फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Shaligram Puja Significance Puja Vidhi in Hindi Shaligram Ki Puja Kyon Karte Hai

Shaligram Puja Significance: शालिग्राम शिलाओं की पूजा क्यों की जाती है, जानिए महत्व और पूजा विधि

Fri, 20 Jun 2025 01:31 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 20 Jun 2025 01:31 PM IST
सार

पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति शालिग्राम शिला का दर्शन करता है, स्नान कराता है और पूजन करता है वह करोड़ों यज्ञों और कोटि गोदान के बराबर पुण्य प्राप्त करता है।

विज्ञापन
Shaligram Puja Significance Puja Vidhi in Hindi Shaligram Ki Puja Kyon Karte Hai
Shaligram Puja Significance - फोटो : adobe

विस्तार

नेपाल की पवित्र गंडकी नदी में पाए जाने वाले काले, चिकने, अंडाकार पत्थरों को शालिग्राम शिला कहा जाता है। इनमें शंख, चक्र, गदा और पद्म जैसे शुभ चिन्ह स्वाभाविक रूप से अंकित होते हैं। कुछ शिलाओं पर सफेद चक्राकार धारियां होती हैं, जो इन्हें और भी विशेष बनाती हैं। शालिग्राम को भगवान विष्णु का प्रतीक मानकर बड़े श्रद्धा-भाव से पूजा की जाती है। पुराणों में इन शिलाओं को स्वयं ब्रह्मांड रूपी श्रीनारायण का स्वरूप बताया गया है।
विज्ञापन


शास्त्रों में शालिग्राम का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति शालिग्राम शिला का दर्शन करता है, स्नान कराता है और पूजन करता है वह करोड़ों यज्ञों और कोटि गोदान के बराबर पुण्य प्राप्त करता है। शालिग्राम की स्मृति, कीर्तन, ध्यान और प्रणाम करने से पाप नष्ट हो जाते हैं। जिस स्थान पर शालिग्राम और तुलसी दोनों विराजमान होते हैं, वहां भगवान श्रीहरि के साथ भगवती लक्ष्मी और समस्त तीर्थों का वास होता है। यह स्थान पूर्णतया पवित्र और दिव्य ऊर्जा से भर जाता है।
विज्ञापन


भगवान शिव द्वारा वर्णित महिमा
भगवान शिव ने स्वयं शालिग्राम की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा है कि करोड़ों कमल पुष्पों से की गई उनकी पूजा जितना फल देती है, उससे कई गुना फल शालिग्राम के पूजन से प्राप्त होता है। कोटि-कोटि शिवलिंगों के दर्शन, पूजन और स्तवन से जो पुण्य मिलता है, वह केवल एक शालिग्राम शिला के पूजन से सहज ही प्राप्त हो जाता है। जहां शालिग्राम की नियमित पूजा होती है, वहां किया गया दान और स्नान काशी के पुण्य से भी सौ गुना अधिक फलदायी माना गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

Shukrawar Upay: शुक्रवार का रखा है व्रत ? तो यहां जानें माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के सरल उपाय

शालिग्राम की पहचान
शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि सभी शालिग्राम शिलाएं पूजन योग्य नहीं होतीं। छत्राकार शालिग्राम के पूजन से राज्य सुख प्राप्त होता है, जबकि वर्तुलाकार शिला से धन और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है। इसके विपरीत, विकृत, फटी हुई, शूल के नोक के समान तीखी आकृति वाली, शकटाकार, पीलापन लिए हुए अथवा भग्न चक्र वाली शालिग्रामशिलाएं दरिद्रता, रोग और हानि का कारण बनती हैं। इन्हें घर या मंदिर में नहीं रखना चाहिए।

Guru Varun Yuti 2025: गुरु से बना शक्तिशाली योग, इन राशियों की पलट सकती है किस्मत

शालिग्राम पूजन से जीवन में आता है सौभाग्य
शालिग्राम शिला का पूजन केवल किसी पर्व विशेष तक सीमित नहीं है। प्रतिदिन श्रद्धा से शालिग्राम, तुलसी और शंख को सुरक्षित रखने और नियमित पूजन करने से घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। जल से अभिषेक, दीप अर्पण और तुलसी-दल चढ़ाने जैसे छोटे-छोटे कार्य भी अत्यंत पुण्यदायक माने गए हैं। जहां शालिग्राम की पूजा होती है, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। भगवान श्रीहरि ऐसे स्थान को अपने निवास योग्य मानते हैं और वहां सदा अपनी कृपा बनाए रखते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed