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CWG 2022: भारत के छह में चार पहलवानों ने पक्का किया पदक, बाकी दो भी कांस्य जीतने के दावेदार
Fri, 05 Aug 2022 08:44 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बर्मिंघम
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बर्मिंघम
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Fri, 05 Aug 2022 08:44 PM IST
सार
भारतीय पहलवानों ने राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार शुरुआत की है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के आठवें दिन छह भारतीय पहलवान मैट पर उतरे और चार ने अपना पदक पक्का किया।
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बजरंग पुनिया और साक्षी मलिक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन व टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता पहलवान बजरंग और रियो ओलंपिक में कांस्य जीतने वालीं साक्षी मलिक की अगुवाई में हमारे पहलवानों ने शुक्रवार को शानदार प्रदर्शन किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के आठवें दिन छह भारतीय पहलवान मैट पर उतरे और चार ने फाइनल में जगह बनाई। बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया, अंशु मलिक और साक्षी मलिक ने फाइनल में जगह बनाई। वहीं, दिव्या काकरान और मोहित ग्रेवाल के पास भी कांस्य पदक जीतने का मौका है।
भारत के बाकी छह पहलवानों के मुकाबले शनिवार को होंगे। राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती के पावरहाउस रूस, जापान, ईरान और कजाखस्तान हिस्सा नहीं लेते हैं। ऐसे में भारतीय पहलवानों को न के बराबर चुनौती मिली। अधिकर खिलाड़ियों ने लगभग एक मिनट के समय में अपने मैच जीत लिए। भारत अब तक राष्ट्रमंडल खेलों 43 स्वर्ण, 37 रजत और 22 कांस्य सहित कुल 102 पदक जीत चुका है और तालिका में दूसरे नंबर पर है। वहीं, कनाडा 66 स्वर्ण, 43 रजत और 26 कांस्य सहित 135 पदक जीतकर पहले स्थान पर है।
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भारत के बाकी छह पहलवानों के मुकाबले शनिवार को होंगे। राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती के पावरहाउस रूस, जापान, ईरान और कजाखस्तान हिस्सा नहीं लेते हैं। ऐसे में भारतीय पहलवानों को न के बराबर चुनौती मिली। अधिकर खिलाड़ियों ने लगभग एक मिनट के समय में अपने मैच जीत लिए। भारत अब तक राष्ट्रमंडल खेलों 43 स्वर्ण, 37 रजत और 22 कांस्य सहित कुल 102 पदक जीत चुका है और तालिका में दूसरे नंबर पर है। वहीं, कनाडा 66 स्वर्ण, 43 रजत और 26 कांस्य सहित 135 पदक जीतकर पहले स्थान पर है।
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साक्षी के पास खुद को फिर से साबित करने का मौका
रियो ओलंपिक (2016) में कांस्य पदक जीत चुकी साक्षी मलिक ने लंबे समय से कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीता था। इसके बाद उन्होंने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक से सलाह ली और अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। उन्होंने सोनम मलिक और मनीषा को हराकर 62 किलो भारवर्ग में बर्मिंघम का कोटा हासिल किया। इस बार कॉमनवेल्थ 2022 में पदक अपने नाम किया है।
अमेरिका में तैयारी करने के बाद बजरंग ने किया कमाल
बजरंग पूनिया ने राष्ट्रमंडल खेलों से पहले अमेरिका में प्रशिक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अपनी कमियों को दूर करने के साथ ही उन खिलाड़ियों के पुराने वीडियो देखें, जिनसे उन्हें चुनौती मिल सकती थी। उन्हें इसका फायदा भी मिला और कोई पहलवान बजरंग के सामने टिक नहीं सका। एकतरफा अंदाज में उन्होंने फाइनल में जगह बनाई और देश के लिए एक बार फिर पदक लेकर आए। बजरंग ने गोल्ड कोस्ट में भी स्वर्ण जीता था।
गोल्ड कोस्ट से आगे निकलने का लक्ष्य
भारत ने 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में पहला स्थान हासिल किया था। इन खेलों में 5 स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते थे। कनाडा दूसरे स्थान पर रहा था। वहीं 2014 में भारत कनाडा से पीछे दूसरे स्थान पर रहा था। भारत ने 2010 में 19 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया था। कुश्ती में भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक कार्डिफ में हरियाणा के चरखी दादरी के लीला राम सांगवान ने जीता था। इस बार भारतीय पहलवानों का उद्देश्य पांच से ज्यादा स्वर्ण जीतकर कॉमनवेल्थ में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने का होगा।
रियो ओलंपिक (2016) में कांस्य पदक जीत चुकी साक्षी मलिक ने लंबे समय से कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीता था। इसके बाद उन्होंने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक से सलाह ली और अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। उन्होंने सोनम मलिक और मनीषा को हराकर 62 किलो भारवर्ग में बर्मिंघम का कोटा हासिल किया। इस बार कॉमनवेल्थ 2022 में पदक अपने नाम किया है।
अमेरिका में तैयारी करने के बाद बजरंग ने किया कमाल
बजरंग पूनिया ने राष्ट्रमंडल खेलों से पहले अमेरिका में प्रशिक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अपनी कमियों को दूर करने के साथ ही उन खिलाड़ियों के पुराने वीडियो देखें, जिनसे उन्हें चुनौती मिल सकती थी। उन्हें इसका फायदा भी मिला और कोई पहलवान बजरंग के सामने टिक नहीं सका। एकतरफा अंदाज में उन्होंने फाइनल में जगह बनाई और देश के लिए एक बार फिर पदक लेकर आए। बजरंग ने गोल्ड कोस्ट में भी स्वर्ण जीता था।
गोल्ड कोस्ट से आगे निकलने का लक्ष्य
भारत ने 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में पहला स्थान हासिल किया था। इन खेलों में 5 स्वर्ण सहित कुल 12 पदक जीते थे। कनाडा दूसरे स्थान पर रहा था। वहीं 2014 में भारत कनाडा से पीछे दूसरे स्थान पर रहा था। भारत ने 2010 में 19 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया था। कुश्ती में भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक कार्डिफ में हरियाणा के चरखी दादरी के लीला राम सांगवान ने जीता था। इस बार भारतीय पहलवानों का उद्देश्य पांच से ज्यादा स्वर्ण जीतकर कॉमनवेल्थ में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने का होगा।
आज इन पहलवानों ने पेश की चुनौती
बजरंग पूनिया (65 भारवर्ग), मोहित ग्रेवाल (125 भारवर्ग), दीपक पूनिया (86 भारवर्ग), अंशु मलिक (57 भारवर्ग), साक्षी मलिक (62 भारवर्ग) और दिव्या काकरान (68 भारवर्ग)।
कल ये पहलवान लगाएंगे दांव
रवि कुमार दहिया (57 भारवर्ग), नवीन (74 भारवर्ग), दीपक (97 भारवर्ग), पूजा गहलोत (50 भारवर्ग), विनेश फोगाट (53 भारवर्ग) और पूजा सिहाग (76 भारवर्ग)।
बजरंग पूनिया (65 भारवर्ग), मोहित ग्रेवाल (125 भारवर्ग), दीपक पूनिया (86 भारवर्ग), अंशु मलिक (57 भारवर्ग), साक्षी मलिक (62 भारवर्ग) और दिव्या काकरान (68 भारवर्ग)।
कल ये पहलवान लगाएंगे दांव
रवि कुमार दहिया (57 भारवर्ग), नवीन (74 भारवर्ग), दीपक (97 भारवर्ग), पूजा गहलोत (50 भारवर्ग), विनेश फोगाट (53 भारवर्ग) और पूजा सिहाग (76 भारवर्ग)।