एशियन गेम्स 2026: सावन बरवाल ने रचा इतिहास, मैराथन में जीता रजत; 44 साल बाद भारत को इस स्पर्धा में मिला पदक
सावन बरवाल ने एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन का रजत पदक जीतकर भारत का 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। उन्होंने 2:11:36 के समय के साथ अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया। जापान के इचिटाका यामाशिता ने स्वर्ण पदक जीता।
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सावन बरवाल ने शनिवार को एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने दो घंटे 11 मिनट 36 सेकंड के समय के साथ रेस पूरी की। इसके साथ ही भारत ने इस स्पर्धा में 44 साल बाद पदक जीता। एशियन गेम्स में मैराथन में यह भारत का कुल चौथा पदक है। बरवाल को उनकी उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बधाई दी है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने दी बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, 'एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने पर सावन बरवाल को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आपके शानदार प्रदर्शन ने चार दशकों के बाद एशियन गेम्स मैराथन पोडियम पर भारत की वापसी को चिह्नित किया है। यह शानदार उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करे।'
खेल मंत्री ने भी की तारीफ
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने एक्स पर बरवाल की जीत का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत के लिए ऐतिहासिक सिल्वर। एशियन गेम्स मैराथन मेडल के लिए भारत का 44 साल का इंतजार खत्म करने पर सावन बरवाल को बधाई। उन्होंने पुरुषों की मैराथन में शानदार 2:11:37 का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पूरे देश को इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बहुत गर्व है।'
इसी साल तोड़ा था 28 साल पुराना रिकॉर्ड
सावन ने इस प्रदर्शन के दौरान अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बेहतर किया। इससे पहले अप्रैल में उन्होंने रॉटरडैम मैराथन में दो घंटे 12 मिनट से कम समय निकालने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 48 साल पुराने शिवनाथ सिंह के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। यह सावन के करियर की सिर्फ दूसरी मैराथन थी। आइची-नागोया में उन्हें जापान के इचिटाका यामाशिता से पीछे रहकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
यामाशिता ने घरेलू दर्शकों के सामने जीता स्वर्ण
29 वर्षीय इचिटाका यामाशिता ने 2:10:51 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। वह एशियन गेम्स की मैराथन में स्वर्ण जीतने वाले जापान के सातवें एथलीट बने। घरेलू धरती पर इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले वह जापान के पहले एथलीट भी हैं यामाशिता ने रेस के दौरान सावन पर बढ़त बनाए रखी। वह जब स्टेडियम में पहुंचे तो घरेलू दर्शकों ने जोरदार समर्थन के साथ उनका स्वागत किया और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
44 साल बाद लौटा मैराथन पदक
भारत ने एशियन गेम्स में पुरुष मैराथन का पहला पदक 1951 में जीता था। छोटा सिंह ने स्वर्ण और सुरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद 1982 में होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने कांस्य जीता। अब 2026 में सावन बरवाल ने रजत जीतकर इस सूची में अपना नाम जोड़ लिया है।
एशियाड में मैराथन में भारत के पदक
| वर्ष | खिलाड़ी | पदक | समय |
|---|---|---|---|
| 1951 | छोटा सिंह | स्वर्ण | 2:42:58.6 |
| 1951 | सुरत सिंह माथुर | कांस्य | 2:53:49.8 |
| 1982 | होसुर कुक्कप्पा सीतारन | कांस्य | 2:25:07 |
| 2026 | सावन बरवाल | रजत | 2:11:36 |