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FIFA Suspends AIFF: सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासकों की समिति भंग की, 23 सदस्यों की समिति संभालेगी एआईएफएफ

Mon, 22 Aug 2022 03:58 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 22 Aug 2022 03:58 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि प्रशासकों की समिति को खत्म कर दिया जाना चाहिए और भारतीय फुटबॉल संघ को कार्यकारी सेकेट्री जनरल के हाथों में सौंप दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह अपील स्वीकार करते हुए कहा है कि अगले आदेश तक सीओए एआईएफएफ के मामलों में हस्तेक्ष नहीं करेगी।
 

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Fifa bans AIFF hearing continues in supreme court
सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सुनवाई जारी है - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विश्व फुटबॉल संचालन संस्था फीफा द्वारा भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को निलंबित किए जाने के मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक प्रशासकों की समिति (सीओए) भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) के मामलों पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने ओआईएफएफ के चुनाव भी टाल दिए हैं, जो 28 अगस्त को होने थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि, एआईएफएफ पर लगा फीफा का निलंबन को रद्द हो और भारत में अंडर -17 महिला फीफा विश्व कप आयोजित हो सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की टीमों को खेलने की अनुमित मिले।
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एआईएफएफ की समिति में कुल 23 सदस्य होंगे। इसमें छह प्रतिष्ठित खिलाड़ी हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक यही स्थिति बनी रहेगी। 

प्रशासकों की समिति भंग
इस मामले पर लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासकों की समित भंग कर दी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अगस्त को बनाया था। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिल आर दवे, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी और विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप शामिल थे।
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आईओए के लिए नहीं बनेगी प्रशासकों की समिति
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया, जिसमें कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि आईओए के लिए प्रशासकों की समिति नहीं बनाई जाएगी और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। 
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कोर्ट ने स्वीकार की केन्द्र सरकार की अपील
केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट से प्रशासकों की समिति (सीओए) को हटाने की अपील की और कहा कि भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) को अब एआईएफएफ प्रशासन के हवाले कर दिया जाना चाहिए, जिसकी अगुआई कार्यवाहक महासचिव कर रहे हैं। इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासकों की समिति से कहे कि वो एआईएफएफ के संविधान का अंतिम मसौदा 23 अगस्त तक कोर्ट में दें। इसी के साथ एआईएफएफ में सीओए का हस्तक्षेप खत्म हो जाना चाहिए। कोर्ट ने केन्द्र सरकार की अपील स्वीकार कर ली है।

इससे पहले इस मामले में बुधवार को सुनवाई हुई थी। इसमें केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि फीफा अधिकारियों से बातचीत चल रही है। अंडर-17 विश्व कप के आयोजन और भारतीय फुटबॉल महासंघ के निलंबन को लेकर बातचीत का दौर जारी है।

क्या है मामला?
एआईएफएफ के चुनाव फीफा परिषद के सदस्य प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में दिसंबर 2020 तक होने थे, लेकिन इसके संविधान में संशोधन पर गतिरोध के कारण इसमें देरी हुई। इसके बाद इसी महीने की शुरुआत में (तीन अगस्त) सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत चुनाव कराने का आदेश दिया था और कहा था कि निर्वाचित समिति तीन महीने की अवधि के लिए एक अंतरिम निकाय होगी। सीओए ने चुनाव को अपने मुताबिक कराने का तय किया और इसमें कुछ पूर्व प्रमुख खिलाड़ियों से वोट कराने का फैसला लिया। इसे फीफा ने तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप माना।

पांच अगस्त को ही फीफा ने तीसरे पक्ष (सीओए) के हस्तक्षेप को लेकर भारतीय फुटबॉल महासंघ को को निलंबित करने की धमकी दी थी। इसके साथ ही फीफा ने अक्तूबर में होने वाले महिला अंडर-17 विश्वकप की मेजबानी के अपने अधिकार भी छीन लेने की चेतावनी दी थी। 16 अगस्त को फीफा ने कुछ सुधार न होने पर एआईएफएफ को बैन कर दिया। 

भारतीय फुटबॉल महासंघ को अपने 85 साल के इतिहास में पहली बार फीफा से निलंबन झेलना पड़ा। फीफा के इस फैसले ने अक्तूबर में होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी के अधिकार भी भारत से छीन लिए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त प्रशासकों की समिति ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी और 28 अगस्त को चुनाव कराने का फैसला किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द करते हुए सीओए को भंग कर दिया है।

FIFA के नियम क्या कहते हैं?
फीफा के नियमों के मुताबिक, सदस्य संघों को अपने-अपने देशों में कानूनी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई प्रशासकों की समिति के हस्तक्षेप और उनके मुताबिक चुनाव कराए जाने पर फीफा ने भारतीय फुटबॉल महासंघ को सस्पेंड कर दिया। फीफा ने पहले इसी तरह के मामलों में अन्य राष्ट्रीय संघों को भी निलंबित किया है।

कब निलंबन हटाएगा फीफा?
फीफा ने सोमवार के बयान में कहा- एआईएफएफ कार्यकारी समिति की शक्तियों को ग्रहण करने के लिए प्रशासकों की एक समिति (CoA) गठित करने के आदेश के निरस्त होने और एआईएफएफ प्रशासन एआईएफएफ के दैनिक मामलों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के बाद निलंबन हटा लिया जाएगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासकों की समिति को भंग कर दिया है। इसके बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि फीफा एआईएफएफ पर लगा निलंबन खत्म कर देगा।

फीफा के निलंबन का मतलब यह है कि जब तक यह जारी रहेगा तब तक भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम और भारतीय महिला फुटबॉल टीम किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच में हिस्सा नहीं ले पाएगी। साथ ही कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय लीग में हिस्सा नहीं ले पाएगा।
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