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Ratha Saptami 2025: आरोग्य रथ सप्तमी कल, जानिए महत्व और पूजा विधि

Mon, 03 Feb 2025 11:33 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 03 Feb 2025 11:33 AM IST
सार

Ratha Saptami 2025: उदयातिथि के अनुसार 04 फरवरी को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था, इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से सूर्य उपासना करने का विधान है, जिससे आरोग्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु प्राप्त होती है।

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Ratha Saptami 2025 Date Rituals Importance Significance Puja Vidhi in Hindi
रथ सप्तमी, सूर्य सप्तमी या सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ratha Saptami 2025: आरोग्य रथ सप्तमी हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। सप्तमी तिथि को भगवान सूर्य का आविर्भाव हुआ। भगवान सूर्य ने इसी दिन सारे जगत को अपने प्रकाश से आलोकित किया था। यह तिथि भगवान सूर्य को समर्पित होती है और इसे रथ सप्तमी, सूर्य सप्तमी या सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 04 फरवरी को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर होगी और अगले दिन 05 फरवरी को देर रात 02 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार 04 फरवरी को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था, इसलिए इसे सूर्य जयंती भी कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से सूर्य उपासना करने का विधान है, जिससे आरोग्य, सुख-समृद्धि और दीर्घायु प्राप्त होती है।
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सूर्यदेव की उपासना का महत्व
शास्त्रों में सूर्यदेव को सृष्टि का आधार और समस्त जीवों के जीवनदाता के रूप में वर्णित किया गया है। वे न केवल पृथ्वी पर प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि व्यक्ति को  स्वास्थ्य, बुद्धि, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करते हैं। आरोग्य रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और उसे उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से त्वचा रोग, हृदय रोग, और नेत्र संबंधी समस्याओं में इस दिन की पूजा लाभकारी मानी जाती है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन प्रातःकाल स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से पिछले जन्मों के दोष समाप्त हो जाते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस दिन किया गया व्रत और पूजा सात जन्मों तक पुण्य फल प्रदान करने वाला होता है। ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में होता है, उन्हें इस दिन विशेष रूप से सूर्यदेव की आराधना करनी चाहिए, जिससे उनकी कुंडली दोष मुक्त हो सके और जीवन में उन्नति के मार्ग खुल सकें।
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पूजा विधि
आरोग्य रथ सप्तमी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर में तिल, कच्चे दूध और गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण करके सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर उनकी पूजा करनी चाहिए। पूजा में लाल पुष्प, अक्षत, तिल, गुड़ और चंदन अर्पित किए जाते हैं।

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सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए तांबे के पात्र में जल, गुड़, लाल पुष्प और तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। व्रत करने वाले व्यक्ति को फलाहार ग्रहण करना चाहिए और दिनभर भगवान सूर्य के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

सूर्यदेव की कथा सुनना और दान करना भी इस दिन शुभ माना जाता है। गुड़, तिल, चावल, लाल वस्त्र, तांबे के पात्र और गौदान करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन विशेष रूप से सूर्यदेव को खीर और गुड़ से बनी वस्तुओं का भोग अर्पित करने का महत्व है। पूजा समाप्त होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना और जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है।

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