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कौन हैं सुवर्णा राज?: 44 वर्षीय ने एशियन पैरा गेम्स में डिस्कस थ्रो में जीता गोल्ड; 15.66 मीटर दूर फेंका चक्का
Thu, 22 Oct 2026 09:09 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 22 Oct 2026 09:09 AM IST
सार
भारत की 44 वर्षीय पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिला एफ54 डिस्कस थ्रो स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पांचवें प्रयास में 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। ईरान की शाहला हदीदी को रजत और वियतनाम की थी न्गोक थuy गुयेन को कांस्य मिला। सुवर्णा एशिया में इस स्पर्धा की दूसरी रैंक वाली खिलाड़ी हैं।
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सुवर्णा
- फोटो : Twitter
विस्तार
भारत की पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला डिस्कस थ्रो एफ54 स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। गुरुवार को नागोया में 44 वर्षीय सुवर्णा ने अपने पांचवें प्रयास में 15.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। ग्रेटर नोएडा की रहने वाली सुवर्णा ने इस प्रदर्शन के साथ भारत को प्रतियोगिता में एक और स्वर्ण पदक दिलाया।
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सुवर्णा
- फोटो : ANI
पांचवें प्रयास में किया स्वर्णिम प्रदर्शन
सुवर्णा ने छह प्रयासों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और चार बार चक्का 15 मीटर से अधिक दूर फेंका। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास पांचवें नंबर पर आया, जिसने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया। ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थuy गुयेन ने 14.65 मीटर की दूरी के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। सुवर्णा और रजत पदक विजेता के बीच केवल 21 सेंटीमीटर का अंतर रहा।
पिंटू नागर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाली सुवर्णा ने 2017 में पैरा एथलेटिक्स में अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासित अभ्यास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वह तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एफ54 डिस्कस थ्रो में एशिया में दूसरे स्थान पर हैं।
सुवर्णा ने छह प्रयासों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और चार बार चक्का 15 मीटर से अधिक दूर फेंका। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास पांचवें नंबर पर आया, जिसने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया। ईरान की शाहला हदीदी ने 15.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थuy गुयेन ने 14.65 मीटर की दूरी के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। सुवर्णा और रजत पदक विजेता के बीच केवल 21 सेंटीमीटर का अंतर रहा।
पिंटू नागर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाली सुवर्णा ने 2017 में पैरा एथलेटिक्स में अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासित अभ्यास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वह तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और एफ54 डिस्कस थ्रो में एशिया में दूसरे स्थान पर हैं।
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सुवर्णा
- फोटो : Twitter
जानें कौन हैं सुवर्णा राज
सुवर्णा का यह स्वर्ण पदक उनके प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन में एक और उपलब्धि है। उन्होंने 2026 में दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के तहत आयोजित 17वीं फज्जा अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिला एफ54/55 डिस्कस थ्रो स्पर्धा का कांस्य पदक जीता था। इस साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित कैनबरा ट्रैक मीट में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वहां सुवर्णा ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। उन्हें 2015 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
सुवर्णा का यह स्वर्ण पदक उनके प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन में एक और उपलब्धि है। उन्होंने 2026 में दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के तहत आयोजित 17वीं फज्जा अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिला एफ54/55 डिस्कस थ्रो स्पर्धा का कांस्य पदक जीता था। इस साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित कैनबरा ट्रैक मीट में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। वहां सुवर्णा ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। उन्हें 2015 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
सुवर्णा
- फोटो : Twitter
खेल के साथ दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए भी काम
सुवर्णा एक व्हीलचेयर उपयोगकर्ता हैं। खेल के मैदान से बाहर भी सुवर्णा का योगदान उल्लेखनीय है। एथलेटिक्स के अलावा वह सुगम्यता विशेषज्ञ और दिव्यांगजनों के अधिकारों की पैरोकार के रूप में भी काम करती हैं। वह देशभर में 1,000 से अधिक सुगम्यता ऑडिट कर चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की सुगम्य चुनाव पहल के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम किया है। उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जुड़े खर्चों में सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर (एसीटीसी) योजना के तहत सहायता दी जाती है। इसके लिए उन्हें 7,70,607 रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। दिव्यांगजनों के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2015 में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
एफ54 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनके धड़ और निचले अंगों के कार्य में ऐसी सीमाएं होती हैं, जो उनकी शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। खिलाड़ी विशेष थ्रोइंग चेयर पर बैठकर मुकाबला करते हैं और मुख्य रूप से हाथों तथा शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत से चक्का फेंकते हैं। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली सुवर्णा तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2017 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। हाल के दिनों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। जनवरी 2026 में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। इसके बाद दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
सुवर्णा एक व्हीलचेयर उपयोगकर्ता हैं। खेल के मैदान से बाहर भी सुवर्णा का योगदान उल्लेखनीय है। एथलेटिक्स के अलावा वह सुगम्यता विशेषज्ञ और दिव्यांगजनों के अधिकारों की पैरोकार के रूप में भी काम करती हैं। वह देशभर में 1,000 से अधिक सुगम्यता ऑडिट कर चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की सुगम्य चुनाव पहल के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम किया है। उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से जुड़े खर्चों में सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता कैलेंडर (एसीटीसी) योजना के तहत सहायता दी जाती है। इसके लिए उन्हें 7,70,607 रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। दिव्यांगजनों के लिए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2015 में राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
एफ54 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं जिनके धड़ और निचले अंगों के कार्य में ऐसी सीमाएं होती हैं, जो उनकी शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। खिलाड़ी विशेष थ्रोइंग चेयर पर बैठकर मुकाबला करते हैं और मुख्य रूप से हाथों तथा शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत से चक्का फेंकते हैं। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली सुवर्णा तीन एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2017 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। हाल के दिनों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। जनवरी 2026 में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। इसके बाद दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।