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हाईकोर्ट ने ठुकराई ज्वाला गुट्टा की याचिका
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 25 Oct 2013 06:47 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट ने ज्वाला गुट्टा को झटका देते हुए उनके खिलाफ गठित जांच समिति की जांच पर स्टे लगाने के अनुरोध को ठुकरा दिया है।
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ज्वाला ने शुक्रवार को भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) द्वारा गठित अनुशासन समिति की ओर से 14 अक्टूबर को जारी अपने खिलाफ कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी।
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साथ ही इस युगल बैडमिंटन खिलाड़ी ने अपने ऊपर चल रही जांच पर भी रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी।
10 को कोर्ट ने दी थी राहत
जस्टिस वीके जैन ने 10 अक्टूबर को दिए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भाग लेनी की अनुमति दे थी इसलिए एक और राहत नहीं दी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने समिति को आगे की जांच जारी रखने का भी निर्देश दिया। हालांकि कोर्ट ने ज्वाला गुट्टा को कारण बताओ नोटिस पर जवाब देने के लिए दो और हफ्ते का समय दिया है।
इससे पहले ज्वाला गुट्टा को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए 10 अक्टूबर को बैडमिंटन संघ को निर्देश दिया था कि उन्हें खेलने दिया जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) द्वारा ज्वाला पर आजीवन प्रतिबंध की सिफारिश पर स्टे लगा दिया था।
गोपीचंद के चुप रहने से हैरान ज्वाला
ज्वाला गुट्टा ने कहा कि वह हैरान हैं कि भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) द्वारा उनके खिलाफ कथित अनुशासन उल्लंघन के मामले में प्रस्तावित आजीवन प्रतिबंध पर भारत के मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद ने चुप्पी साध रखी है।
ज्वाला ने पूछा कि मैं हैरान हूं कि आखिर मुख्य कोच चुप क्यों हैं। आखिर वह कुछ क्यों नहीं कह रहे। आरिफ सर और विमल सर जैसे पूर्व कोच इस मामले में बोल चुके हैं। विमल सर बंगा बीट्स के कोच थे। अगर वे बोल सकते हैं तो मुख्य कोच क्यों नहीं।
ज्वाला गुट्टा ने कहा कि मेरे कहने का मतलब है कि वह सिर्फ अपनी अकादमी के कोच नहीं हैं बल्कि पूरे देश के कोच हैं। वह मुझे कह सकते हैं कि ज्वाला तुमने जो किया वह गलत है लेकिन उन्हें अपना रुख साफ करना होगा। वह प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहे हैं।