Ram Navami 2024: कैसे हुई थी भगवान राम की मृत्यु? जानें इससे जुड़े ये तथ्य
प्रभु श्री राम के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी कहानियां हैं जो आज भी सोचने पर मजबूर कर देती हैं। श्री राम के जन्म की कथा तो सभी ने सुनी हुई है लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री राम की मृत्यु कैसे हुई थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Ram Navami 2024: : अयोध्या में भगवान श्री राम जन्म मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। चैत्र मास की नवमी तिथि का आरंभ 16 अप्रैल के दिन मंगलवार को दोपहर 1 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ होगा और नवमी तिथि 17 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। श्री राम को विष्णु जी के सातवें अवतार के रूप में पूजा जाता है। प्रभु श्री राम के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी कहानियां हैं जो आज भी सोचने पर मजबूर कर देती हैं। श्री राम के जन्म की कथा तो सभी ने सुनी हुई है लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्री राम की मृत्यु कैसे हुई थी। आइए जानें प्रभु श्री राम की मृत्यु से जुड़ी कथाओं के बारे में।
कैसे हुई प्रभु श्री राम की मृत्यु
श्री राम की मृत्यु से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार जब सीता माता ने अपने दोनों बच्चों लव और कुश को प्रभु श्रीराम को सौंपा और धरती माता में समा गईं। माता सीता के जाने से प्रभु श्रीराम बहुत दुखी हो गए। उन्होंने यमराज से सहमति लेकर सरयू नदी में जल समाधि ली।
दूसरी कथा
एक अन्य कथा के अनुसार भगवान राम ने धरती पर 1000 वर्षों से भी ज्यादा समय तक शासन किया। पद्मपुराण के अनुसार भगवान राम जब अपना अवतारकाल समाप्त करके एक ऋषि का रूप धारण करके आये तब यमराज भी एक ऋषि के रूप में आए और उन्होंने राम जी से बात करने का आग्रह किया और यह शर्त रखी कि बात करते समय कोई भी बीच में न आए। उस समय प्रभु श्री राम ने भ्राता लक्ष्मण से कहा कि वो एकांत चाहते हैं , इसलिए आप दरवाज़े पर खड़े हो जाएं जिससे कोई भीतर प्रवेश न कर सके। इतनी देर में ऋषि दुर्वाशा वहां आ गए और राम जी से मिलने का आग्रह करने लगे। लक्ष्मण जी के मना करने पर भी ऋषि नहीं माने और क्रोधित होकर बात करने लगे। लक्ष्मण जी दुर्वासा के क्रोध से बचने के लिए कमरे में प्रवेश कर गए जहां श्री राम वार्तालाप कर रहे थे। ये देखकर श्री राम भी लक्ष्मण पर कुपित हुए और उन्हें मृत्यु दंड न देकर देश निकाला दे दिया। लक्ष्मण जी के लिए वह भी मृत्यु सामान ही था,इसलिए वो सरयू नदी में समा गए और शेषनाग का रूप धारण कर लिया। भाई की जलसमाधि से आहत होकर श्रीराम ने भी जल समाधि का निर्णय लिया। वो सरयू नदी के अंदर गए और भगवान विष्णु का अवतार ले लिया। इस तरह श्रीराम ने मानव शरीर त्याग दिया और बैकुंठ धाम चले गए।