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Sawan Somwar 2023: सोमवार का व्रत करने से मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण,जानिए सोमवार व्रत के लाभ और कथा

Mon, 31 Jul 2023 11:48 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 31 Jul 2023 11:48 AM IST
सार

सोमवार का व्रत रखने से मनुष्य की दुःख और चिंताएं दूर होती हैं एवं शरीर के रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस व्रत को करने से कुंडली में चंद्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

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Sawan Somwar 2023 Somwar Puja Vidhi Katha Importance Of Sawan Somwar
sawan 2023: श्रावण मास में शिव पूजा विशेष रूप से फलदाई है। भोले भंडारी थोड़ी सी भक्ति करने से जल्दी ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विशेष रूप से सावन के सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। मान्यता है कि यदि कोई भी श्रद्धा भाव से सावन के सभी सोमवार का व्रत करता है तो उस व्यक्ति पर भगवान शिव और पार्वतीजी की अवश्य कृपा होती है।  

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सोमवार व्रत के लाभ
सोमवार का व्रत रखने से मनुष्य की दुःख और चिंताएं दूर होती हैं एवं शरीर के रोगों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस व्रत को करने से कुंडली में चंद्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। कुंवारी लड़कियां द्वारा इस व्रत को करने से उनको मनोकूल जीवन साथी मिलता है वही सुहागन महिलाओं का सौभाग्य अखंड रहता है,घर में सुख-शांति बनी रहती है।  
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सोमवार व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में बड़ा धनवान साहूकार रहा करता था, लेकिन वह साहूकार निःसंतान था। संतान प्राप्ति की इच्छा लिए वह साहूकार हर सोमवार व्रत किया करता और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव और पार्वती की पूजा करता। साहूकार की भक्ति से माता पार्वती बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने भगवान शिव से साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने के लिए कहा। देवी पार्वती के बार-बार आग्रह किए जाने पर भगवान शिव ने साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान तो दिया परंतु वह बालक केवल बारह वर्ष तक ही जीवित रह सकता था। कुछ समय बाद साहूकार के घर पुत्र ने जन्म लिया। जब साहूकार का बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे शिक्षा ग्रहण करने के लिए मामा के साथ काशी भेज दिया। काशी जाते समय मार्ग में एक नगर में कन्या का विवाह हो रहा था पर दुर्भाग्यवश जिस राजकुमार के साथ कन्या का विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था।
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राजकुमार के पिता ने अपने बेटे के एक आंख से काने होने की बात छुपाने के लिए साहूकार के बेटे से अपनी कन्या का विवाह करा दिया। साहूकार के बेटे ने सच्चाई बताने के लिए राजकुमारी की चुनरी के पल्ले पर लिखा कि तुम्हारा विवाह मेरे साथ हो रहा है परंतु मैं असली राजकुमार नहीं हूं। असली राजकुमार एक आंख से काना है। मैं तो यहां काशी में शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से आया हूं। जब राजकुमारी को सारी बात पता चली तो उसने ने अपने माता-पिता को सब बात बताई। अपनी पुत्री की बात सुनकर राजा ने अपनी बेटी को विदा नहीं किया। वहीं शिक्षा के लिए जा रहे मामा भांजे काशी में पहुंचे तो पहुंचते ही उन्होंने यज्ञ किया। जिस दिन यज्ञ था उसी दिन लड़के की आयु बारह वर्ष होनी थी। इस पर लड़के ने अपने मामा से कहा कि वह स्वस्थ महसूस नहीं कर रहा है। मामा ने भांजे को जाकर सोने के लिए कहा। भगवान शिव के वरदान के अनुसार सोते ही बालक के प्राण निकल गए।

मामा ने मृत भांजे को देखकर विलाप करना शुरू कर दिया। संयोग की बात थी कि उस समय शिव जी और पार्वती जी वहां से गुजर रहे थे। निकट जाकर देखा तो भगवान शिव और पार्वती जी को मालूम हुआ कि यह तो वही साहूकार का पुत्र है जिसे केवल बारह वर्ष तक जीवित रहने के वरदान दिया था। माता पार्वती भाव विभोर हो उठी और उन्होंने भगवान शिव से आग्रह किया कि हे! प्रभु आप इसे और आयु प्रदान करें नहीं तो इसके माता पिता इसके जाने के वियोग सहन नहीं कर पाएंगे।

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भगवान शिव ने साहूकार के बेटे को जीवनदान दे दिया। शिक्षा समाप्त कर जब मामा भांजे घर की ओर निकले तो सबसे पहले वे इस नगर में पहुंचे जहां उस लड़के का विवाह हुआ था। वहां पहुंचकर उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया तो राजकुमारी के पिता उस लड़के के पहचान गए और उन्होंने अपनी पुत्री को उसके साथ विदा कर दिया। तीनों लोग ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर पहुंच गए।  उसी रात्रि को साहूकार के सपने में भगवान शिव ने आकर कहा कि हे! श्रेष्ठी मैंने तेरे सोमवार के व्रत और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है। इस तरह जो भी भक्तजन सोमवार का व्रत करेगा और पार्वती संग मेरी पूजा करेगा उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होंगी।


 
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