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शिवभक्त अभिनेता आशुतोष राणा ने कुछ इस तरह से किया महादेव के अलौकिक स्वरूप का वर्णन...

Sat, 18 Feb 2023 10:49 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 18 Feb 2023 10:49 PM IST
सार

महाशिवरात्रि के मौके पर शिवभक्त और अभिनेता आशुतोष राणा ने अमर उजाला.कॉम के साथ महादेव के अलौकिक स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया।

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on mahashivratri the most beautiful description of mahadev's form by famous actor Ashutosh Rana
आशुतोष राणा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

18 फरवरी 2023 को महाशिवरात्रि के मौके पर पूरा देश भोलेभंडारी की भक्ति में लीन था। देश के सभी शिवालयों में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई दी। सुबह से ही सभी शिव भक्त अपने आराध्य और देवों के देव महादेव की पूजा-उपासना और मंत्रोचार करते हुए उनकी भक्ति में डूबे हुए थे। 18 फरवरी को शाम होते ही उज्जैन के महाकाल और काशी विश्वनाथ समेत सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में शिव आराधना के महापर्व के मौके पर लाखों की संख्या में दीपक जगमगाए, तो वहीं शिव भक्तों ने शरीर पर भस्म और गले में नरमुंडों की माला धारण करके शिवजी की बरात निकाली। हर-हर महादेव के जयकारे के साथ काशी समेत सभी शहर शिवमय हो गए।
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महाशिवरात्रि के मौके पर शिवभक्त और अभिनेता आशुतोष राणा ने अमर उजाला.कॉम के साथ महादेव के अलौकिक स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया। शिवजी के स्वरूप ,आभूषण, नाम, श्रृंगार और जीवन का सार समेत कई चीजों के बारे में बहुत ही सरल तरीके से बताया। शिवजी के स्वरूप में कई ऐसी बाते हैं जो हमे जिंदगी जीने के तरीके को सिखाती है। आइए एक-एक करके जानते हैं अभिनेता आशुतोष राणा ने शिवजी के स्वरूप को अपने अंदाज में किस तरह से वर्णन किया.... 
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1- शिव वह हैं जो बना दिया... वे उन्हीं के हो गए

अगर आप भोलेनाथ का निर्माण करते है तो वे आपके हो गए... अगर आप उनका अभिषेक करते हैं तो वे आपका अभिषेक करते हैं...जब आपके द्वारा मिट्टी से महादेव हो जाते हैं... तो उनके द्वारा मानव से ऊपर की अवस्था में आ जाते हैं।
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2- शिव जहां बना दिया...वहीं के हो गए

भगवान शिव को पीपल के पेड़ के नीचे बना दिया वे पिपलेश्वर महादेव हो गए...प्रभ राम ने बना दिया तो वे रामेश्वरम हो गए... ऐसे हैं भोलेनाथ

3-देवादेव का पूरा स्वरूप...आम व्यक्ति के करीब

भस्म को धारण करना, गले में सांप को धारण करना, बिच्छू आभूषण है वह सभी आम आदमी के जीवन की बाधाओं को प्रदर्शित करती है...

4- तमाम विसंगितियों के इर्द-गिर्द वास करते है भोलेभंडारी...

शिव का वाहन नंदी... मां पार्वती का वाहन सिंह। गणेश जी का वाहन मूषक... कार्तिकेय का वाहन मोर। ये सभी परस्पर विरोधी लेकिन जब शिव उपस्थित होते हैं तो तमाम विसंगितियां भी संगति में बदल जाती है।

5- सबकुछ लुटाकर भोलेभंडारी... स्वयं विराजाते हैं वीराने में

एक लोटा जल से प्रसन्न होने वाले देवादेव...बेलपत्र अर्पित करने पर पूरी करते हैं हर एक मनोकामना 

6- विष को आभूषण के रूप में धारण करने वाले भोलेभंडारी...

समुद्र मंथन से सबसे पहले विष निकला फिर अमृत। भोलेभंडारी ने विष को गले में धारण किया और कहलाए नीलकंठ। विष बुराई का प्रतीक है। भोलेनाथ ने बुराई को स्वीकारा लेकिन उसे अपने गले मे ही रोक ले लेते हैं। इस विष को न बाहर निकालते हैं और न ही स्वयं के पेट में जाने देते हैं। विष को बाहर नहीं निकालते ताकि दुनिया पर बुराई का असर न हो और खुद के पेट में जाने नहीं देते हैं जिससे उनके शरीर पर कोई बुरा असर न हो। शिवजी के नीलकंठ के स्वरूप से यह शिक्षा मिलती है कि बुराई का असर स्वयं पर न होने दे और न ही इसे समाज में फैलने दें।
 
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