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Lord Ganesha: गणेशजी को दूर्वा क्यों प्रिय है ? जानिए पौराणिक रहस्य और मान्यताएं

Wed, 08 Jan 2025 11:55 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 08 Jan 2025 11:55 AM IST
सार

गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजन में भगवान गणेशजी को दूर्वा अर्पित करने से वे बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बिना दूर्वा के इनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

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Why Durva Grass Is Offered To Lord Ganesha Know Importance And Story In Hindi
दूर्वा को गणेश पूजन में अनिवार्य माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Why Durva Grass Is Offered To Lord Ganesha: मान्यता है कि बुधवार के दिन श्रद्धापूर्वक गणेशजी के निमित्त व्रत और पूजा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजन में भगवान गणेशजी को दूर्वा अर्पित करने से वे बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बिना दूर्वा के इनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

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पौराणिक कथा: दूर्वा का दिव्य प्रभाव
शास्त्रों में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार अनलासुर नामक राक्षस ने देवताओं और ऋषि-मुनियों को आतंकित करना शुरू कर दिया। उसके अत्याचार से पूरी सृष्टि भयभीत हो गई। देवताओं ने भगवान गणेश से इस समस्या का समाधान करने की प्रार्थना की। भगवान गणेश ने अनलासुर का संहार करने के लिए उसे अपने पेट में निगल लिया। लेकिन अनलासुर के शरीर से उत्पन्न प्रचंड गर्मी के कारण भगवान गणेश को असहनीय कष्ट हुआ। इस पीड़ा को शांत करने के लिए ऋषि-मुनियों ने दूर्वा घास का उपयोग किया। उन्होंने दूर्वा का लेप भगवान गणेश के शरीर पर लगाया और उनकी पीड़ा तुरंत समाप्त हो गई। इससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने वरदान दिया कि दूर्वा घास उन्हें अर्पित करने वाले भक्तों की समस्त बाधाएं दूर होंगी और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। तब से दूर्वा को गणेश पूजन में अनिवार्य माना जाता है।
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शास्त्रों की मान्यता
धार्मिक ग्रंथों में दूर्वा का उल्लेख गणेश पूजन में अत्यधिक फलदायक सामग्री के रूप में हुआ है। स्कंद पुराण और गणेश पुराण में दूर्वा को गणेश जी की प्रिय वस्तु बताया गया है। इसे भगवान गणेश की शीतल, शांत और मंगलकारी छवि का प्रतीक माना जाता है।
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त्रिदेव का प्रतीक: दूर्वा की तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। इसे भगवान गणेश को अर्पित करने से त्रिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है।

विघ्नों का नाश: दूर्वा में अद्भुत ऊर्जा है जो नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं को नष्ट करती है।

पूजन की शुद्धता: दूर्वा का उपयोग गणेश पूजन को पूर्णता और शुद्धता प्रदान करता है।

अर्पण की विधि
गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने का विशेष विधान है। इसे 21 गांठों में समर्पित किया जाता है, जो उनकी 21 शक्तियों का प्रतीक है। दूर्वा को सिर पर अर्पित करने से भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं। बुधवार,गणेश चतुर्थी आदि जैसे शुभ अवसरों पर दूर्वा चढ़ाने का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। दूर्वा अर्पित करने से विघ्नों का नाश होता है, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह परंपरा हमें यह सिखाती है कि भगवान गणेश की कृपा से हर संकट का समाधान संभव है। इसलिए, जब भी गणेश पूजन करें, दूर्वा अर्पित करना न भूलें, क्योंकि यह भगवान गणेश को प्रसन्न करने का सरल और प्रभावी उपाय है।

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