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एशियाड: ओलंपिक चैंपियन को हराने का प्रण लेकर एशियन गेम्स में गए थे सुजीत; ऐसा किया भी और सोना भी जीता
सार
भारतीय पहलवान सुजीत 65 किग्रा वर्ग में जापान के ओलंपिक चैंपियन कोतारो कियूका को हराने के इरादे से एशियन गेम्स पहुंचे थे। सोनीपत में उनकी खास तैयारी काम आई और सेमीफाइनल में कियूका को हराया। फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बावजूद डबल लेग अटैक के दम पर सुजीत ने स्वर्ण जीता।
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सुजीत कलकल
- फोटो : IANS
विस्तार
पहलवान सुजीत के निशाने पर 65 किग्रा वर्ग का स्वर्ण था, लेकिन स्वर्ण के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा जापान के ओलंपिक चैंपियन कोतारो कियूका थे। मुकाबले से पहले की शाम कोच कुलदीप ने सुजीत से कहा, अगर वह ओलंपिक चैंपियन है तो तुम भी विश्व चैंपियनशिप के बाद से हारे नहीं हो। तुम कम नहीं हो।
सुजीत का जवाब था, कोच जान लड़ा दूंगा। यह वही जापानी पहलवान है जिसके लिए सुजीत ने सोनीपत में विशेष तैयारियां की थीं। कोतारो का नीचे से सिंगल लेग अटैक बेहद खतरनाक है। उन्होंने इसी से बचाव और उसके काउंटर अटैक का जमकर अभ्यास किया था। सेमीफाइनल में यही उनके काम आया और इसी अटैक के बचाव के बाद काउंटर में मिले 2 अंक ने उन्हें विजेता बनाया। सुजीत कहते हैं, उन्हें विश्वास था वह कोरातो को इस बार हराएंगे।
फाइनल में था वापसी का भरोसा...विनोद-कुलदीप का मानना है कि सुजीत ऐसे पहलवान हैं जो हार नहीं मानते हैं। विनोद कहते हैं, फाइनल में जो स्थिति सुजीत की थी, अगर किसी और की होती तो वह हार मान लेता। सुजीत भी कहते हैं कि वह फाइनल में पिछड़े पर उन्हें अपने डबल लेग अटैक पर विश्वास था कि वापसी कर लेंगे।
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सुजीत का डबल लेग अटैक है खतरनाक
योगेश्वर के फीतले और सुशील के धोबी पटके को सभी जानते हैं, लेकिन इन दोनों दिग्गजों को कोचिंग दे चुके भारतीय टीम के चीफ कोच विनोद कुमार कहते हैं टखने पर डबल लेग अटैक करने वाला उन्होंने सुजीत के रूप में पहला पहलवान देखा। यह दांव उनका खास बन चुका है और इसी ने उन्हें फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बावजूद जीत दिलाई।
विनोद कहते हैं कि विश्व नंबर -2 सुजीत ओलंपिक स्वर्ण जीतने का माद्दा रखता है। ये खास पहलवान है। सुजीत बताते हैं कि उन्हें बचपन में उनके पिता ने सिंगल लेग अटैक सिखाया था, लेकिन उन्होंने इसे से बाद में डबल लेग अटैक में महारत हासिल कर ली।
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सुजीत का जवाब था, कोच जान लड़ा दूंगा। यह वही जापानी पहलवान है जिसके लिए सुजीत ने सोनीपत में विशेष तैयारियां की थीं। कोतारो का नीचे से सिंगल लेग अटैक बेहद खतरनाक है। उन्होंने इसी से बचाव और उसके काउंटर अटैक का जमकर अभ्यास किया था। सेमीफाइनल में यही उनके काम आया और इसी अटैक के बचाव के बाद काउंटर में मिले 2 अंक ने उन्हें विजेता बनाया। सुजीत कहते हैं, उन्हें विश्वास था वह कोरातो को इस बार हराएंगे।
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फाइनल में था वापसी का भरोसा...विनोद-कुलदीप का मानना है कि सुजीत ऐसे पहलवान हैं जो हार नहीं मानते हैं। विनोद कहते हैं, फाइनल में जो स्थिति सुजीत की थी, अगर किसी और की होती तो वह हार मान लेता। सुजीत भी कहते हैं कि वह फाइनल में पिछड़े पर उन्हें अपने डबल लेग अटैक पर विश्वास था कि वापसी कर लेंगे।
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सुजीत का डबल लेग अटैक है खतरनाक
योगेश्वर के फीतले और सुशील के धोबी पटके को सभी जानते हैं, लेकिन इन दोनों दिग्गजों को कोचिंग दे चुके भारतीय टीम के चीफ कोच विनोद कुमार कहते हैं टखने पर डबल लेग अटैक करने वाला उन्होंने सुजीत के रूप में पहला पहलवान देखा। यह दांव उनका खास बन चुका है और इसी ने उन्हें फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बावजूद जीत दिलाई।
विनोद कहते हैं कि विश्व नंबर -2 सुजीत ओलंपिक स्वर्ण जीतने का माद्दा रखता है। ये खास पहलवान है। सुजीत बताते हैं कि उन्हें बचपन में उनके पिता ने सिंगल लेग अटैक सिखाया था, लेकिन उन्होंने इसे से बाद में डबल लेग अटैक में महारत हासिल कर ली।