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इन मंदिर और गुफाओं में है महाप्रलय का रहस्य
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Thu, 20 Dec 2012 03:01 PM IST
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21 दिसम्बर 2012 को दुनिया खत्म
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हो जाएगी, इस बात पर विश्वास करें तो हमारे पास बस आज का दिन है। लेकिन वैज्ञानिकों
एवं पुराणों के कथन को मानें तो दुनिया खत्म होने में अभी करोड़ों वर्ष बचे हुए
हैं। लेकिन प्रलय की बात को वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं और वेद-पुराण भी।
भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि जो जन्मा है उसकी मृत्यु भी निश्चत है। इस तरह सूर्य और पृथ्वी का अंत भी तय माना जा रहा है। लेकिन अभी हमें घबराने की जरूरत नहीं है। भारत के कुछ मंदिर और गुफाएं ऐसी हैं जहां अद्भुत घटनाएं हो रही हैं। इन घटनओं को प्रलय का काउंट डाउन माना जा रहा है।
पाताल भुवनेश्वर गुफा
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में गंगोलीहाट कस्बे में बसा है पाताल भुवनेश्वर गुफा। स्कंद पुराण में इस गुफा के विषय में कहा गया है कि इसमें भगवान शिव का निवास है। सभी देवी-देवता इस गुफा में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। गुफा के संकरे रास्ते से जमीन के अंदर आठ से दस फीट अंदर जाने पर गुफा की दीवारों पर शेषनाग सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकृति नज़र आती है। मान्यता है कि पाण्डवों ने इस गुफा के पास तपस्या की थी। बाद में आदि शंकराचार्य ने इस गफा की खोज की।
इस गुफा में चार खंभा है जो चार युगों अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों में कोई परिवर्तन नही होता। जबकि कलियुग का खंभा लम्बाई में अधिक है और इसके ऊपर छत से एक पिंड नीचे लटक रहा है। यहां के पुजारी का कहना है कि 7 करोड़ वर्षों में यह पिंड 1 ईंच बढ़ता है। मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड कलियुग के खंभे से मिल जाएगा उस दिन कलियुग समाप्त होगा और महाप्रलय आ जाएगा।
गुजरात का मृदेश्वर महादेव
गुजरात के गोधरा में स्थित मृदेश्वर महादेव के बढ़ते शिवलिंग के आकार को भी प्रलय का संकेत माना जाता है। इस शिव लिंग के विषय में मान्यता है कि जिस दिन लिंग का आकार साढ़े आठ फुट का हो जाएगा उस दिन यह मंदिर की छत को छू लेगा। जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन महाप्रलय आ जाएगा। शिवलिंग को मंदिर की छत छूने में लाखों वर्ष लग सकते हैं क्योंकि शिवलिंग का आकार एक वर्ष में एक चावल के दाने के बराबर बढ़ता है।
मृदेश्वर शिवलिंग की विशेषता है कि इसमें से स्वतः ही जल की धारा निकलती रहती है जो शिवलिंग का अभिषेक कर रही है। इस जल धारा में गर्मी एवं सूखे का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, धारा अविरल बहती रहती है।
भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि जो जन्मा है उसकी मृत्यु भी निश्चत है। इस तरह सूर्य और पृथ्वी का अंत भी तय माना जा रहा है। लेकिन अभी हमें घबराने की जरूरत नहीं है। भारत के कुछ मंदिर और गुफाएं ऐसी हैं जहां अद्भुत घटनाएं हो रही हैं। इन घटनओं को प्रलय का काउंट डाउन माना जा रहा है।
पाताल भुवनेश्वर गुफा
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में गंगोलीहाट कस्बे में बसा है पाताल भुवनेश्वर गुफा। स्कंद पुराण में इस गुफा के विषय में कहा गया है कि इसमें भगवान शिव का निवास है। सभी देवी-देवता इस गुफा में आकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। गुफा के संकरे रास्ते से जमीन के अंदर आठ से दस फीट अंदर जाने पर गुफा की दीवारों पर शेषनाग सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकृति नज़र आती है। मान्यता है कि पाण्डवों ने इस गुफा के पास तपस्या की थी। बाद में आदि शंकराचार्य ने इस गफा की खोज की।
इस गुफा में चार खंभा है जो चार युगों अर्थात सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों में कोई परिवर्तन नही होता। जबकि कलियुग का खंभा लम्बाई में अधिक है और इसके ऊपर छत से एक पिंड नीचे लटक रहा है। यहां के पुजारी का कहना है कि 7 करोड़ वर्षों में यह पिंड 1 ईंच बढ़ता है। मान्यता है कि जिस दिन यह पिंड कलियुग के खंभे से मिल जाएगा उस दिन कलियुग समाप्त होगा और महाप्रलय आ जाएगा।
गुजरात का मृदेश्वर महादेव
गुजरात के गोधरा में स्थित मृदेश्वर महादेव के बढ़ते शिवलिंग के आकार को भी प्रलय का संकेत माना जाता है। इस शिव लिंग के विषय में मान्यता है कि जिस दिन लिंग का आकार साढ़े आठ फुट का हो जाएगा उस दिन यह मंदिर की छत को छू लेगा। जिस दिन ऐसा होगा उसी दिन महाप्रलय आ जाएगा। शिवलिंग को मंदिर की छत छूने में लाखों वर्ष लग सकते हैं क्योंकि शिवलिंग का आकार एक वर्ष में एक चावल के दाने के बराबर बढ़ता है।
मृदेश्वर शिवलिंग की विशेषता है कि इसमें से स्वतः ही जल की धारा निकलती रहती है जो शिवलिंग का अभिषेक कर रही है। इस जल धारा में गर्मी एवं सूखे का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, धारा अविरल बहती रहती है।