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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा: इस कथा के पाठ से मिलती है पापों से मुक्ति, जानें पूरी कहानी

Wed, 21 Oct 2026 01:22 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 21 Oct 2026 01:22 PM IST
सार

 एकादशी की पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की प्रचलित पौराणिक कथा।

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Papankusha Ekadashi vrat katha significance in hindi
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - फोटो : AI

हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति पाने तथा भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से दस पीढ़ियों तक के पूर्वजों का उद्धार हो सकता है। एकादशी की पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की प्रचलित पौराणिक कथा।

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Papankusha Ekadashi vrat katha significance in hindi
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा जताई। उन्होंने भगवान से इस व्रत की पूजा विधि और धार्मिक महिमा बताने का अनुरोध किया। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इस एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि नियमपूर्वक इसका व्रत करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इससे जुड़ी कथा सुनाई।
 

Papankusha Ekadashi vrat katha significance in hindi
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock

प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। उसका स्वभाव अत्यंत क्रूर था और वह धर्म-कर्म में विश्वास नहीं रखता था। वह अपने जीवन में लगातार जीवों की हत्या करता और दूसरों को कष्ट पहुंचाता था। उसके मन में दया और करुणा का भाव नहीं था। इस तरह पापपूर्ण जीवन बिताते हुए धीरे-धीरे उसकी आयु समाप्त होने लगी और मृत्यु का समय निकट आ गया।

एक दिन यमराज के दूत उसके पास पहुंचे। उन्होंने क्रोधन को बताया कि अगले दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी और वे उसकी आत्मा को यमलोक ले जाने आएंगे। यह सुनकर बहेलिया भयभीत हो उठा। उसे अपने जीवन में किए गए बुरे कर्मों का एहसास होने लगा। जब उसे मालूम हुआ कि पाप करने वाले लोगों को मृत्यु के बाद नरक में अनेक प्रकार की यातनाएं सहनी पड़ सकती हैं, तो वह उनसे बचने का उपाय खोजने लगा।
 

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe stock

इसी उद्देश्य से क्रोधन अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुंचा। वहां उसने ऋषि को प्रणाम किया और अपने जीवन में किए गए पापों के बारे में बताया। उसने विनती की कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर वह अपने गलत कर्मों से छुटकारा पाना चाहता है। उसने ऋषि से ऐसा उपाय बताने का आग्रह किया, जिससे उसे पापों से मुक्ति मिले और मोक्ष प्राप्त हो सके।

क्रोधन की बात सुनकर अंगिरा ऋषि ने उसे आश्विन शुक्ल एकादशी के दिन पापांकुशा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने बताया कि इस दिन श्रद्धा के साथ उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने और रात्रि में जागरण करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति हो सकती है। इससे उसके पापों का प्रायश्चित होगा और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा।
 

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Papankusha Ekadashi vrat katha significance in hindi
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा - फोटो : adobe

ऋषि की बात मानकर क्रोधन प्रसन्न हुआ और उन्हें प्रणाम करके अपने घर लौट गया। एकादशी तिथि आने पर उसने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा, भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की और रातभर जागरण किया। अगले दिन पारण करके उसने अपना व्रत पूरा किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा से उसके पापों का अंत हुआ और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।

इस कथा के अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर व्रत रखने के साथ जरूरतमंदों को अन्न, जल, छाता और तिल का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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