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Mohini Ekadashi 2023: आज ही के दिन देवताओं ने किया था अमृतपान, जानें मोहिनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
Mon, 01 May 2023 10:34 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Mon, 01 May 2023 10:34 AM IST
सार
Mohini Ekadashi 2023: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। इस साल 1 मई 2023 को मोहिनी एकादशी है।
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इस दिन देवताओं ने किया था अमृतपान, जानें मोहिनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Mohini Ekadashi Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। इस साल 1 मई 2023 को मोहिनी एकादशी है। मोहिनी एकादशी की तिथि 30 अप्रैल को रात 08 बजकर 28 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं इसकी समाप्ति 1 मई दिन सोमवार को रात 10 बजकर 09 मिनट पर होगी। उदया तिथि को देखते हुए 1 मई को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। मोहिनी एकादशी व्रत की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। ऐसे में चलिए आज जानते हैं कि इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी क्यों पड़ा और क्या है इसकी पौराणिक कथा...
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मोहिनी एकादशी कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन किया गया तो उससे अमृत कलश की प्राप्ति हुई। देवता और दानव दोनों ही पक्ष अमृत पान करना चाहते थे, जिसकी वजह से अमृत कलश की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद छिड़ गया। विवाद की स्थिति इतनी बढ़ने लगी कि युद्ध की तरफ अग्रसर होने लगी। ऐसे में इस विवाद को सुलझाने और देवताओं में अमृत वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया।
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इस सुंदर स्त्री का रूप देखकर असुर मोहित हो उठे। इसके बाद मोहिनी रूप धारण किए हुए विष्णु जी ने देवताओं को एक कतार में और दानवों को एक कतार में बैठ जाने को कहा और देवताओं को अमृतपान करवा दिया। अमृत पीकर सभी देवता अमर हो गए। जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था, उस दिन वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि थी। इस दिन विष्णु जी ने मोहिनी रूप धारण किया था, इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है।
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