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Utpanna ekadashi 2021: 30 नवंबर को है उत्पन्ना एकादशी, व्रत करने से पहले इन नियमों को जानना है आवश्यक

Thu, 18 Nov 2021 07:11 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Thu, 18 Nov 2021 07:11 AM IST
सार

इस बार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी का व्रत 30 नवंबर 2021 दिन मंगलवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत करने से पहले इसके नियमों को जानना बेहद आवश्यक होता है, तभी आपको पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं एकादशी व्रत के नियम।

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utpanna ekadashi 2021 on November 30 ekadashi niyam know the rules of ekadashi vrat
उत्पन्ना एकादशी 2021 व्रत नियम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

विस्तार

सनातन धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो मनुष्य प्रत्येक एकादशी का व्रत नियम और श्रद्धा के साथ करता है, उसे इस संसार में सुखों की प्राप्ति होती है और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। एकादशी के समान पापनाशक अन्य कोई व्रत नहीं है। जो लोग एकादशी व्रत करके रात्रि जागरण कर श्री हरि विष्णु का स्मरण करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। कलयुग के समय में जगतपालनकर्ता श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए एकादशी व्रत श्रेष्ठ माना गया है। प्रत्येक माह में दो एकादशी तिथि आती हैं। इस प्रकार से एक वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती हैं। अधिकमास या मल मास पड़ने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इस बार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी का व्रत 30 नवंबर 2021 दिन मंगलवार को किया जाएगा। एकादशी व्रत करने से पहले इसके नियमों को जानना बेहद आवश्यक होता है, तभी आपको पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं एकादशी व्रत के नियम।

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एकादशी व्रत में इन नियमों का जरूर रखें ध्यान-

  • एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से आरंभ हो जाते हैं, इसलिए इस दिन भी किसी प्रकार से तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
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  • जो लोग एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए ताकि अगले दिन आपके पेट में अन्न का अंश न रहे।
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  • एकादशी तिथि को किसी भी प्रकार से अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, उन्हें भी इस दिन खासतौर पर चावलों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • एकादशी तिथि को पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि जागरण करते हुए श्री हरि विष्णु का स्मरण करना चाहिए।
  • एकादशी व्रत को कभी हरिवासर समाप्त होने से पहले पारण नहीं करना चाहिए।
  • इसी तरह से द्वादशी समाप्त होने से पहले ही एकादशी व्रत का पारण कर लेना चाहिए।
  • द्वादशी समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करना पाप के समान माना जाता है।
  • यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो तो इस स्थिति में सूर्योदय को बाद व्रत का पारण किया जा सकता है।
  • द्वादशी तिथि पर प्रातः पूजन व ब्राह्मण को भोजन करवाने के पश्चात ही व्रत का पारण करना चाहिए।


 

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