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इनकी मदद के लिए गुरु तेग बहादुर ने दिया था अपने प्राणों का बलिदान

Fri, 24 Nov 2017 10:16 AM IST
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला
amarujala.com- Presented By: विनोद शुक्ला Updated Fri, 24 Nov 2017 10:16 AM IST
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story of guru Teg Bahadur sacrifice for the eternal values of religion

सिखों के नवें गुरु, गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस 24 नवंबर को मनाया जाएगा। विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों,आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय रहा है। प्रेम, त्याग और बलिदान के प्रतीक गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। गुरु तेग बहादुर का जन्म अमृतसर में गुरु हरगोबिन्द साहिब जी के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम त्यागमल था।

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गुरु तेग बहादुर जी को धर्म और आदर्शों के लिए शहीद होने वाले महापुरुषों में गिना जाता है। गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों का मदद के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी क्योंकि गुरुजी ने इस्लाम धर्म को मानने से इंकार कर दिया था।  तब मुगल शासक औरंगजेब ने इस्लाम कबूल न करने पर गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। गुरु तेगबहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा शीश गंज साहिब है।

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story of guru Teg Bahadur sacrifice for the eternal values of religion

धर्म विरोधी और वैचारिक स्वतंत्रता का दमन करने वाली नीतियों के विरुद्ध गुरु तेग़ बहादुरजी का बलिदान एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी। यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। गुरु जी ने धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए कई जगहों की यात्राएं की। इन्हीं यात्राओं के बीच 1666 में गुरुजी के यहाँ पटना साहब में पुत्र का जन्म हुआ जो दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी बने।

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