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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Paush Putrada Ekadashi 2024 Shubh Yoga Puja Vidhi Vrat Parana Time And Niyam In Hindi

इस दिन है पौष पुत्रदा एकादशी, जानें पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

Tue, 16 Jan 2024 03:09 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 16 Jan 2024 03:09 PM IST
सार

धर्म शास्त्रों के अनुसार मुख्य रूप से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए रखा जाता है। ऐसे में जो लोग नि:संतान हैं, उनको यह व्रत जरूर रखना चाहिए। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती।

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Paush Putrada Ekadashi 2024 Shubh Yoga Puja Vidhi Vrat Parana Time And Niyam In Hindi
पौष पुत्रदा एकादशी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। एक पौष माह की शुक्ल पक्ष में और दूसरी सावन माह के शुक्ल पक्ष में। इस साल पौष माह की पुत्रदा एकादशी का व्रत 21 जनवरी दिन रविवार को रखा जाएगा। इस व्रत में जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। मान्यता है कि पौष पुत्रदा एकादशी व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्यफल की प्राप्ति होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार मुख्य रूप से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए रखा जाता है। ऐसे में जो लोग नि:संतान हैं, उनको यह व्रत जरूर रखना चाहिए। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती। तो चलिए जानते हैं पौष माह की पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में...
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पौष पुत्रदा एकादशी तिथि 
पौष शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 20 जनवरी 2024 को शाम 07 बजकर 27 मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन 21 जनवरी 2023 सायं 07 बजकर 28 मिनट पर होगा। एकादशी का व्रत हमेशा सूर्योदय से प्रारम्भ होता है, इसीलिए उदयातिथि के अनुसार 21 जनवरी को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। 
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  • विष्णु पूजन का समय - प्रातः 08 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक
  • पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय- 22 जनवरी प्रातः 07 बजकर 14 मिनट से प्रातः 09 बजकर 21 मिनट पर

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत और पूजा विधि
  • पौष पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प कर शुद्ध जल से स्नान करें। 
  • फिर धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान विष्णु का पूजन, रात को दीपदान करें। 
  • साथ ही एकादशी की सारी रात भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें और श्री हरि विष्णु से अनजाने में हुई भूल या पाप के लिए क्षमा मांगें।
  • अगली सुबह स्नान करके पुनः भगवान विष्णु की पूजा करें। 
  • ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद ही खुद भोजन कराना चाहिए।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व 
इस व्रत को करने से श्रीहरि विष्णु के अलावा मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई जातक इस व्रत को विधि पूर्वक करता है, तो जल्द ही उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा लंबे समय से रुके हुए कार्य भी पूरे हो सकते हैं। 
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