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सूर्य रथ सप्तमी पर करें 5 उपाय, सूर्य के समान चमकेगा भाग्य, मनोकामनाएं होंगी पूरी
Fri, 16 Feb 2024 12:28 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 16 Feb 2024 12:28 AM IST
सार
हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 15 फरवरी सुबह 10 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन अगले दिन 16 फरवरी शुक्रवार सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के रथ सप्तमी शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से धन-धान्य में वृद्धि और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
विस्तार
सनातन धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी मनाई जाती है। ये दिन विशेष रूप से भगवान सूर्य की उपासना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से धन-धान्य में वृद्धि और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ उपाय बताए गए हैं, जिन्हें इस दिन करने से व्यक्ति का भाग्य सूर्य की तरह चमकता है।
कब है रथ सप्तमी ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 15 फरवरी सुबह 10 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन अगले दिन 16 फरवरी शुक्रवार सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के रथ सप्तमी शुक्रवार को मनाई जाएगी।
सूर्य नारायण को अर्घ्य
सप्तमी तिथि सूर्यदेव को अतिप्रिय है। इस दिन प्रातःकाल नहाकर उगते हुए सूर्य को जल देने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल चन्दन, चावल,लाल फूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए।
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
वाल्मीकि रामायण के अनुसार “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान् श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था। विशेष रूप से इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है। इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है। इस स्तोत्र में सूर्य देव की निष्ठापूर्वक उपासना करते हुए उनसे विजयी मार्ग पर ले जाने का अनुरोध है। आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों , कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, उर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है।
सूर्यदेव के निमित्त व्रत
शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान के निमित्त व्रत करने से हर तरह की शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में लिखा है कि सूर्य का व्रत करने से काया निरोगी तो होती ही है, साथ ही अशुभ फल भी शुभ फल में बदल जाते है। अगर इस दिन व्रत कथा सुनी जाए तो इससे मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही मान-सम्मान, धन-यश और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है। व्रत में नमक का उपयोग न करें।
दान करें
इस दिन सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इससे कुंडली में सूर्य के दोष दूर हो जाते हैं एवं धन,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य गायत्री मंत्र का जप करें
1.ऊँ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीमहितन्न: सूर्य प्रचोदयात्।
2.ऊँ सप्ततुरंगाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि तन्नो रवि: प्रचोदयात्।
सूर्य गायत्री मंत्र के जाप करने से आत्मशुद्धि, आत्म-सम्मान, मन की शांति मिलती है। व्यक्ति पर आने वाले संकट टल जाते हैं।
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कब है रथ सप्तमी ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 15 फरवरी सुबह 10 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन अगले दिन 16 फरवरी शुक्रवार सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। उदयातिथि की मान्यता के रथ सप्तमी शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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सूर्य नारायण को अर्घ्य
सप्तमी तिथि सूर्यदेव को अतिप्रिय है। इस दिन प्रातःकाल नहाकर उगते हुए सूर्य को जल देने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल चन्दन, चावल,लाल फूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए।
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
वाल्मीकि रामायण के अनुसार “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान् श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था। विशेष रूप से इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है। इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है। इस स्तोत्र में सूर्य देव की निष्ठापूर्वक उपासना करते हुए उनसे विजयी मार्ग पर ले जाने का अनुरोध है। आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों , कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, उर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है।
सूर्यदेव के निमित्त व्रत
शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान के निमित्त व्रत करने से हर तरह की शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में लिखा है कि सूर्य का व्रत करने से काया निरोगी तो होती ही है, साथ ही अशुभ फल भी शुभ फल में बदल जाते है। अगर इस दिन व्रत कथा सुनी जाए तो इससे मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही मान-सम्मान, धन-यश और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है। व्रत में नमक का उपयोग न करें।
दान करें
इस दिन सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इससे कुंडली में सूर्य के दोष दूर हो जाते हैं एवं धन,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
सूर्य गायत्री मंत्र का जप करें
1.ऊँ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीमहितन्न: सूर्य प्रचोदयात्।
2.ऊँ सप्ततुरंगाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि तन्नो रवि: प्रचोदयात्।
सूर्य गायत्री मंत्र के जाप करने से आत्मशुद्धि, आत्म-सम्मान, मन की शांति मिलती है। व्यक्ति पर आने वाले संकट टल जाते हैं।