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Ratha Saptami: परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए सूर्य रथ सप्तमी पर करें ये पांच उपाय

Mon, 03 Feb 2025 05:25 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 03 Feb 2025 05:25 PM IST
सार

सूर्य रथ सप्तमी पर भगवान सूर्यदेव की पूजा-आराधना करने के साथ-साथ कई तरह के उपाय किए जाते हैं जिससे व्यक्ति का भाग्य चमक उठता है।

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Ratha Saptami Upay and Sun Worship To Get Relief Of All Kinds Of Suffering
रथ सप्तमी 2025 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Ratha Saptami 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार रथ सप्तमी का व्रत हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। रथ सप्तमी का यह पर्व भगवान सूर्यदेव को समर्पित होता है। इस दिन भगवान भास्कर की पूजा-आराधना और मंत्रोंचार करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना करने से धन-धान्य में वृद्धि और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। रथ सप्तमी पर भगवान सूर्यदेव की पूजा-आराधना करने के अलावा कई तरह के उपाय किए जाते हैं जिससे व्यक्ति का भाग्य चमक उठता है। आइए जानते हैं रथ सप्तमी पर कौन-कौन से ज्योतिषीय उपाय करके सूर्यदेव को प्रसन्न किया जा सकता है। 
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सूर्यदेव को अर्घ्य
हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उनको प्रसन्न किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार सप्तमी तिथि सूर्यदेव को अतिप्रिय है। इस दिन प्रातःकाल नहाकर उगते हुए सूर्य को जल देने के लिए तांबे के लोटे में जल,लालचन्दन,चावल,लालफूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए। इससे आयु,आरोग्य,धन धान्य, यश,कांति,विद्या,वैभव और सौभाग्य आदि की प्राप्त होती है।
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आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों, कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, ऊर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है। “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था। विशेष रूप से इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है। इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है। 
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उपवास 
शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान के निमित्त व्रत करने से हर तरह की शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में लिखा है कि सूर्य का व्रत करने से काया निरोगी तो होती ही है, साथ ही अशुभ फल भी शुभ फल में बदल जाते है। अगर इस दिन व्रत कथा सुनी जाए तो इससे मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है। व्रत में नमक का उपयोग न करें।

दान करने से शुभ फल की प्राप्ति 
इस दिन सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। कुंडली में सूर्य के दोष दूर हो जाते हैं और धन,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

मंत्रों का जाप
ऊँ आदित्याय विदमहे प्रभाकराय धीमहितन्न: सूर्य प्रचोदयात्।
ऊँ सप्ततुरंगाय विद्महे सहस्त्रकिरणाय धीमहि तन्नो रवि: प्रचोदयात।

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