{"_id":"c8425e7b5cc8659956cd9f6f9967ba4f","slug":"sudhanshu-ji-maharaj-pravachan-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस तरह एक दिन में पूरी जिंदगी की झलक देख सकते हैं","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
इस तरह एक दिन में पूरी जिंदगी की झलक देख सकते हैं
सुधांशु जी महाराज/अध्यात्मिक गुरु
Updated Mon, 10 Feb 2014 04:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर हम जीवन को सौ वर्ष का भी मानें तो इसमें से पच्चीस वर्ष तो बचपन के, बारह से पन्द्रह वर्ष बीमारी में, दुःख में, पीड़ा में बीत जाते हैं। वैसे बचपन का समय जितना कीमती होता है, उसकी कोई सीमा नहीं होती।
विज्ञापन
इसका एक सबसे बड़ा कारण यह है कि युवा भविष्य के सपने देखता है और वृद्घ अतीत में जीता है। बचपन ही एक ऐसा अवसर है जब व्यक्ति वर्तमान में रहता है, इसीलिए प्रसन्न भी रहता है, आनन्दित रहता है, खिलखिलाता रहता है, मुस्कराता रहता है। खुद भी हंसता है और दूसरों को भी हंसाता है, खुशी देता है।
विज्ञापन
लेकिन सारी उम्र बचपन तो रह नहीं सकता, लेकिन बचपन वाला मन जरुर रह सकता है। हर दिन की सुबह बचपन जैसी सुहावनी होती है, दोपहर आते-आते व्यक्ति बदलता जाता है, उसे कुछ खुमारी सी आती है, फिर दिन ढलता है।
विज्ञापन
आदमी भी थकावट महसूस करने लगता है, शाम होती है, फिर रात में आदमी शयन में चला जाता है। इस तरह से हर दिन में एक पूरी जिंदगी की झलक आप देख सकते हैं।