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Mrityu Panchak: आज से शुरू हैं कष्टकारी मृत्यु पंचक, इस दौरान गलती से भी न करें ये काम
Sat, 09 Nov 2024 10:59 AM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sat, 09 Nov 2024 10:59 AM IST
सार
Mrityu Panchak 2024 Effect: इस बार पंचक 9 नवंबर शनिवार से शुरू होकर 13 नवंबर बुधवार तक रहेगा। शनिवार को भद्रा का साया भी रहेगा। ऐसे में शनि की महादशा और साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
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इस बार पंचक 9 नवंबर शनिवार से शुरू होकर 13 नवंबर बुधवार तक रहेगा।
- फोटो : istock
विस्तार
Mrityu Panchak November: ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को अशुभ काल माना जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है। पंचक काल को अशुभ नक्षत्रों का संयोजन माना जाता है और जब पंचक शनिवार को शुरू होता है तो इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। इस बार पंचक 9 नवंबर शनिवार से शुरू होकर 13 नवंबर बुधवार तक रहेगा। शनिवार को भद्रा का साया भी रहेगा। ऐसे में शनि की महादशा और साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
कैसे बनता है पंचक काल?
पंचक काल 5 दिनों का होता है, दरअसल चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन तक रहता है और जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है तो ये ढाई दिन कुल मिलाकर 5 दिन हो जाते हैं। इस दौरान 5 दिन धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र आते हैं जो शुभ नक्षत्रों में माने जाते हैं। इन पांच नक्षत्रों के समूह से बने संयोग को पंचक कहा जाता है।
मृत्यु पंचक का प्रभाव
शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है। जैसा कि नाम से पता चलता है, अशुभ दिन पर पंचक शुरू करने से जीवन में ऐसी समस्याएं आती हैं जो मृत्यु के समान होती हैं। इसलिए इन पांच दिनों में कोई भी अशुभ या जोखिम भरा काम नहीं करना चाहिए। इस प्रतिकूल समय के कारण दुर्घटना, चोट, विवाद, मुकदमेबाजी आदि की संभावना अधिक रहती है।
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पंचक काल में मृत्यु होने पर करें यह काम
पंचक के दौरान व्यक्ति की मृत्यु भी अशुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक काल के दौरान होती है, तो उसके परिवार का जीवन नष्ट हो सकता है। इससे बचने के लिए मृतक का अंतिम संस्कार करते समय आटे या कुश की पांच गुड़िया बनाकर शव के पास रखकर अंतिम संस्कार किया जाता है। इससे पंचक दोष दूर हो जाता है।
पंचक काल का दिन के अनुसार प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक का क्या प्रभाव पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि पंचक काल किस दिन प्रारंभ होता है। रविवार के पंचक को श्रृंग पंचक, सोमवार के पंचक को राज पंचक, मंगलवार के अग्नि पंचक, बुधवार और गुरुवार के पंचक को अशुभ पंचक, शुक्रवार के पंचक को चोर पंचक और शनिवार के पंचक को मृत्यु कहा जाता है।
पंचक काल में ना करें ये काम
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कैसे बनता है पंचक काल?
पंचक काल 5 दिनों का होता है, दरअसल चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन तक रहता है और जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है तो ये ढाई दिन कुल मिलाकर 5 दिन हो जाते हैं। इस दौरान 5 दिन धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र आते हैं जो शुभ नक्षत्रों में माने जाते हैं। इन पांच नक्षत्रों के समूह से बने संयोग को पंचक कहा जाता है।
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मृत्यु पंचक का प्रभाव
शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है। जैसा कि नाम से पता चलता है, अशुभ दिन पर पंचक शुरू करने से जीवन में ऐसी समस्याएं आती हैं जो मृत्यु के समान होती हैं। इसलिए इन पांच दिनों में कोई भी अशुभ या जोखिम भरा काम नहीं करना चाहिए। इस प्रतिकूल समय के कारण दुर्घटना, चोट, विवाद, मुकदमेबाजी आदि की संभावना अधिक रहती है।
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पंचक काल में मृत्यु होने पर करें यह काम
पंचक के दौरान व्यक्ति की मृत्यु भी अशुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक काल के दौरान होती है, तो उसके परिवार का जीवन नष्ट हो सकता है। इससे बचने के लिए मृतक का अंतिम संस्कार करते समय आटे या कुश की पांच गुड़िया बनाकर शव के पास रखकर अंतिम संस्कार किया जाता है। इससे पंचक दोष दूर हो जाता है।
पंचक काल का दिन के अनुसार प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक का क्या प्रभाव पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि पंचक काल किस दिन प्रारंभ होता है। रविवार के पंचक को श्रृंग पंचक, सोमवार के पंचक को राज पंचक, मंगलवार के अग्नि पंचक, बुधवार और गुरुवार के पंचक को अशुभ पंचक, शुक्रवार के पंचक को चोर पंचक और शनिवार के पंचक को मृत्यु कहा जाता है।
पंचक काल में ना करें ये काम
- पंचक के दौरान अग्नि से संबंधित कार्य करने से बचना चाहिए। इस समय ईंधन या लकड़ी एकत्र न करें। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से अग्नि भय रहता है।
- पंचक के दौरान दक्षिण की ओर यात्रा करना अनिश्चित होता है। दक्षिण दिशा को मृत्यु के देवता यम की दिशा माना जाता है।
- पंचक के दौरान घर में कोई भी निर्माण कार्य करने से बचना चाहिए। मकानों की छतें नहीं बनानी चाहिए तथा लेंटर डालने से भी बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में घर बनाने से आर्थिक हानि और घरेलू परेशानियां होती हैं।
- पंचक के दौरान आपको नई वस्तुएं खरीदने से बचना चाहिए, खासकर लोहे या लकड़ी से बनी वस्तुएं।