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खेल पुरस्कारों पर बढ़ा विवाद, खिलाड़ी बोले हुआ अन्याय

Wed, 14 Aug 2013 11:40 AM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी Updated Wed, 14 Aug 2013 11:40 AM IST
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controversies rise on rajiv gandhi khel ratna

राजीव गांधी खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय खेल पुरस्कार एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार खेल रत्न को लेकर माइकल फरेरा की अगुवाई वाली कमेटी पर पक्षपात के आरोप लगे हैं।

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यह आरोप जड़ने वाली और कोई नहीं बल्कि लंदन ओलंपिक में छठे स्थान पर रहने वाली कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट कृष्णा पूनिया और लंदन पैरालंपिक के रजत पदक विजेता एचएन गिरीशा हैं।
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कृष्णा ने इसे अन्याय करार देते हुए इसके खिलाफ खेल मंत्रालय व साई के समक्ष आवाज उठाने का निर्णय लिया है।
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वहीं गिरीशा सभी ओलंपिक पदक विजेताओं को खेल रत्न मिलने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किए जाने पर बंगलूरू में न सिर्फ धरना देने जा रहे हैं बल्कि इस चयन के खिलाफ वह अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

सिर्फ कृष्णा ही नहीं बल्कि उनके पति व कोच द्रोणाचार्य अवार्डी वीरेंद्र पूनिया इसे सरासर पक्षपात करार देते हैं। उनका कहना है कि कृष्णा के ओलंपिक के प्रदर्शन को नजरअंदाज किया गया है।

ओलंपिक में छठा स्थान हासिल करने वाली वह देश की पहली महिला डिस्कस थ्रोअर हैं। जबकि रंजन सोढ़ी ओलंपिक में 11वें स्थान पर रहे थे। उन्हें रंजन के अवार्ड मिलने पर कोई दिक्कत नहीं है लेकिन कृष्णा का नाम हटाना पक्षपात है।


कृष्णा का कहना है कि एक समय कमेटी सदस्य भी उनके पक्ष में थे। लेकिन अचानक राय कैसे बदल गई? वह खेल मंत्रालय से दोबारा बैठक कराने की अपील करेंगी। वहीं गिरीशा और उनके कोच सत्यनारायण भी इस निर्णय को लेकर हैरान हैं।

गिरीशा कहते हैं कि पैरा स्पोर्ट्स को तवज्जो ही नहीं दी जा रही है। जबकि यूरोपीय देशों में इन्हें दूसरे खेलों जैसा ही दर्जा प्राप्त है। देश के सभी ओलंपिक पदक विजेताओं को खेल रत्न दिया गया है। फिर उनके साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? वह पहले धरना देंगे उसके बाद इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक प्रार्थना पत्र भी डालेंगे।

खेल रत्न के लिए आवेदन करने वालों में जीव मिल्खा सिंह, संदीप सिंह, सोमदेव देववर्मन, सरदार सिंह भी थे।

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