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Sawan 2021: भगवान शिव को क्यों कहा जाता है नीलकंठ, कैसे पड़ा महादेव का यह नाम

Tue, 10 Aug 2021 08:00 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 10 Aug 2021 08:00 AM IST
सार

समुद्र मंथन से निकले कालकूट नामक विष को पीकर ही भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। इस विष को पीकर ही महादेव ने इस सृष्टि की रक्षा की थी।

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sawan ka tisra somvar 2021 story behind the lord shiva name neelkantha
सावन 2021 - फोटो : Social media

विस्तार

शिव भक्तों के लिए सावन माह सभी महीनों में सबसे पवित्र माह होता है। इसलिए इस माह को भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। भगवान शिव को भोलेनाथ, जटाधारी, शंभूनाथ, महादेव, शंकर जी आदि नामों से जाना जाता है। इनमें महादेव का एक नाम और है- नीलकंठ। भगवान शिव को नीलकंठ कहा जाता है। उनका यह नाम क्यों पड़ा, इसके पीछे का कारण क्या है। इस संबंध में पुराणों में एक कथा का वर्णन मिलता है जो इस प्रकार है-

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देवासुर संग्राम के समय मंथन से 14 रत्न निकले और इन्हीं रत्नों में कालकूट नामक भयंकर विष निकला। उस विष की अग्नि से दसों दिशाएं जलने लगीं। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया। देवताओं और दैत्यों सहित ऋषि, मुनि, मनुष्य, गंधर्व और यक्ष आदि उस विष की गरमी से जलने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान शिव विषपान के लिए तैयार हो गए। उन्होंने भयंकर विष को हथेलियों में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गए। भगवान विष्णु अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं।
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उन्होंने उस विष को शिवजी के कंठ में ही रोक कर उसका प्रभाव समाप्त कर दिया। विष के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे संसार में नीलंकठ के नाम से प्रसिद्ध हुए। जिस समय भगवान शिव विषपान कर रहे थे, उस समय विष की कुछ बूंदें नीचे गिर गईं। जिन्हें बिच्छू, सांप आदि जीवों और कुछ वनस्पतियों ने ग्रहण कर लिया। इसी विष के कारण वे विषैले हो गए। विष का प्रभाव समाप्त होने पर सभी देवगण भगवान शिव की जय-जयकार करने लगे। 

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