फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Shardiya Navratri 2024 Second Day Maa Brahmacharini Puja Vidhi Mantra Bhog And Aarti in Hindi

Navratri Brahmacharini Puja: नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा,जानिए पूजाविधि और उपासना का फल

Fri, 04 Oct 2024 06:45 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 04 Oct 2024 06:45 AM IST
सार

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विशेष महत्व है। यह स्वरूप तप, त्याग और साधना का प्रतीक है।

विज्ञापन
Shardiya Navratri 2024 Second Day Maa Brahmacharini Puja Vidhi Mantra Bhog And Aarti in Hindi
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विशेष महत्व है। यह स्वरूप तप, त्याग और साधना का प्रतीक है। 'ब्रह्मचारिणी' शब्द का अर्थ है वह देवी जो ब्रह्म अर्थात तप और संयम का आचरण करती हैं। उनके इस रूप की उपासना करने से भक्त को संकल्प, संयम और धैर्य की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन


देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सौम्य और दिव्य है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनके हाथ में एक कमंडल और एक में माला है। यह रूप उनकी तपस्या और साधना का प्रतीक है। यह माना जाता है कि उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे वे तप और संयम की प्रतीक बन गईं। उनकी उपासना से भक्तों को अपनी साधना और ध्यान में सफलता प्राप्त होती है।
विज्ञापन


उपासना का फल
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह साधक को अडिग संकल्प और आत्म-नियंत्रण प्रदान करती है। इस दिन की पूजा का उद्देश्य आंतरिक शांति, संयम और धैर्य की प्राप्ति करना है। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का विकास होता है। इस दिन की उपासना से भक्त के सभी कार्य सफल होते हैं और उसे हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। इसके अलावा, ब्रह्मचारिणी मां की कृपा से मानसिक शांति प्राप्त होती है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। जो भक्त देवी ब्रह्मचारिणी की श्रद्धा और विश्वास से पूजा करते हैं, उन्हें ज्ञान, शक्ति, और विद्या की प्राप्ति होती है।  ब्रह्मचारिणी देवी की उपासना विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होती है जो किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। उनका तपस्वी रूप इस बात का संकेत है कि साधना और संयम से हर इच्छित लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर देवी ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद सबसे पहले संकल्प लें और देवी को मन, वचन और कर्म से प्रसन्न करने का व्रत लें।
पूजन सामग्री: पूजा में रोली, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य (विशेषकर मिश्री और पंचामृत), सफेद फूल और मिठाई का उपयोग करें। सफेद वस्त्रों और सफेद फूलों से देवी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। मंत्र जाप: देवी ब्रह्मचारिणी के बीज मंत्र का जाप करें। उनका बीज मंत्र है:


“ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः”।

इस मंत्र का 108 बार जाप करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

आरती: पूजा के अंत में देवी की आरती करें और भोग लगाएं। मिश्री, शक्कर, और पंचामृत का भोग देवी को विशेष प्रिय है।

ध्यान: आरती के बाद ध्यान करते हुए देवी से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें। ध्यान करते समय देवी का सफेद वस्त्रों में तपस्या करते हुए स्वरूप ध्यान में लाएं।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed