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कष्ट और रोग का सबसे बड़ा कारण है यहः सुधांशु जी महाराज
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 19 Aug 2013 10:48 AM IST
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चिन्ता चिता के समान है। चिता तो मुर्दे को जलाती है, लेकिन चिन्ता जिन्दा इंसान को जलाती है। यह ऐसी दीमक है जो एक बार लग जाए तो व्यक्ति को चाटकर ही छोड़ती है। चिन्ता व्यक्ति की मानसिकता पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है, मन की पवित्राता समाप्त हो जाती है, अपवित्रता आ जाती है।
चिन्ता मनुष्य के शरीर को खा जाती है, शारीरिक रूप से व्यक्ति रोगी हो जाता है, आयु कम हो जाती है, जीवन में अशान्ति आ जाती है, विश्वास में कमी आ जाती है और मौत का भय अन्दर समा जाता है। चिन्ता परमेश्वर से दूर करती है, व्यक्ति को घेरे रहती है। चिन्ता और अधिक चिन्ता की जननी है, इसलिए चिन्ता करके समस्या का समाधन नहीं खोज सकते। चिन्ता का बुरादा सब जगह बिछा है, इसको कहीं छोड़ नहीं सकते।
एक बार एक राजा अपने धन के बारे में पूछ रहे थे कि मेरे कोष में कितना धन है। उनका कोषाध्यक्ष बता रहा था कि महाराज गिनती चल रही है, अभी पूरा पता नहीं चल पा रहा है कि आपके कोष में कितना धन है। इतनी देर में एक ज्योतिषी आ गए, कहने लगे ‘‘राजा साहब मैं आपको आपका भविष्य बताऊं।’’
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राजा ने कहा कि अभी तो यह बताओ कि हमारा धन कितना है? ज्योतिषी ने कहा इसको बताने वाले तो आपके मंत्री हैं, गिन कर बता देंगे। मैं तो यह बताने आया हूं कि आपके पास इतना धन है कि सात पीढि़यां भी बैठकर खाएं तब भी आपका धन चलता जाएगा। राजा उदास हो गया। वह सोचता था कि उसके पास बहुत धन है। जब सात पीढि़यों तक ही धन है तो आठवीं पीढ़ी का क्या होगा?
राजा बड़ा दुःखी हुआ कि सात पीढ़ी के बाद तो वह कंगाल हो जाएगा। किसी का धन दस साल, किसी का तीस साल चलता है, उसके बाद वे गरीब हो जाते हैं, इसी तरह सात पीढ़ी के बाद वह कंगाल हो जाएगा, उससे ज्यादा गरीब कौन होगा? राजा यही सोच-सोचकर दुःखी रहने लगा।
सच यह है चिंता ही दुःख का कारण है। अपने जीवन का सुःख दुःख भगवान पर छोड़ दीजिए वह आपको कभी दुःखी नहीं होने देगा, बस उस पर विश्वास रखिए और चिंता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दीजिए।
साभारः विश्व जागृति मिशन
श्री सुंधाशु जी महाराज जीवन परिचय
सुधांशु जी महाराज का जन्म 2 मई 1955 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ। इन्होंने गायत्री मंत्र द्वारा अज्ञानता दूर करने की विधि को जाना। बाल्यावस्था में ही इन्होंने मंत्र और श्लोकों का अच्छा ज्ञान अर्जित कर लिया था। 24 मार्च 1991 को रामनवमी के दिन इन्होंने दिल्ली में विश्व जागृति मिशन की स्थापना की।
देश-विदेश में इसकी कुल 80 शाखाएं हैं। इस मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज भारत ही नहीं विदेशों में भी अध्यात्म और जनकल्याण का संदेश प्रचारित कर रहे हैं। इनका मिशन निर्धनों और कमज़ोर व्यक्तियों की सहायता करता है।
दिल्ली स्थित इनके आनन्दधम आश्रम में अस्पताल मौजूद हैं जहां गरीब व्यक्तियों को मुफ्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जाती है। अन्य आश्रमों में भी बुजुर्गों एवं गरीबों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है। समय-समय पर विश्व जागृति मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज देश-दुनिया में पीड़ित लोगों की सेवाओं में भी योगदान देते हैं।
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चिन्ता मनुष्य के शरीर को खा जाती है, शारीरिक रूप से व्यक्ति रोगी हो जाता है, आयु कम हो जाती है, जीवन में अशान्ति आ जाती है, विश्वास में कमी आ जाती है और मौत का भय अन्दर समा जाता है। चिन्ता परमेश्वर से दूर करती है, व्यक्ति को घेरे रहती है। चिन्ता और अधिक चिन्ता की जननी है, इसलिए चिन्ता करके समस्या का समाधन नहीं खोज सकते। चिन्ता का बुरादा सब जगह बिछा है, इसको कहीं छोड़ नहीं सकते।
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एक बार एक राजा अपने धन के बारे में पूछ रहे थे कि मेरे कोष में कितना धन है। उनका कोषाध्यक्ष बता रहा था कि महाराज गिनती चल रही है, अभी पूरा पता नहीं चल पा रहा है कि आपके कोष में कितना धन है। इतनी देर में एक ज्योतिषी आ गए, कहने लगे ‘‘राजा साहब मैं आपको आपका भविष्य बताऊं।’’
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राजा ने कहा कि अभी तो यह बताओ कि हमारा धन कितना है? ज्योतिषी ने कहा इसको बताने वाले तो आपके मंत्री हैं, गिन कर बता देंगे। मैं तो यह बताने आया हूं कि आपके पास इतना धन है कि सात पीढि़यां भी बैठकर खाएं तब भी आपका धन चलता जाएगा। राजा उदास हो गया। वह सोचता था कि उसके पास बहुत धन है। जब सात पीढि़यों तक ही धन है तो आठवीं पीढ़ी का क्या होगा?
राजा बड़ा दुःखी हुआ कि सात पीढ़ी के बाद तो वह कंगाल हो जाएगा। किसी का धन दस साल, किसी का तीस साल चलता है, उसके बाद वे गरीब हो जाते हैं, इसी तरह सात पीढ़ी के बाद वह कंगाल हो जाएगा, उससे ज्यादा गरीब कौन होगा? राजा यही सोच-सोचकर दुःखी रहने लगा।
सच यह है चिंता ही दुःख का कारण है। अपने जीवन का सुःख दुःख भगवान पर छोड़ दीजिए वह आपको कभी दुःखी नहीं होने देगा, बस उस पर विश्वास रखिए और चिंता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दीजिए।
साभारः विश्व जागृति मिशन
श्री सुंधाशु जी महाराज जीवन परिचय
सुधांशु जी महाराज का जन्म 2 मई 1955 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ। इन्होंने गायत्री मंत्र द्वारा अज्ञानता दूर करने की विधि को जाना। बाल्यावस्था में ही इन्होंने मंत्र और श्लोकों का अच्छा ज्ञान अर्जित कर लिया था। 24 मार्च 1991 को रामनवमी के दिन इन्होंने दिल्ली में विश्व जागृति मिशन की स्थापना की।
देश-विदेश में इसकी कुल 80 शाखाएं हैं। इस मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज भारत ही नहीं विदेशों में भी अध्यात्म और जनकल्याण का संदेश प्रचारित कर रहे हैं। इनका मिशन निर्धनों और कमज़ोर व्यक्तियों की सहायता करता है।
दिल्ली स्थित इनके आनन्दधम आश्रम में अस्पताल मौजूद हैं जहां गरीब व्यक्तियों को मुफ्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जाती है। अन्य आश्रमों में भी बुजुर्गों एवं गरीबों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है। समय-समय पर विश्व जागृति मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज देश-दुनिया में पीड़ित लोगों की सेवाओं में भी योगदान देते हैं।