बड़ा होने की कला सीखें बांस के वृक्ष से
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नीतिशास्त्र कहता है कि जो असर प्यार में है वह मार में नहीं, जो जादू झुकने में है वह अकड़ने में नहीं। आपने बांस के वृक्ष को देखा होगा, बांस की जड़ से जब कोंपल निकलता हैं तब वह सीधा अकड़कर खड़ा होता है। यह अकड़न बांस की छोटेपन का प्रतीक है। लेकिन जैसे-जैसे बांस बड़ा होता जाता है वह नम्र होता जाता है, उसमें लचीलापन आता जाता है। एक समय ऐसा भी आता है जब बांस झुककर पृथ्वी को चूमने लगता है। इस समय अगर आप बांस की लंबाई को नापेंगे तो बड़े-बड़े वृक्ष इसके आगे बौने नज़र आएंगे। अन्य वृक्ष बांस के आगे इसलिए बौने हो जाते हैं क्योंकि, उन्होंने झुकने का महत्व नहीं जाना और अकड़कर खड़े रहे।
बांस का बड़ा होकर झुकना एक सामान्य घटना नहीं है। यह मनुष्य के लिए प्रकृति का एक ज्ञान है। प्रकृति कहती है बड़प्पन झुकने में हैं। पद, प्रतिष्ठा और सम्मान मिलने के बाद अहंकार करके दूसरों पर अपना प्रभाव दिखाना नीचता का प्रतीक है। यह उसी प्रकार है, जैसे एक बरसाती नदी बरसात की कुछ बूंदों से उफनने लगती है और थोड़ी देर बाद जिसका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इसके प्रति न तो लोगों में सम्मान रहता है और न आदर। बड़ा होने का तात्पर्य है गंभीर होना।
जो पद, प्रतिष्ठा और सम्मान मिलने के बाद गंभीर होते जाते हैं वह गंगा, यमुना की तरह आदरणीय होते हैं। लोग इन्हें मुख से नहीं बल्कि हृदय से आदर देते हैं। अहंकारी व्यक्ति जब तक जीवित रहता है तब तक वास्तविक सम्मान नहीं प्राप्त कर पाता है। मृत्यु के बाद ऐसे व्यक्ति की आत्मा को चैन नहीं मिलता है क्योंकि लोग इनकी निंदा करते हैं। इनकी आत्मा अपने कर्मों को याद करके दुःखी होती रहती है।
पुराणों में कई कथाओं का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि देवताओं के राजा होते हुए भी इन्द्र को अपमानित होना पड़ा। असुरों ने इन्हें पराजित करके स्वर्ग से निकाल दिया। ऋषि मुनियों ने इन्हें भला बुरा कहा। ऐसे समय में ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की कृपा से इन्हें पुनः स्वर्ग की प्राप्ति हुई और फिर से सम्मान प्राप्त कर सके।
इन्द्र की इस स्थिति का कारण हमेशा ही यह रहा कि उन्होंने पद-प्रतिष्ठा और शक्ति के अहंकार में मर्यादा का उल्लंघन किया। इसलिए देवराज होते हुए भी बार-बार अपमानित हुए। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने कभी अपनी शक्ति और पद का दुरूपयोग नहीं किया यही कारण है कि यह देवताओं के राजा नहीं होने के बाद भी सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। शास्त्र हमें यही समझाता है कि आप बड़े हैं यह दिखाने के लिए क्रोध और अहंकार का त्याग करें, शालीनता और नम्रता अपने व्यक्तित्व में शामिल करें। जब हम अपने से छोटे के प्रति बुरा वर्ताव करते हैं तब बड़े होकर भी हम छोटे हो जाते हैं।