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Squash: छह राष्ट्रीय खिताब जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी राज मनचंदा का निधन, अर्जुन पुरस्कार से थे सम्मानित
Tue, 03 Dec 2024 06:58 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 03 Dec 2024 06:58 PM IST
सार
मनचंदा उस वक्त सुर्खियों में आए जब सेना के लिए कप्तान बने और 33 साल की उम्र में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। 1981 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप के दौरान दिग्गज जहांगीर खान का सामना किया जिनका 1980 के दशक में स्क्वाश में दबदबा था।
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राज मनचंदा
- फोटो : Instagram
विस्तार
भारत के दिग्गज स्क्वाश खिलाड़ी राज मनचंदा का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। छह बार राष्ट्रीय खिताब जीत चुके मनचंदा ने रविवार को आखिरी सांस ली जिसकी जानकारी उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने दी। अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित मनचंदा भारतीय स्क्वाश जगत के सबसे चर्चित चेहरे थे। वह 1977 से 1982 तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे और उन्होंने सेना के लिए अभूतपूर्व 11 खिताब जीते।
इस दौरान मनचंदा ने एशियाई चैंपियनशिप और विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और उन्हें 1983 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मनचंदा उस वक्त सुर्खियों में आए जब सेना के लिए कप्तान बने और 33 साल की उम्र में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। 1981 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप के दौरान दिग्गज जहांगीर खान का सामना किया जिनका 1980 के दशक में स्क्वाश में दबदबा था।
मनचंदा ने कई मौकों पर भारतीय टीम की कमान संभाली जिसमें कराची में 1981 में एशियन टीम चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली टीम की कप्तानी करना भी शामिल है। उनका सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन 1984 में जॉर्डन में हुए एशियन चैंपियनशिप में आया जब वह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि, उस समय उनके नेतृत्व वाली टीम ने कांस्य पदक जीता था।
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इस दौरान मनचंदा ने एशियाई चैंपियनशिप और विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और उन्हें 1983 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मनचंदा उस वक्त सुर्खियों में आए जब सेना के लिए कप्तान बने और 33 साल की उम्र में अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। 1981 में उन्होंने एशियन चैंपियनशिप के दौरान दिग्गज जहांगीर खान का सामना किया जिनका 1980 के दशक में स्क्वाश में दबदबा था।
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मनचंदा ने कई मौकों पर भारतीय टीम की कमान संभाली जिसमें कराची में 1981 में एशियन टीम चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली टीम की कप्तानी करना भी शामिल है। उनका सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन 1984 में जॉर्डन में हुए एशियन चैंपियनशिप में आया जब वह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि, उस समय उनके नेतृत्व वाली टीम ने कांस्य पदक जीता था।
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