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बैड लक को गुड लक में बदलने के आसान उपाय
Updated Tue, 07 Aug 2012 05:30 PM IST
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कहा जाता है कि धरती पर आने वाले सभी व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है। लेकिन ऐसे उपाय अवश्य हैं, जिनके बल पर अनहोनी या असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उसे बदलने की तकनीक पर काम करते हुए चेन्नई के वैदिक इस्टीट्यूट ऑफ स्पिरिचुअलिज्म ने कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जिनके जरिए अपने भाग्य और भविष्य को काफी हद तक बदला सकते है। उन उपायों के बारे में बताते हुए इंस्टीट्यूट के प्रो. सोमदेव शर्मा ने कुछ टिप्स लिखे हैं। उन बिंदुओं में तीन उपाय इस प्रकार हैं।
टिप्स नंबर एक- अभी तक आपका जो भी रुटीन रहा हो उसे भूल जाइए लेकिन कल से ही सूर्योदय से पहले हर हाल में बिस्तर छोड़ कर उठ जाएं। नित्य कर्मों से निपट कर साफ और धुले हुए वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की और मुंह करके बैठें। सुबह उगते हुए सूरज के सिंदूरी रंग को देखें। 15 से 20 मिनट तक सुबह की अरुणिम आभा का ध्यान करें और सुख-समृद्धि के साथ मन में प्रसन्नता का ध्यान करें।
दूसरी टिप्स में कुंडलिनी शक्ति के जागरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। अध्यात्मविदों के अनुसार कुंडलिनी शक्ति शरीर में मेरूदंड में स्थित है। इसे जगाकर साधक का दुर्भाग्य मिटाया जा सकता है। शुरुआती तौर पर इसका अभ्यास कमर सीधी कर बैठने के रूप में किया जाता है। जिन्हें अपने भाग्य भविष्य को बदलना है उन्हें तुरंत इसकी शुरुआत अवश्य कर देनी चाहिये।
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जब भी जहां भी बैठें अपनी रीढ़ को यानी मेरुदंड को हर हाल में सीधा रखे। कमर झुकाकर बैठने से कुंडलिनी शक्ति कुंद होने लगती है, जिससे इंसान दुर्भाग्य से जल्दी प्रभावित हो जता है। इष्ट मंत्र की शक्ति के महत्व से सभी परिचित हैं। यह कामयाबी का तीसरा गुर हैं। इष्ट मंत्र अर्थात इष्टदेवता की आराधना के लिए जपा जाने वाला मंत्र।
अध्यात्मविदों की मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के समय निश्चित समय, निश्वित स्थान पर विशुद्ध आसन पर बैठकर बीस मिनट भी जप करता है उसके जीवन में अपने वाली अशुभ घटनाओं का नाश होने लगता है। पहले दिन से ही उसका सौभाग्य उदय होने लगता है।
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टिप्स नंबर एक- अभी तक आपका जो भी रुटीन रहा हो उसे भूल जाइए लेकिन कल से ही सूर्योदय से पहले हर हाल में बिस्तर छोड़ कर उठ जाएं। नित्य कर्मों से निपट कर साफ और धुले हुए वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की और मुंह करके बैठें। सुबह उगते हुए सूरज के सिंदूरी रंग को देखें। 15 से 20 मिनट तक सुबह की अरुणिम आभा का ध्यान करें और सुख-समृद्धि के साथ मन में प्रसन्नता का ध्यान करें।
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दूसरी टिप्स में कुंडलिनी शक्ति के जागरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। अध्यात्मविदों के अनुसार कुंडलिनी शक्ति शरीर में मेरूदंड में स्थित है। इसे जगाकर साधक का दुर्भाग्य मिटाया जा सकता है। शुरुआती तौर पर इसका अभ्यास कमर सीधी कर बैठने के रूप में किया जाता है। जिन्हें अपने भाग्य भविष्य को बदलना है उन्हें तुरंत इसकी शुरुआत अवश्य कर देनी चाहिये।
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जब भी जहां भी बैठें अपनी रीढ़ को यानी मेरुदंड को हर हाल में सीधा रखे। कमर झुकाकर बैठने से कुंडलिनी शक्ति कुंद होने लगती है, जिससे इंसान दुर्भाग्य से जल्दी प्रभावित हो जता है। इष्ट मंत्र की शक्ति के महत्व से सभी परिचित हैं। यह कामयाबी का तीसरा गुर हैं। इष्ट मंत्र अर्थात इष्टदेवता की आराधना के लिए जपा जाने वाला मंत्र।
अध्यात्मविदों की मान्यता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के समय निश्चित समय, निश्वित स्थान पर विशुद्ध आसन पर बैठकर बीस मिनट भी जप करता है उसके जीवन में अपने वाली अशुभ घटनाओं का नाश होने लगता है। पहले दिन से ही उसका सौभाग्य उदय होने लगता है।