फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   asaram bapu pravachan on problem

समस्याओं से ही उन्नति का रास्ता निकलता हैः आशाराम बापू

Sat, 03 Aug 2013 12:16 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 03 Aug 2013 12:16 PM IST
विज्ञापन
asaram bapu pravachan on problem

ज्ञान का और जीवन का नजरिया ऊँचा होने से आदमी सभी समस्याओं को पैरों तले कुचलते हुए ऊपर उठ जाता है। दुनिया में ऐसी कोई समस्या या मुसीबत नहीं है जो आपके विकास का साधन न बने। कोई भी समस्या, मुसीबत आपके विकास का साधन है यह पक्का कर लो।

विज्ञापन


जिसके जीवन में मुसीबत, समस्या नहीं आती उसका विकास असंभव है लेकिन जब डर जाते हो और गलत निर्णय लेते हो तो समस्या आपको दबाती है। समस्या का समाधान तथा उसका सदुपयोग करके आप आगे बढ़ो और सुख, सफलता आये तो उसे ‘बहुजनहिताय’ बाँटकर, उसकी आसक्ति और भोग से बचकर आप औदार्य सुख लो।
विज्ञापन


समस्याएं बाहर से विष की तरह तकलीफ देनेवाली दिखती हैं लेकिन जो भी तकलीफें हैं वे भीतर से अपने में विकास का अमृत संजोये हुए हैं। ऐसा कोई संत-महापुरुष अथवा सुप्रसिद्ध व्यक्ति नहीं हुआ, जिसके जीवन में समस्याएं और विरोध न हुआ हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


भगवान राम के जीवन में देखो, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में देखो तो समस्याओं की लम्बी कतार...! श्रीकृष्ण का जन्म होने के पहले ही उनके मां-पिता को कारागृह में जाना पड़ा। श्रीकृष्ण के जन्मते ही वे पराये घर ले जाये गये। कितनी भारी समस्या है! फिर छठे दिन पूतना जहर लेकर आयी। कुछ दिन बीते तो शकटासुर, धेनुकासुर, अघासुर, बकासुर मारने आ गये थे। 17 साल तक समस्याओं से जूझते-जूझते श्रीकृष्ण कितने मजबूत हो गये!

ऐसे ही रामजी के जीवन में 14 वर्ष का वनवास आदि कई समस्याएं आयीं। समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए, भागना नहीं चाहिए और अपने को कोसना नहीं चाहिए कि ‘मैं बड़ा अभागा हूं।’ दुःख और समस्याएं आती हैं आसक्ति और लापरवाही मिटाने के लिए।

आपकी लापरवाही के कारण असफलता आयी है तो आप लापरवाही मिटाओ। आसक्ति के कारण या खान-पान के कारण अगर बीमारी की समस्या आयी तो वह आपके खान-पान में लापरवाही की परिचायक है। बीमारी की समस्या तब आती है जब आप स्वाद-लोलुपता में पड़कर चटोरापन करते हो अथवा रात को देर से खाते हो, अधिक खाते हो या कोई ऐसी विरुद्ध खुराक ले लेते हो जो आपको पचती नहीं, शरीर को अनुकूल नहीं पड़ती।

ऐसे ही विफलता की समस्या तब आती है जब आप अपने उद्देश्य, अपनी योग्यता और अपनी शक्ति का विचार किये बिना कोई काम करते हो। अपनी रुचि, अपनी योग्यता और अपना साधन समझकर उद्देश्य की पूर्ति का निर्णय करना चाहिए, फिर उसमें लग जाना चाहिए।
साभारः ‘ऋषि प्रसाद’ विभाग, संत श्री आसारामजी आश्रम

संत श्री आशारामजी बापू परिचय

संत श्री आशारामजी बापूजी न केवल भारत को अपितु सम्पूर्ण विश्व को अपनी अमृतमयी वाणी से तृप्त कर रहे हैं। संत श्री आसारामजी बापू का जन्म सिंध प्रान्त के नवाबशाह ज़िले में बेराणी गाँव में नगर सेठ श्री थाऊमलजी सिरुमलानी के घर 17 अप्रैल 1941 को हुआ। देश-विदेश में इनके 410 से भी अधिक आश्रम व 1400 से भी अधिक श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ लोक-कल्याण के सेवाकार्यों में संलग्न हैं।


गरीब-पिछड़ों के लिए ‘भजन करो, भोजन करो, रोजी पाओ’ जैसी योजनाएं, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, गौशालाएं, निःशुल्क सत्साहित्य वितरण, नशामुक्ति अभियान आदि सत्प्रवृत्तियां भी आश्रम व समितियों द्वारा चलायी जाती है। आशा राम बापू जी भक्तियोग, कर्मयोग व ज्ञानयोग की शिक्षा से सभी को स्वधर्म में रहते हुए सर्वांगीण विकास की कला सिखाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed