नीक्कान ने रेफरी का समर्थन किया है।
42 वर्षीय निशिमुरा को यकीनन ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार को लूका मॉड्रिक को कोहनी से मारने के लिए सीधे लाल कार्ड दिखाना चाहिए था।
निशिमुरा 2004 से अंतरराष्ट्रीय रेफरी है और उन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका में हुए वर्ल्ड कप सहित कई टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया है।
2008 के अफ्रीका कप में मिस्र के साथ हुए क्वार्टर फाइनल के दौरान अंगोला के खिलाड़ियों ने निशिमुरा को धक्का दे दिया था।
2010 में कांगो प्रशंसक क्लब वर्ल्ड कप के एक मैच के दौरान उनके फैसले से बहुत नाराज हो गए थे, जिसका बदला उन लोगों ने एक चीनी रेस्तरां में तोड़-फोड़ कर लिया था।
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दो बार वर्ष के रेफरी के रूप में जे लीग द्वारा वोट देने के बावजूद वह लंबे समय तक जापानी प्रशंसकों के बीच अपने संदिग्ध फैसलों के लिए विवादास्पद रहे हैं।
एक अन्य जापानी रेफरी मासायोशी ओकाडा को 1998 के वर्ल्ड कप मैच के एक ही मैच के बाद वापस भेज दिया गया था। इस मैच में इंग्लैंड के खिलाड़ी रेफरी के रुख से नाराज हो गए थे।